अल्लाहबादिया IVF: डॉ. गौतम अल्लाहबादिया (Dr. Gautam Allahbadia) ने अपने वर्षों के अनुभव के आधार पर दुबई में खोला एक अत्याधुनिक IVF केंद्र

मातृत्व को हमेशा एक परम उपहार और एक गहन और कठिन यात्रा के रूप में वर्णित किया जाता है और यह यात्रा अद्वितीय आनंद, उद्देश्य और परिपूर्णता लाती है। अकसर लोगों के लिए, माता-पिता बनने का यह मार्ग काफी सीधा रहता है, लेकिन कई लोगो के लिए, मातृत्व का यह मार्ग चुनौतियों से भरा होता है।

अनिश्चितता के इस समय में, एक प्रजनन विशेषज्ञ (fertility specialist) की विशेषज्ञता और देखभाल मातृत्व की चुनौतियों में काफी अंतर ला सकती है। डॉ. गौतम अल्लाहबादिया, एक विश्व प्रसिद्ध प्रजनन एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और बांझपन विशेषज्ञ है, इन्होने अपना करियर लोगो के माता-पिता बनने के सपनों को साकार करने में मदद करने के लिए समर्पित कर दिया है।

डॉ. अल्लाहबादिया का प्रजनन उपचार के प्रति दृष्टिकोण काफी तकनीकी और वैज्ञानिक पहलुओं से परे है। वह किसी व्यक्ति पर पड़ने वाले भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक भार को समझते हैं जोकि बांझपन के द्वारा लोगो पर अकसर डाला जाता है क्यूँकि बांझपन को एक समाजिक बुराई माना जाता है। डॉ. अल्लाहबादिया का सबके लिए सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण उनके अभ्यास के केंद्र में विद्यमान है, जहाँ वे अत्याधुनिक तकनीक को रोगी की भलाई के लिए इस्तेमाल करते है ताकि रोगी का अधिक से अधिक भला हो सके और वह अपने मातृत्व के सपने को साकार कर सके।

हाल ही में, डॉ. अल्लाहबादिया ने दुबई में अपना एक नया अत्याधुनिक आईवीएफ क्लिनिक, जिसका नाम ‘अल्लाहबादिया फर्टिलिटी क्लिनिक’ है, लॉन्च किया है। यह क्लिनिक प्रजनन उपचार को आगे बढ़ाने के उनके प्रयासों और उद्देश्यों का प्रतिनिधित्व करता है और उनके शानदार करियर में एक और महत्वपूर्ण मील के पत्थर का कार्य करता है। दशकों के उनके सराहनीय कार्य और दयालु रोगी देखभाल के आधार पर, डॉ. अल्लाहबादिया प्रजनन उपचार के क्षेत्र को और आगे ले जाने का नेतृत्व कर रहे हैं।

नवाचार और करुणा की विरासत

डॉ. अल्लाहबादिया अल्ट्रासाउंड निर्देशित भ्रूण स्थानांतरण पर एक विश्व विख्यात विशेषज्ञ हैं और दक्षिण पूर्व एशिया में न्यूनतम उत्तेजना आईवीएफ के अग्रदूतों में से एक हैं। उनके काफी बड़े दृष्टिकोण ने प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति ला दी है, जिससे अनगिनत परिवारों को आशा की किरण मिली है। अपने करियर के दौरान, वे नए प्रजनन-बढ़ाने वाले प्रोटोकॉल विकसित करने और भ्रूण स्थानांतरण प्रक्रियाओं में अल्ट्रासाउंड के उपयोग को बढ़ावा देने में सहायक रहे हैं।

प्रजनन चिकित्सा में डॉ. अल्लाहबादिया का योगदान आम चिकिस्तकों के ​​योगदान से परे है। उन्हें रोम और इटली जैसे बड़े शहरों में मुख्यालय वाले वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ रिप्रोडक्टिव मेडिसिन (WARM) का उपाध्यक्ष चुना गया है, और उन्होंने 2004 में WARM की दूसरी विश्व कांग्रेस के वैज्ञानिक अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है। उनके नेतृत्व और समर्पण ने उन्हें उन्नत प्रजनन तकनीकों में 400 से अधिक चिकित्सकों के प्रशिक्षक के रूप में वैश्विक मान्यता दिलाई है।

अल्लाहबादिया फर्टिलिटी क्लिनिक में मिलेगा अत्याधुनिक प्रजनन समाधान

दुबई में खोल गया यह नया फर्टिलिटी क्लिनिक प्रजनन उपचारों की एक व्यापक श्रृंखला प्रदान करता है, जो अलग-अलग रोगीयों की अलग-अलग आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। इस क्लिनिक में प्रदान की जाने वाली सेवाओं में ICSI के साथ IVF शामिल है, जो सफलता का प्रतिशत बढ़ाने के लिए इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) को इंट्रासाइटोप्लाज़मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI) के साथ जोड़ती है।

इसके अतिरिक्त, क्लिनिक IVF लाइट प्रदान करता है, यह एक न्यूनतम उत्तेजना IVF दृष्टिकोण है जो रोगियों पर शारीरिक और वित्तीय तनाव को कम करता है। अपने परिवार के भीतर वांछित लिंग संतुलन प्राप्त करने की चाह रखने वालों के लिए, परिवार संतुलन सेवाओं में उन्नत प्रजनन तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, क्लिनिक व्यापक ​​​​सेवाएँ प्रदान करता है, जो प्रजनन समस्याओं का सटीक निदान करने और बार-बार होने वाली गर्भावस्था के नुकसान को दूर करने के लिए नवीनतम 3D/4D ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड तकनीक का उपयोग भी करता है।

फर्टिलिटी क्लिनिक में मिलेंगी उन्नत संरक्षण तकनीकें

डॉ. अल्लाहबादिया का क्लिनिक लम्बे परिवार नियोजन और प्रजनन क्षमता के संरक्षण का समर्थन करने के लिए बढ़िया संरक्षण तकनीकें भी प्रदान करता है। ऐसी ही एक सेवा है एग फ्रीजिंग, जो महिलाओं को भविष्य के परिवार नियोजन के लिए अपनी प्रजनन क्षमता को संरक्षित करने की अनुमति देती है। एग फ्रीजिंग तकनीक का उपयोग उन लोगो द्वारा किया जाता है जो व्यक्तिगत, पेशेवर या चिकित्सा कारणों से माता-पिता बनने में देरी करना चाहते हैं।

इसके अतिरिक्त, क्लिनिक कैंसर रोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण सेवा, गैमेट्स की ऑन्को-फ्रीजिंग प्रदान करता है। इस तकनीक में कीमोथेरेपी या विकिरण जैसे उपचारों से गुजरने से पहले शुक्राणु या अंडे को फ्रीज करना शामिल है, जो संभावित रूप से प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। यह सेवा प्रदान करके, डॉ. अल्लाहबादिया का क्लिनिक सुनिश्चित करता है कि गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे रोगियों के पास अभी भी माता-पिता बनने की अपनी भविष्य की संभावनाओं को संरक्षित करने का अवसर हो।

मरीजों के प्रति दयालु भावना और प्रतिबद्धता

क्लीनिक में किया गया हर सफल प्रजनन उपचार सबसे कीमती उपहार का रूप लेता है और वह है: जीवन का उपहार। डॉ. गौतम अल्लाहबादिया ने पाँच महाद्वीपों में 10,000 से अधिक IVF सफलता की कहानियों की देखरेख की है, जिनमें से प्रत्येक उनके असाधारण कौशल, अटूट समर्पण और दयालु देखभाल का प्रमाण है।

