आयातित नायलॉन यार्न पर MIP या एंटी डंपिंग ड्यूटी न लगाने की अपील

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सूरत। केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले सूरत के टेक्सटाइल वीविंग उद्योग ने सरकार के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं। नायलॉन वीवर्स एसोसिएशन सूरत, वेडरोड वीवर्स एसोसिएशन और सच्चिन इंडस्ट्रियल सोसायटी से जुड़े वीवर्स संगठनों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन को ज्ञापन भेजकर आग्रह किया है कि आयातित नायलॉन यार्न पर मिनिमम इम्पोर्ट प्राइस (MIP) या एंटी डंपिंग ड्यूटी (ADD) जैसी कोई नई व्यवस्था लागू न की जाए।

वीवर्स संगठनों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और घटती अंतरराष्ट्रीय मांग के चलते भारतीय टेक्सटाइल उद्योग पहले से ही दबाव में है। टेक्सटाइल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार कपड़ा निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि घरेलू बाजार में भी मांग कमजोर बनी हुई है। इस स्थिति का सीधा असर टेक्सटाइल हब सूरत पर पड़ा है, जहां कई यूनिटें सप्ताह में केवल चार दिन ही संचालित हो पा रही हैं।उद्योग पर नकारात्मक असर की आशंकावीवर्स का मानना है कि यदि बजट में आयातित नायलॉन यार्न पर MIP या एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने का निर्णय लिया गया, तो इससे वीविंग सेक्टर की लागत बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी।

खासकर छोटे और मध्यम स्तर की यूनिटों के लिए उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो सकता है, जिससे रोजगार पर भी असर पड़ने की आशंका है।घरेलू आपूर्ति क्षमता पर सवालसंगठनों ने यह भी कहा है कि घरेलू नायलॉन स्पिनर्स फिलहाल उद्योग की कुल मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा, हाई-स्पीड और आधुनिक मशीनों के लिए जिस स्तर की गुणवत्ता वाले यार्न की आवश्यकता होती है, वह भी घरेलू स्तर पर सीमित मात्रा में उपलब्ध है। ऐसे में आयात पर किसी भी प्रकार की अतिरिक्त बाधा से सप्लाई चेन प्रभावित होने का खतरा है।प्रोत्साहन योजना की मांगवीवर्स संगठनों ने सरकार से यह भी अपेक्षा जताई है कि मौजूदा मंदी के माहौल को देखते हुए बजट 2026-27 में टेक्सटाइल वीविंग उद्योग के लिए कोई राहत या प्रोत्साहन योजना घोषित की जाए, ताकि लाखों लोगों को रोजगार देने वाला यह क्षेत्र स्थिरता की ओर बढ़ सके।