उनके काम ने अनगिनत परिवारों की जरूरतों को पूरा करके उन परिवारों को अपार खुशी दी है और प्रजनन चिकित्सा में जो संभव है उसकी सीमाओं को आगे बढ़ाया है। मातृत्व एक पवित्र यात्रा है, जो अपार खुशी और तृप्ति लाती है। डॉ. अल्लाहबादिया की व्यक्तियों और जोड़ों को माता-पिता बनने के उनके सपनों को पूरा करने में मदद करने की दृढ़ सोच मातृत्व के इस परम उपहार की शक्ति में उनके विश्वास को रेखांकित करती है। अपने अग्रणी कार्य और दयालु दृष्टिकोण के माध्यम से, वे उन लोगों के जीवन को गहराई से प्रभावित करना जारी रखेंगे हैं जिनकी वे सेवा करते हैं, दुनिया भर के परिवारों को आशा और नई शुरुआत प्रदान करते है।

पैकेजिंग मैटेरियल पर जीएसटी दर में कमी कपड़ा बाजार को बूस्टअप करेगा : एसजीटीटीए


कपड़ा व्यापार में इंश्योरेंस को लेकर व्यापारियों को सचेत करेगा एसोसिएशन

सूरत. साउथ गुजरात टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन (एसजीटीटीए) की बोर्ड मीटिंग शनिवार को रिंग रोड कोहिनूर हाउस स्थित एसोसिएशन के कार्यालय में की गई। मीटिंग में मई-जून में कपड़े की मांग पर संतोष जताया गया, वहीं जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में पैकेजिंग मैटेरियल पर जीएसटी 18 फीसदी से कम होने की सम्भावना का स्वागत किया गया। बोर्ड मीटिंग में डायरेक्टर्स ने इस पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे कपड़ा बाजार को बूस्ट अप मिलेगा। एसोसिएशन देशावर समेत सूरत के कपड़ा व्यापारियों को उत्पादित कपड़ा का इंश्योरेंस करने को लेकर जागरूक भी करेगा।

बोर्ड मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील कुमार जैन ने कहा कि इस वर्ष मई-जून में कपड़ा बाजार में ग्राहकी अपेक्षा से कहीं अधिक नजर आई। पिछले वर्षों की तुलना में इस साल कपड़ा व्यापार बढ़िया रहा जिससे बाजार में पॉजिटिविटी देखने को मिली। तीज-त्योहारों पर ग्राहकी अच्छे रहने के संकेत हैं, किन्तु इस बार चिंता की बात है कि जून में ही ग्रे की कीमत में जिस प्रकार से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। शेयर मार्केट की तरह ग्रे का बाजार जिस प्रकार चल पड़ा है, उसे देखते हुए हम सभी को आगे की तैयारियां संभल-संभल कर खरीदी करने की आवश्यकता है। एक समय के अंतराल में ग्रे बाजार वापस नीचे आता ही है। आपने कहा कि जीएसटी के वर्ष 2017, 2018, 2019 और 2020 के समय के नोटिस जो भी आए हैं, उसकी पेनाल्टी जीएसटी काउंसिल की ओर से निरस्त कर दी गई है।

ट्रेडर्स की जमा जीएसटी का इनपुट मिलना शुरू हो गया है। यह सभी व्यापारियों के लिए राहत भरी खबर है। जैन ने कहा कि पैकिंग मटेरियल पर जीएसटी 18 फीसदी से घटाकर सम्भावित 12 फीसदी होने के समाचार के नोटिफिकेशन का सभी को इंतजार है। सूरत के कपड़ा बाजार पर पैकिंग मटेरियल पर 18 फीसदी का जीएसटी बहुत बड़ा बोझ है, जिसके अब कम होने की उम्मीद जगी है। बोर्ड मीटिंग में डायरेक्टर्स ने सुझाव देते हुए चिटिंग की घटनाओं को लेकर चिंता जताई। डायरेक्टर्स ने विचार व्यक्ति किया कि आज के दौर में व्यापार बेहद सावधानी से करने की जरूरत है। कपड़ा बनाते और बेचते दोनों समय व्यापार करने वाले व्यक्ति की पूरी पुख्ता जानकारी यानी पैन कार्ड, आधार कार्ड के अलावा स्थायी अड्रेस आदि सभी लेना बेहद जरूरी हो गया है।

मीटिंग में सभी डायरेक्टर एक बात पर सहमत हुए कि देशावर के सभी व्यापारियों को सचेत करने की जरूरत है कि उनका गोदाम, शॉप और जिस ट्रांसपोर्टेशन से कपड़ा भेजते हैं, इन्स्योरेंस लेने की जरूरत है। आग की चपेट में आने पर पॉलिसी होने पर बहुत बड़ा सपोर्ट मिलता है। पॉलिसी लेते समय इसकी बारीकी से समझने की जरूरत है, कि कौन-कौन से रिस्क कवर हो रहे हैं। बोर्ड मीटिंग का संचालन एसजीटीटीए के महामंत्री सचिन अग्रवाल, संकलन उपाध्यक्ष सुनील मित्तल और आभार संतोष माखरिया ने जताया साथ ही नितिन गर्ग, प्रहलाद गर्ग, सुरेन्द्र जैन, विनोद अग्रवाल ने भी मीटिंग को सम्बोधित किया।

यूरोपियन देशो मे रूस के हीरो पर प्रतिबंध के लिए छह महीने का समय और बढ़ा, अब मार्च 2025 से लागू होगा!


सूरत
बीते दो साल से मंदी के दौर से गुजर रहे हीरा उद्यमियों के लिए राहत के समाचार है। यूरोपीय यूनियनों ने रूस के हीरो पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया था। अब इसका समय बदल कर 6 महीने के बाद कर दिया है। सूरत के हीरा उद्यमियों को मंदी से उभरने में राहत मिलेगीक्योंकि उनके पास स्टॉक में जो हीरे पढ़े हैं। उसे ख़ाली करने का मौक़ा मिलेगा। साथ ही रूस के हीरो को मंगाया जा सकेगा। इससे रफ हीरो की कमी समाप्त होगी।


हीरा उद्योग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यूरोपियन यूनियन ने रूस हीरो पर 1 सितंबर 2024 से प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया था। अब इसे 1मार्च 2025 कर दिया है। अर्थात की अब रूस के हीरो पर जो प्रतिबंध लगा था वह आगामी वर्ष से लगेगा। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद कई यूरोपीय देश रूस से नाराज़ थे।यूरोपियन देशो के संगठनों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने के लिए वहाँ के हीरो पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया था।इसके चलते रूस के माइन्स में से निकलने वाले हीरे यूरोपीय देशों में निर्यात करना प्रतिबंधित था। सूरत में तैयार होने वाले ज़्यादातर हीरे अमेरिका और यूरोपीय देशों में बिकते हैं।

इसलिए सूरत के हीरा उद्यमी इससे चिंतित थे चिंतित थे।हीरा उद्योग के संगठनों सहित कई देशों के संगठन से रूस के हीरो पर का प्रतिबंध के समय को बढ़ाने की माँग की थी। जिसके चलते यह फ़ैसला किया गया है।मार्च 25 से रूस के हीरो पर प्रतिबंध का नियम लागू हो जाएगा। उसके बाद से 0.50 केरेट के हीरे नहीं भेजे जा सकेंगे।वहाँ पर हीरे की जाँच पड़ताल के लिए मापदंड तय किए गए हैं। वहाँ हीरे भेजने के लिए सर्टिफिकेट की ज़रूरत होगी। उल्लेखनीय है कि सूरत के हीरा उद्यमी जाए जो हरा फिर आयात करते हैं उसमें लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा रूस का है। रूस के हीरो पर प्रतिबंध लगने के कारण सूरत के बाज़ार में रफ हीरो की समस्या दिखने लगी थी।
——- रफ हीरो की कमी दूर होगी
यूरोपीय देशों ने जो फ़ैसला लिया है।इससे सूरत के हीरा उद्योग को मदद मिलेगी। सूरत में हीरा उद्योग में रूस से बड़े पैमाने पर रफ हीरा आते हैं।प्रतिबंध के कारण रफ हीरो की कमी हो रही थी जो भी कुछ दिनों के लिए अब दूर हो जाएगी।
जगदीश खूँट,प्रमुख,सूरत डायमंड एसोसिएशन

सकारात्मक सोच और मानवीय हित के संदेश को मनोरंजन के साथ प्रस्तुत करता है तिवारी प्रोडक्शंस

मुंबई। ‘तिवारी प्रोडक्शन्स’ के सीईओ एस के तिवारी जिन्हें तिवारी सरकार के नाम से जाना जाता है। उनके प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले तीन यूट्यूब चैनल ‘सनातन वर्ल्ड’, ‘टीपीएस म्यूजिक’ और ‘तिवारी प्रोडक्शन्स’ का एंटरटेनमेंट चैनल कई वर्षों से लगातार चल रहा है। तिवारी प्रोडक्शन्स के सभी यूट्यूब चैनल एक सकारात्मक सोच और मानवीय हित के संदेश को मनोरंजन के साथ एक सुंदर छवि में प्रदर्शित करते हैं। सनातन वर्ल्ड यूट्यूब चैनल सनातन हिन्दू धर्म से ओतप्रोत एक भक्ति चैनल है जिसमें वेद, उपनिषद, भागवत, वेदांग, पुराण आदि हिन्दू धर्म से जुड़े पवित्र पुस्तकों में लिखित ज्ञान को भजनों, विवरण गीतों और आरती को समस्त सनातनियों के लिए गीत संगीत के माध्यम से मनोरंजन के साथ धर्म का सार प्रदान करता है।

टीपीएस म्यूजिक चैनल भी बॉलीवुड गीतों, सदाबहार गानों, हिंदी या अन्य प्रदेशिक भाषा के गीतों और म्यूजिक वीडियो का निर्माण और प्रदर्शन करता है। तिवारी प्रोडक्शन्स के तीसरे चैनल में तिवारी प्रोडक्शन्स के बैनर तले बनने वाली शॉर्ट फिल्म, फीचर फिल्म, फिल्म टीज़र और सीरीज को फैमिली मनोरंजन के साथ प्रदर्शित किया जाता है।

विदित हो कि एस के तिवारी (तिवारी सरकार) बेहद सुलझे, समझदार, कर्मठ और जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं। वह अपने नियमों और सिद्धांतों के साथ कार्य करना पसंद करते हैं, जिससे उन्हें आत्म संतुष्टि मिलती है। तिवारी सरकार कर्म करने पर विश्वास रखते हैं फल की इच्छा पर नहीं। अपने प्रोजेक्ट के शूटिंग के समय कलाकारों और अपनी टीम मेंबर्स के सम्मान का ख्याल रखते हैं, उनके पेमेंट वह शूटिंग समाप्त होने के घंटे भर पहले ऑन द स्पॉट दे देते हैं।

फिल्म, सीरीज या म्यूजिक वीडियो आदि निर्माण कार्य के समय सभी कलाकार, तकनीशियन और प्रोडक्शन से जुड़े अन्य लोग भी शुद्ध सात्विक और शाकाहारी आहार ही ग्रहण करते हैं। किसी भी आर्टिस्ट या टीम मेंबर को कार्य के दौरान मदिरापान या धूम्रपान की आज्ञा नहीं है और यदि इस नियम को तोड़ा जाता है तो तिवारी सरकार उनके साथ आगे कार्य नहीं करते चाहे इसके लिए उन्हें हानि ही क्यों न उठानी पड़ जाए। परिधानों का भी विशेष ध्यान रखा जाता है कि वह फिल्मी ना हो बल्कि शालीन हो। तिवारी सरकार जिस कर्मठता से लगातार काम कर रहे हैं वह बेहद सराहनीय है, क्योंकि जैसे नियम और परिस्थियां है अगर कोई दूसरी कंपनी का सीईओ या चेयरपर्सन होता तो निश्चय ही वह हार मान लेता।

तिवारी प्रोडक्शंस बहुत जल्दी हिंदी फिल्म तिवारी सरकार प्रदर्शित करेगा, जो एक बड़ी फिल्म है जिसमें प्रमुख भूमिका तिवारी सरकार यानि कि एस के तिवारी हैं।

तिवारी सरकार अपने सिद्धांतों के पक्के हैं किसी अन्य कंपनी के साथ साझा कार्य नहीं करतेक्योंकि वह अपने सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं करना चाहते। जितने वे सक्षम हैं वह उतना ही कार्यभार लेते हैं। अपने आत्मसम्मान और स्वाभिमान को ताक में रखकर तिवारी प्रोडक्शन्स कोई कार्य नहीं करता, उनके कार्यों को देखकर कई ओटीटी चैनल उन्हें अपने साथ काम करने का ऑफर दे रहे हैं किंतु उन्होंने इस ऑफर को अस्वीकार कर दिया। क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनके वीडियो में ऐसा कोई भी दृश्य का समावेश हो जो अश्लीलता की श्रेणी में आता हो। उनका चैनल मनोरंजन के साथ राष्ट्र हित, मानव हित और सनातन हिन्दू धर्म के उत्थान के लिए कार्य कर रहा है।

तिवारी प्रोडक्शन्स एक मात्र ऐसा प्रोडक्शन हाउस है जिसके सारे चैनल उनके लिए धन कमाने का साधन नहीं अपितु लोक कल्याण और धर्म के प्रचार का माध्यम है, जिसमें वह आर्थिक हानि सहकार भी केवल राष्ट्रहित और धर्म हित में काम करते हैं। इनके चैनल के लेख सामग्री मानव सभ्यता, मर्यादा, रीति रिवाज और परंपराओं से भरी हुई, पारिवारिक और अश्लीलता विहीन होती है।

वर्तमान समय में पश्चिमी और कोरियाई सभ्यता की ऐसी आंधी आई है जो आधुनिकता के नाम पर हमारी युवा पीढ़ी को गुमराह कर रही है। हमारी संस्कृति, रीति रिवाजों, परंपराओं और खासकर परिवार से एक दूसरे को दूर कर रही है। बुजुर्गों का सम्मान, सनातन हिन्दू धर्म का ज्ञान और हमारे भारत की प्राचीनतम सभ्यता और धरोहर से सब परे होते जा रहे हैं। ऐसे कलयुगी समय में तिवारी प्रोडक्शन्स अपने सिद्धांतों के साथ अडिग खड़ा है। तिवारी प्रोडक्शन्स के सभी चैनलों से जुड़कर हम अपनी सभ्यता, संस्कृति और वैदिक ज्ञान जैसी कई अन्य जानकारियों के साथ जुड़ सकेंगे।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें हमारी वेबसाइट: WWW.TIWARIPRODUCTIONS.com  

यतीश कुमार की बहुप्रशंसित पुस्तक ‘बोरसी भर आँच’ पर परिचर्चा का कार्यक्रम का आयोजन किया गया

बीसी रॉय इंस्टिट्यूट, सियालदाह में यतीश कुमार की बहुप्रशंसित पुस्तक ‘बोरसी भर आँच’ पर परिचर्चा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हिंदी के सुपरिचित कवि-लेखक  देवी प्रसाद मिश्र, प्रो. हितेन्द्र पटेल, प्रोफेसर वेदरमण, प्रो. संजय जायसवाल, ऋतु तिवारी और योगाचार्य भूपेन्द्र शुक्लेश वक्ता के तौर पर उपस्थित थे। स्मिता गोयल ने अंगवस्त्र प्रदान कर सभी वक्ताओं का स्वागत व सम्मान किया।

लेखक, यतीश कुमार, मूलतः बिहार के मुंगेर जिले से हैं। भारतीय रेलवे सेवा के प्रशासनिक अधिकारी हैं और 22 वर्ष की उत्कृष्ट सेवाओं के फलस्वरूप इन्हें भारत के ‘सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम’ का सबसे युवा अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक बनने का गौरव प्राप्त है। साहित्य सृजन के साथ-साथ विभिन्न साहित्यिक-सामाजिक संस्थाओं से भी सक्रिय रूप से जुड़े हैं। पिछले कुछ वर्षों में, चर्चित उपन्यासों, कहानियों, यात्रा-वृतान्तों पर अपनी विशिष्ट शैली में कविताई और काव्यात्मक समीक्षा के लिए इन्होंनें अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

कार्यक्रम का कुशल संचालन आलोचक विनय मिश्र नें बड़े ही सधे हुए अंदाज में किया। यतीश जी के बचपन के मित्र और इस किताब के किरदार लाभानंद जी राँची से आकर कार्यक्रम में शरीक हुए। निर्मला तोदी, कथाकर विजय शर्मा, मृत्युंजय श्रीवास्तव, मंजू रानी श्रीवास्तव, अनिला रखेचा, पूनम सोनछत्रा, रचना सरण, मनोज झा, आनंद गुप्ता, पूनम सिंह,कवि सुनील शर्मा के साथ  रेलवे के और भी अधिकारीगण अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। ऑडिटोरियम प्रबुद्ध श्रोताओं से अंत तक भरा रहा।

अपनी बात रखते हुए प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि ‘यह किताब व्यक्तिगत सत्य से सामाजिकता का सफर तय करती है। यह सिर्फ कथा नहीं है नई पीढ़ी को शिक्षा देने वाली किताब है। यह किताब सिर्फ अपने व्यक्तिगत पारिवारिक बखान नहीं करती हैं अपितु उस वक्त की सामाजिकता, राजनीतिकरण का सकारात्मक आख्यान है।’

भूपेंद्र शुक्लेश ने कहा कि ‘यह किताब आत्म-कथात्मक दस्तावेज है। इसे किसी प्रचलित श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। कोई नई श्रेणी ही तय की जानी चाहिए। किताब जीवन का साझा दस्तावेज है। जीवन को इतना खरा रख दिया कि जीवन अंगारे सा लगे। स्पष्टता, सत्यता, विनम्रता इस किताब की जान है। आध्यात्मिक जीवन में अच्छे-बुरे को किसी मापदंड में नहीं तौला जाता। इस किताब में बहुत कुछ ऐसा है कि आपको जीवन मुफ्त में जीने मिलेगा। आग्रह करुंगा कि जीवन में किसी चीज से वंचित न रह जाएं तो इस किताब से गुज़रे। वृहत रूप में कहें तो इस किताब को पढ़ना जीवन को जीना सिखाता है।’

ऋतु तिवारी ने ‘बोरसी भर आँच’ को एक बाइस्कोप बताते हुए कहा कि लेखक ने अपने अतीत में जाकर लिखा है। इस किताब की खास बात यह है लेखक की ईमानदारी। हमें अपने जीवन के प्रति, लेखन के प्रति ईमानदार होना चाहिए। ईमानदारी हमें संवेदनशील बनाती है। आप जब इस किताब से गुज़रेंगे तो देखेंगे कि रेल की पटरियों की तरह ही चीकू के व्यक्तित्व का विस्तार हुआ है। चीकू का संघर्ष कई मायने में मानवीय है, प्रेरणा तो ले सकते हैं पर क्या हम यह कर पायेंगे कि जब हम उस संघर्ष में हो तो उतने ही मानवीय रह पायेंगे। ‘बोरसी की आँच’ विस्तार की प्रतिबद्धता की, जीवन दर्शन की आँच है। ये किताब हमें ये सोचने के लिए मजबूर करेगी कि हम भी अपने जीवन के प्रति, अपने समाज के प्रति इतने ही ईमानदार हो सकते हैं चाहे परिस्थितियों कैसी भी हो।

प्रोफेसर, आलोचक वेद रमण ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह यतीश जी की पद्य से गद्य की, अतीत से बाइस्कोप की यात्रा है। इस पुस्तक में जीवन संघर्ष अगर किसी का है तो वह माँ का है। जीवन साहस अगर किसी का है तो दीदी का है। जीवन मेधा अगर किसी की है तो बड़े भाई की, जीवन प्रेम  अगर किसी का है तो स्मिता का है, तब इस पुस्तक में चीकू क्या है ? दरअसल गो-रस की तरह चीकू ने अपने जीवन को धीरे-धीरे पकाया और इन सबको ले चीकू इस पुस्तक के केंद्र में आ गया। एक नक्षत्र बन गया, एक सितारे की तरह चमक गया। आज के समय में जब सब अपनी-अपनी स्मृतियों को लिखने में लगे हैं, यह पुस्तक साझी स्मृतियों की बात कहती है। इस पुस्तक से सूक्तियों का एक संकलन तैयार किया जाए तो एक अलग पुस्तिका निकाली जा सकती है।

साहित्य में सफलता के लिए क्या चाहिए, व्यवहार कुशल होना चाहिए, प्रबंध कौशल होना चाहिए, संसाधन कौशल भी होना चाहिए। सभी से ऊपर कौशल को क्रियान्वित करने की कुशलता भी होनी चाहिए। यह किताब एक व्यक्ति के,आज की युवा पीढ़ी के स्वपन व संघर्ष की गाथा है।

प्रो. हितेंद्र पटेल ने कहा कि ‘एक समाज के रूप में हम बहुत पीछे हैं बल्कि हमारा समाज अभी बन रहा है। अब हम एक ऐसे समाज में आ चुके हैं जहां सभ्य बनने की गुंजाइश ख़ुद पैदा करनी होगी। साहित्य दर्द का ही एक बड़ा आख्यान बन कर ही आता है।  इस किताब की ईमानदारी व्यक्तिगत ईमानदारी नहीं है। समाज-गत ईमानदारी है।

ये किताब आत्मकथा तो नहीं है। आत्म-कथात्मक है, आत्मकथा के लिये खोजबीन में जाना होगा और ये किताब सैरबीन है। इस किताब में सब कुछ है बस उसे खोजना होगा। सत्य संरचना का पर्याय यश कभी नहीं हो सकता। यतीश जी ने अचूके ही सही उस समय के यथार्थ को छू दिया है जो टप-टप बूंद के रुप में किताब में झर रहा है और हमें चाहिए कि उस यथार्थ से अपने यथार्थ को जोड़े। जीवन बनाना नहीं समझना है।

देवी प्रसाद मिश्र जी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि ‘साहित्य में हम अपनी वैधता ढूँढते हैं, सामाजिक सांस्कृतिक वैधता… इसके  बिना फिर हम अपने जीवन में कुछ भी नहीं है। इस अर्थ में देखो तो यह किताब एक स्ट्रैटेजिक संरचना सी लगती है। एक इकनॉमिक काम लगता है एक सुचेतिक काम लगता है। इसमें बहुत कुछ अनकॉन्शियस है बहुत कुछ अवचेतन से भरा हुआ है जो कि जाहिर है की अवचेतन और स्मृतियों के बीच एक गहरा संबंध देखा गया है।

लेकिन यहां जैसे की ये अपने को विखंडित कर रहा हो। एक तरह से रिवर्सल ऑफ पावर स्ट्रक्चर हो रहा हो कि दरअसल हमारे मुख्य भूमि मानो भूमि क्या है…और मूलतः ये एक जो बुनियादी मार्मिकता है उसके पावर स्ट्रक्चर की जो लेयर है उसको मिटा नहीं सकती और इस तरह से दारिद्रय की ओर जाना अपने को मुक्त करना है इस पूरे पैराफरनेलिया से… हो सकता है इतने स्थूल तरीके से इस किताब में ना सोचा गया हो लेकिन लगता है शक्ति संरक्षण को लेकर शायद पश्चात है कोई जो इसे अतीत की ओर ले जाता है यह जाहिर करने के लिए की दरअसल मैं ये हूं… एक अमिटता है इसमें… तो यह अपने को इस तरह से उल्लेख करना मात्र अपनी जड़ों की ओर जाने का नॉस्टैल्जिया नहीं है बल्कि यह एक आयत बोध है, इस बात को उपलब्ध करने के लिए कि भारत एक इस तरह की विपन्नता, पारस्परिकता, परिवारिकता, कौटुंबिता और इस तरह की आपबीती से बना हुआ है और जो आपबीती है वह परबीती भी है। इस अर्थ में देखें तो यह किताब भारत को, अपने को, अपने परिवेश, समाज को पुनराविशित करने की किताब है। जो की बेहद पठनीय है, उदार है, समावेशी है सूक्तियों से भरी एक कवि की किताब है।

यह पूरी सामाजिक आर्थिक गहरे इतिहास बोध से भरी किताब है। इस तरह से इसमें एक सामाजिक राजनैतिक संगम हमें दिखाई देता है। इसमें निर्मलता और अकलुषता का दस्तावेज है। उम्र की मासूमियत है। बहुत सारे दुराव, निंदा, पतन के बावजूद एक इंसान इन सभी चीजों को बटोर देख रहा है ऐसा प्रतीत होता है इस किताब में… मेरे लिए यह बहुत महत्वपूर्ण किताब है।’

MIFF 2024, Toonz Media Group और Billion Readers (BIRD) ने बधिर, श्रवण बाधित और दृष्टिबाधित दर्शकों के लिए मीडिया सुलभता को बढ़ावा देने हेतु अभिनव प्रयोगों और तकनीकों का प्रदर्शन किया

समान भाषा उपशीर्षक, भारतीय सांकेतिक भाषा और ऑडियो विवरण से सज्जित एनिमेटेड शॉर्ट्स समझने और याद रखने में सुलभ हुए ताकि बच्चों की पढ़ने की क्षमता सुधर सके।

मुंबई, प्रेस विज्ञप्ति 21 जून: मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) 2024, बधिर और श्रवण बाधित (DHH) और दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए सुलभ ऑडियो-विजुअल मीडिया का प्रदर्शन कर रहा है। कई एनिमेटेड शॉर्ट्स को समान भाषा उपशीर्षक (SLS), भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) और ऑडियो विवरण (AD) जैसी सुलभता सुविधाओं के साथ दिखाया जा रहा है।

हालांकि, यह सोचना गलत होगा कि सुलभता केवल श्रवण और दृष्टिबाधित व्यक्तियों तक सीमित है। IIT-Delhi, त्रिवेंद्रम में स्थित भारत की प्रमुख एनिमेशन कंपनियों में से एक, Toonz Media, और PlanetRead की बिलियन रीडर्स (BIRD) के संयुक्त तत्वाधान में की गई पहल के पीछे तर्क दिया जाता है कि SLS का उपयोग बच्चों द्वारा देखे जाने वाली कार्टून श्रृंखलाओं पर करने से, बड़े पैमाने पर उनके पढ़ने के कौशल में सुधार हो सकता है।

BIRD का नेतृत्व कर रहे, IIT-Delhi के स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के ऐडजंक्ट प्रोफेसर बृज कोठारी के अनुसार, “बच्चों के दिमाग समान भाषा के शब्दों और ध्वनियों का मिलान करने में अत्यधिक निपुण होते हैं। कार्टून श्रृंखला के दृश्यों के साथ चल रहा SLS उन्हें पढ़ने का अभ्यास साथ ही साथ करवा देगा। इस वजह से उनकी पढ़ने की क्षमता और भाषा ज्ञान में उल्लेखनीय सुधार हो सकते हैं। इस तथ्य की पुष्टि के लिए कई प्रमाण उपलब्ध हैं।”

MIFF में Pogo टीवी पर प्रसारित, ELE एनिमेशन्स और Toonz द्वारा रचित एनीमेशन शो “जय जगन्नाथ” को SLS और AD के साथ सज्जित करके, सभी दर्शकों के लिए मीडिया सुलभता, साक्षरता और भारतीय भाषाओं के प्रचार के उद्देश्य के साथ प्रदर्शित किया जा रहा है।

Toonz के सीईओ, पी. जयकुमार ने कहा, “यह सिर्फ अनुपालन का विषय नहीं है। SLS तकनीक हमारी विशाल एनिमेशन लाइब्रेरी का उपयोग सभी भारतीय भाषाओं में बच्चों के संपूर्ण मनोरंजन और शिक्षा के लिए कर सकती है।”

भारत के प्राइमरी स्कूलों में पढ़ रहे 200 मिलियन बच्चे, जो अपनी भाषाओं में कार्टून फिल्म को बड़े चाव से देखते हैं, अब उनका भाषा ज्ञान और पढ़ने की क्षमता स्वतः ही सुधर जाएगी। बड़ी बात यह है कि उन्हें पता ही नहीं चलेगा कि यह कब हो गया।

Toonz Media Group के बारे में

दो दशकों का बेजोड़ अनुभव और प्रतिवर्ष 10,000 मिनट से अधिक 2D और CGI माध्यमों में बच्चों और परिवार के लिए मनोरंजन सामग्री बना रहा Toonz निस्संदेह दुनिया के सबसे सक्रिय एनीमेशन स्टूडियोज में से एक है। Toonz के पास वूल्वरिन, एक्स-मेन, मार्वल की स्पीड रेसर: द नेक्स्ट जेनरेशन लायंस गेट, मोस्टली घोस्टली और यूनिवर्सल की गमी बियर और फ्रेंड्स जैसी कई एनिमेशन श्रृंखलाएं, लाइव-एक्शन श्रृंखलाएं और फीचर फिल्में भी हैं जो इसे 360 डिग्री मीडिया पावरहाउस बनाती हैं। हाल ही में Toonz ने AR, VR, और गेमिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों की दुनिया में भी कदम रखा है।

www.toonz.co

बिलियन रीडर्स (BIRD) के बारे में

PlanetRead और IIT-Delhi के संयुक्त तत्वाधान में शुरू बिलियन रीडर्स (BIRD) पहल का लक्ष्य है भारत में एक अरब लोगों को जीवनभर पढ़ने का अभ्यास करने के लिए दैनिक स्तर पर सामग्री उपलब्ध करवाना। “हर भारतीय, एक धाराप्रवाह पाठक” का लक्ष्य पूरा करने के लिए मुख्यधारा में प्रचलित मनोरंजन सामग्री पर समान भाषा उपशीर्षक (SLS) जोड़कर टेलीविजन, फिल्म और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है। SLS का मतलब है कि ऑडियो-विजुअल (AV) सामग्री में ‘समान’ भाषा में उपशीर्षक देना जैसा कि ऑडियो में होता है। SLS के साथ, दर्शक जो वे स्क्रीन पर देखते और सुनते हैं, उसे पढ़ सकते हैं। BIRD एक तंत्र परिवर्तन प्रक्रिया है जिसे Co-Impact का भी पूरा समर्थन प्राप्त है। इसका उद्देश्य है, साक्षरता, भाषा अध्धयन और मीडिया सुलभता के लिए भारत की सभी भाषाओं में बने वीडियो के साथ SLS का समावेश।
www.billionreaders.org

संपर्क: श्री पार्थिबान अमुधन
parthibhan@planetread.org

અલગ અલગ દેશોમાંથી રોજનું ૧ કરોડ મીટર કાપડ ઈમ્પોર્ટ થાય છે-રોક લગાડવાની માંગ

SGCCI વતિ પૂર્વ પ્રમુખ શ્રી આશીષ ગુજરાતીએ ટેક્ષ્ટાઇલ ઇન્ડસ્ટ્રીના વિકાસ માટે તેમજ તેમાં રોજગારીનું પ્રમાણ વધારવા માટે વિવિધ સૂચનો રજૂ કર્યા

સુરત. ભારતની ટેક્ષ્ટાઇલ ઈન્ડસ્ટ્રી હાલ ૪.પ કરોડ લોકોને રોજગારી પુરી પાડે છે. કૃષિ પછી સૌથી વધારે રોજગારી ટેક્ષ્ટાઇલ ઈન્ડસ્ટ્રી આપે છે. ટેક્ષ્ટાઇલ ઈન્ડસ્ટ્રીમાં રોજગારીનું પ્રમાણ કેવી રીતે વધારી શકાય તે એજન્ડા પર ભારતના માનનીય કેન્દ્રિય ટેક્ષ્ટાઇલ મંત્રી શ્રી ગિરીરાજ સિંઘ દ્વારા ગુરૂવાર, તા. ર૦ જૂન, ર૦ર૪ના રોજ નવી દિલ્હી ખાતે દેશના ટેક્ષ્ટાઇલ સંગઠનો સાથે મિટિંગનું આયોજન કરવામાં આવ્યું હતુ. જેમાં ધી સધર્ન ગુજરાત ચેમ્બર ઓફ કોમર્સ એન્ડ ઇન્ડસ્ટ્રી વતી પૂર્વ પ્રમુખ શ્રી આશિષ ગુજરાતીએ ભાગ લીધો હતો. તેમણે ટેક્ષ્ટાઇલ ઈન્ડસ્ટ્રીના વિકાસ માટે તેમજ તેમાં રોજગારીનું પ્રમાણ વધારવા માટે નીચે મુજબની રજૂઆત કરી હતી.

– ટફ યોજનામાં ૧ર૯૩૭ એકમોએ લાભ લીધો છે. જેમાં ૧૦૪૪ર યુનિટો એવા છે જેમનું રોકાણ રૂપિયા પ કરોડ કરતાં પણ ઓછું છે. જ્યારે તેમાંથી પણ ૯૦ ટકા એકમો એવા છે કે તેમનું રોકાણ રૂપિયા ૧ કરોડ કરતાં પણ ઓછું છે. એનો અર્થ એ થાય કે, ટફ યોજનાનો લાભ નાના અને એમએસએમઈ ઉદ્યોગકારો દ્વારા જ લેવામાં આવ્યો છે.

– પીએલઆઈ સ્કીમનો લાભ રૂપિયા ૧૦૦ કરોડનું રોકાણ કરનાર ઉદ્યોગકાર જ લઈ શકે તેમ છે. જો કે, પ્રાપ્ત થયેલી માહિતી પ્રમાણે સરકાર દ્વારા આ યોજનામાં ફેરફાર કરીને રૂપિયા ૧પ કરોડનું રોકાણ કરનાર ઉદ્યોગકાર પણ આ યોજનાનો લાભ લઈ શકશે તેવું આયોજન કરવામાં આવી રહયું છે, પરંતુ ટફના ડેટા પ્રમાણે એમએસએમઈના નાના યુનિટોનું રોકાણ રૂપિયા પ કરોડ સુધીનું છે, એટલા માટે નાના ઉદ્યોગકારોના અપગ્રેડેશન અને વિકાસ માટે કેપિટલ સબસિડી જેવી સ્કિમ લાવવી જરૂરી છે તો જ નાના યુનિટો કવર થઈ શકશે અને અપગ્રેડ પણ થઈ શકશે.

– વર્ષ ર૦૧૪થી ર૦ર૪ સુધીમાં ટફની સ્કિમમાં ૧૧ હજાર કરોડ રૂપિયાની સબસિડી આપવામાં આવી છે, તેમાં ૯ હજાર એકમોને લાભ મળ્યો છે. જ્યારે બીજી તરફ માત્ર પીએલઆઈ સ્કિમના બજેટ પ્રમાણે ૬પ યુનિટો જ આ યોજનાનો લાભ લઈ શકશે. એટલા માટે નાના યુનિટોને પણ ફાયદો થાય તેવું આયોજન સરકાર દ્વારા કરવું જોઈએ અને તેના માટે પીએલઆઈ અને કેપીટલ સબસિડી સ્કિમ પણ રાખવી જરૂરી છે, જેથી ટેક્ષ્ટાઇલ ઈન્ડસ્ટ્રીમાં રોજગારીનું પ્રમાણ વધી શકે.

– આ ઉપરાંત રો–મટીરીયલ આંતરાષ્ટ્રીય કોમ્પિટીશનના ભાવ પ્રમાણે મળવું જોઈએ અને ગ્લોબલ ક્‌વોલિટી પ્રમાણે હોવું જોઈએ.

– યાર્નનું રો–મટીરીયલ પીટીએની શોર્ટેઝને કારણે વિવિંગ યુનિટોને અઠવાડિયામાં બે બે દિવસ બંધ રાખવા પડે તેવી સ્થિતિનું નિર્માણ થયું છે.

– સ્પેશિયાલિટી યાર્ન જે ભારતમાં બનતા નથી તેના માટે સ્પેશિયલ પીએલઆઈ સ્કિમ લાવવી જોઈએ.

– ટફ સ્કિમ ન લાવવી હોય તો એમએસએમઈ માટે વિવિંગ અને નિટિંગ સેકટર માટે સ્પેશિયલ સ્કિમ લાવવી જોઈએ.

– હાલ વિશ્વના અલગ અલગ દેશોમાંથી રોજનું ૧ કરોડ મીટર કાપડ ઈમ્પોર્ટ થાય છે, ભારતની ફેબ્રિકસ અને ગારમેન્ટ ઈન્ડસ્ટ્રીને સપોર્ટ કરવા માટે આયાત થતા કપડાં પર પ્રતિબંધ મૂકવો જોઈએ.

– વોટર જેટ વિવિંગ મશીનો માટે CETP (કોમન ઈન્ફલ્યુએન્ટ પ્લાન્ટ) અને ZLD (ઝીરો લિકિવડ ડિસ્ચાર્જ) માટે સ્પેશિયલ સબસિડી આપવી જોઈએ.

– અત્યારે ટેક્ષ્ટાઇલ ઈન્ડસ્ટ્રીનું ટાર્ગેટ નક્કી કરવામાં આવ્યું છે, તેમાં ટેક્ષ્ટાઇલ ઇન્ડસ્ટ્રીનો એક્ષ્પોર્ટનો ટાર્ગેટ વર્ષ ર૦૩૦ સુધીનો નક્કી કરવામાં આવ્યો છે, જેમાં ભારતનો શેર સિંગલ ડીજીટમાં છે, પરંતુ તેની ક્ષમતા ૧પથી ર૦ હોઇ શકે છે, આ શેર વર્ષ ર૦૪૭ સુધીમાં રપથી ૩૦ ટકા સુધી વધારી શકાય તેમ છે.

– ટેક્ષ્ટાઇલમાં આવનારા પ વર્ષમાં જીએસટીની ઈન્કમ રૂપિયા ૩ લાખ કરોડ સુધી પહોંચશે તેની સામે આ સ્કિમ અંતર્ગત રૂપિયા ૩૦ હજાર કરોડની ફાળવણી કરવી જરૂરી છે.

सूरत एयरपोर्ट पर 1.23 लाख डॉलर के साथ तीन धरे गए


सूरत
सूरत कस्टम डिपार्टमेंट की एयरपोर्ट इंटेलिजेंस यूनिट के अधिकारियों ने सीआईएसएफ की मदद से गुरुवार की रात एयरपोर्ट पर सूरत से दुबई जा रहे तीन पैसेंजरों की जांच कर उनके पास से बड़े पैमाने पर डॉलर ज़ब्त किए और आगे की कार्रवाई शुरू की है।


एयरपोर्ट के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सूरत एयरपोर्ट पर शारजाह और दुबई जाने के लिए विमान सेवा उपलब्ध है।गुरुवार की रात को सूरत से दुबई की फ्लाइट जाने वाली थी।तब तीन यात्री फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट के भीतर घुस रहे थे उस दौरान कस्टम विभाग के अधिकारियों को उनकी हलचल पर शक हुआ।इसके आधार पर अधिकारियों ने उनसे पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान तीनों नेकोई भी गैर कानूनी वस्तु पास मे होने से इनकार कर दिया लेकिन अधिकारियों को पूरा विश्वास था की तीनों कुछ छुपा रहे हैं जिसके आधार पर अधिकारियों ने उन्हें एक तरफ़ रोक जांच पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान तीनों के पास से 123000 डॉलर मिले जो की इंडियन करेंसी में एक करोड़ 48 लाख रुपए होते हैं।

नियम के अनुसार यदि किसी के पास 50000 से 100000 डॉलर मिले तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है लेकिन इन तीनों के पास कुल मिलाकर 123000 डॉलर था।जिसमे की एक शख्स के पास 50000 डॉलर था और बाकी के दो के पास अन्य रकम थी। कस्टम विभाग ने इनसे बॉन्ड की रकम जमा करवा ली और आगे की कार्रवाई शुरू की है।उल्लेखनीय है कि सूरत एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग के सतर्कता के कारण पहली बार एक लाख से अधिक रक़म डॉलर के तौर पर पकड़ी गई है।

कृष्ण के परामर्श ‘तुम योगी बनो’ का अनुकरण

अंतर्राष्ट्रिय योग दिवस के उपलक्ष्य में

“योगी को, शरीर पर नियंत्रण करने वाले तपस्वियों, ज्ञान पर चलने वालों तथा कर्म के पथ पर चलने वालों से भी श्रेष्ठ माना गया है; इसलिए हे अर्जुन, तुम योगी बनो!” भगवद्गीता के चतुर्थ अध्याय में अर्जुन को कहे भगवान् कृष्ण के ये शब्द हम सभी को यह परामर्श देते हैं कि अनिश्चताओं और विलासिता से भरे जीवन के महाभारत में अर्जुन की भाँति संघर्षरत रहते हुए, योगी का जीवन जीना सुख का मूल है।  

योग विज्ञान जो भारतवर्ष की धरोहर है, सम्पूर्ण संसार के लिए एक उपहार है; इसी कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसकी महत्ता को समझते हुए 2015 में, भारत सरकार के अनुरोध पर, 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में संघोषित करके सम्पूर्ण मानवजाति के कल्याण की पुष्टि की। पश्चिम में ‘योग के जनक’ कहे जाने वाले परमहंस योगानन्द जिन्होंने अपने जीवन के महत्त्वपूर्ण 30 वर्ष से भी अधिक समय पश्चिम में बिताया तथा भारत में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इण्डिया और अमेरिका में सेल्फ़ रियलाईज़ेशन फ़ेलोशिप की स्थापना करके ध्यान का क्रियायोग विज्ञान, जो योग की एक उन्नत और विशिष्ट शैली है, की शिक्षाओं का प्रचार प्रसार करके मानवजाति को एक सेतु प्रदान किया। 

योगानन्दजी, अपनी पुस्तक ‘योगी कथामृत’, जिसे मन और आत्मा के द्वार खोल देने वाली पुस्तक आँका जाता है, के 26वें अध्याय में क्रियायोग का अर्थ बताते हैं – “‘एक विशिष्ट कर्म या विधि (क्रिया) द्वारा अनंत परमतत्त्व के साथ मिलन (योग)।’ इस विधि का निष्ठापूर्वक अभ्यास करने वाला योगी धीरे-धीरे, कर्म-बंधन से या कार्य-कारण संतुलन की नियमबद्ध शृंखला से मुक्त हो जाता है।”
 
भगवान कृष्ण भगवद्गीता में इसका उल्लेख करते हुए कहते हैं, ”अपान वायु में प्राणवायु के हवन द्वारा और प्राणवायु में अपान वायु के हवन द्वारा योगी प्राण और अपान, दोनों की गति को रुद्ध कर देता है और इस प्रकार वह प्राण को हृदय से मुक्त कर लेता है और प्राणशक्ति पर नियंत्रण प्राप्त कर लेता है।” अर्थात् “योगी फेफड़ों और हृदय की कार्यशीलता को शांत कर प्राणशक्ति की उस अतिरिक्त आपूर्ति की सहायता से शरीर में होने वाले ह्रास को रोक देता है और अपान को नियंत्रण में कर शरीर में वृद्धत्त्व लाने वाले परिवर्तनों को भी रोक देता है।”

यह सब जान लेने के बाद इस महान् परिवर्तनकारी योग को सीखने की उत्कंठा का जगना स्वाभाविक है। इसका निदान भी विद्यमान है। पाठकगण योगदा सत्संग सोसाइटी की वेबसाइट पर जा सकते हैं, जो एक ऐसा द्वार है जहाँ से गृह अध्ययन की की पाठमाला प्राप्त कर, योग की इस वैज्ञानिक प्रविधि को सीखना अत्यंत सरल है। पाठमाला के लिए नामांकन करवाकर बुनियादी प्रविधियों का कुछ समय अभ्यास करके इस मानव देह को, जिसकी क्षमता 50 वाट के बल्ब जितनी है, क्रियायोग के अत्यधिक अभ्यास से उत्पन्न करोड़ों वाट की शक्ति को सहन करने योग्य बनाया जाता है।  

अंधकार युगों में लुप्त हो जाने के बाद फिर से इस सरल और निश्चित रूप से फल देने वाली क्रियायोग पद्धति को न केवल संसार का त्याग करने वाले संन्यासियों अपितु साधारण लोगों के लिए भी उपलब्ध करने वाले महामृत्युंजय बाबाजी और उनके शिष्य लाहिडी महाशय के प्रति मन कृतज्ञता से भर जाता है। 

इन महान् संतों की अनुकंपा को शिरोधार्य कर, आइए इस अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हम स्वयं के कल्याण हेतु क्रियायोगी बनें और अपने शरीर और मन को उस महाप्राणशक्ति, जो सम्पूर्ण सृष्टि की आधारशीला है, की अनन्त संभावनाओं को व्यक्त करने के योग्य बनाएँ। अधिक जानकारी : yssi.org 

लेखिका- डॉ. (श्रीमती) मंजु लता गुप्ता. डॉ. (श्रीमती) मंजु लता गुप्ता ने दिल्ली सरकारी स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम किया।

CEAT स्पेशलिटी ने कल्की 2898 ए.डी. के साथ मिलकर ए.आई. वाहन के लिए लांच किए भविष्य के टायर

बुज्जी मुंबई, 18 जून: CEAT स्पेशलिटी ने बहुप्रतीक्षित फिल्म कल्की 2898 ए.डी. के साथ एक दिलचस्प साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत प्रभास अभिनीत इस फिल्म में दिखाए जाने वाले रोबोटिक वाहन ‘बुज्जी’ के लिए अत्याधुनिक टायर विकसित एवं लांच किए जाएंगे। इस साझेदारी से CEAT की अत्याधुनिक तकनीक एक बार फिर उजागर हो रही है और इससे मोबिलिटी के भविष्य को आकार देने की कंपनी की प्रतिबद्धता पुख्ता होती है।

कल्की 2898 ए.डी. को नाग अश्विन ने निर्देशित किया है, इसमें भविष्य की दुनिया की कहानी दर्शाई गई है जहां तकनीक बेहद उन्नत है और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस दैनिक जीवन का हिस्सा है। इस फिल्म में काम कर रहे अभिनेताओं की सूची अत्यंत आकर्षक है जिसमें शामिल हैं- प्रभास, दीपिका पादुकोण, अमिताभ बच्चन और कमल हासन। इस फिल्म एक और खास किरदार है ‘बुज्जी’ यह ए.आई. से चलने वाली कार है। यह कार भविष्यवादी डिजाइन एवं नवोन्मेष का शिखर है, जिसके लिए टायर भी उतने ही उन्नत एवं दूरदर्शी चाहिए जैसी की कार है।

बुज्जी को हॉलीवुड के हाइसु वांग ने डिजाइन किया है जो इससे पहले ब्लैक पैंथर के लिए भी वाहन डिजाइन कर चुके हैं। बुज्जी नाम की यह कार ऑटोमोटिव डिजाइन व टेक्नोलॉजी के भविष्य में एक लम्बी छलांग है। फिल्मकार एक ऐसी कार चाहते थे जो वांग के डिजाइन को जीवंत बना दे और CEAT स्पेशलिटी ने इस चुनौती को पूरा किया, और ऐसे टायरों की रचना की जो इस अभूतपूर्व वाहन को पूर्णता प्रदान करते हैं। 

CEAT स्पेशलिटी के मुख्य कार्यकारी अमित तोलानी ने इस परिवर्तनकारी प्रोजेक्ट पर अपने विचार साझा करते हुए कहा, ’’बुज्जी के लिए कल्की 2898 ए.डी. के साथ जुड़ना हमारे लिए एक अतुलनीय अवसर था। इससे हमें अपनी सीमाओं को विस्तार देने और नई तकनीकों व सामग्री का जायज़ा लेने का मौका मिला। द्युतिमान चैटर्जी और उनकी आर एंड डी टीम ने अपनी रचनात्मकता एवं इंजीनियरिंग कौशल से इस विज़न को जीवंत कर दिया। इस प्रोजेक्ट ने टायर इनोवेशन में हमारे भविष्य का मंच का स्थापित कर दिया है। हमारी टीम और हमारे टायर सही मायनों में जिज्ञासुओं के लिए तैयार किए गए हैं, वे हमें अनदेखे-अनजाने क्षेत्रों में ले जाते हैं और भविष्य की कल्पना करने की क्षमता प्रदान करते हैं।’’

CEAT स्पेशलिटी में आर एंड डी के प्रमुख द्युतिमान चैटर्जी ने कहा, ’’बुज्जी के लिए टायर की रचना करना प्रेरक भी था और यह बेहद अपेक्षाओं भरा काम भी था। इस अवसर से हमें एक विशिष्ट प्लैटफॉर्म मिला जहां हम नई तकनीकें व सामग्रियों को परख सकें और टायर डिजाइन के क्षेत्र में अब तक जो कुछ मुमकिन था उससे आगे जाने की कोशिश करें। CEAT स्पेशलिटी को अपने वर्ग में सर्वश्रेष्ठ ओटीआर टायर विकसित करने में अपने इंजीनियरिंग कौशल के लिए जाना जाता है और इस प्रोजेक्ट ने हमें चुनौती दी की हम अपने मापदंडों को कुछ और ऊपर उठाएं। इसने हमें न केवल बेहतरी की ओर प्रेरित किया बल्कि टायर टेक्नोलॉजी के भविष्य के बारे में मूल्यवान दृष्टिकोण भी दिया।’’

बुज्जी टायर का विकास पर्दे के पीछे की एक कमाल कहानी रही जिसमें गहन रचनात्मकता एवं सूक्ष्म इंजीनियरिंग शामिल थी। इस प्रक्रिया का आरंभ गहरे विचार-विमर्श की बैठकों के साथ हुआ जिनमें डिजाइनरों, इंजीनियरों और मैटेरियल वैज्ञानिकों ने मिलजुल कर संभावित डिजाइनों की संकल्पना तैयार की। बुज्जी के फ्यूचरिस्टिक लुक और क्षमताओं से प्रेरित होकर इस टीम ने मैटेरियल, टेक्नोलॉजी और ऐस्थेटिक के बारे में लम्बी चर्चाएं की। इन बैठकों में कई विज़नरी स्केच, डिजिटल मॉडल और पैटर्न प्रोटोटाईप निकल कर आए जिन्होंने टीम के विचारों को जीवन प्रदान किया।

इन टायरों की एक खासियत जो इन्हें सबसे अलग करती है वह है इनका अनूठा ब्लॉक डिजाइन। ए.आई. अल्गोरिद्म और फ्यूचरिस्टिक पैटर्न से प्रेरणा लेते हुए इस डिजाइन में जटिल खांचे व चैनल शामिल किए गए हैं जो इनकी परफॉरमेंस और विज़ुअल अपील में इज़ाफा करते हैं। ब्लॉक डिजाइन का सर्कुलर सपोर्ट बेस खास तौर पर सुपीरियर ट्रैक्शन व स्थिरता के लिए तैयार किया गया है ताकि वह बुज्जी की उन्नत क्षमताओं एवं शानदार स्पोर्टी लुक को पूर्णता प्रदान कर सके। 

इंजीनियरिंग उत्कृष्टता इस प्रोजेक्ट के मूल में थी। इन टायरों की चौड़ाई अधिक है, आस्पेक्ट रेश्यो 30 है जिससे इनकी बेहतरीन परफॉरमेंस और टॉर्क सुनिश्चित हो पाते हैं। इसके अलावा, ये टायर 4 टन तक का भार वहन कर सकते हैं जिसकी वजह से बहुत ही टिकाऊ और बुज्जी के मजबूत ढांचे को सपोर्ट करने के काबिल बन गए हैं। चौड़ा डिजाइन, बड़े रिम, न सिर्फ बुज्जी की दिखावट में वृद्धि करते हैं बल्कि साइड स्वे को भी न्यूनतम कर देते हैं जिससे एक सहज और स्थिर राइड मुमकिन होती है। कड़े सिमुलेशन और वास्तविक परीक्षणों ने डिजाइन को मान्य किया तथा सुपीरियर कॉर्नरिंग, स्टीयरिंग व ब्रेकिंग परफॉरमेंस के लिए टायरों को ऑप्टीमाइज़ किया – बुज्जी जैसे हाई-परफॉरमेंस वाहन के लिए ये सब जरूरी विशेषताएं हैं।

कल्की 2898 ए.डी. के साथ CEAT के गठबंधन ने टायर टेक्नोलॉजी में एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है, यह उपलब्धि नवोन्मेष और उत्कृष्टता के लिए कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अपने बेहतरीन ऑफ-द-रोड टायरों के लिए प्रसिद्ध CEAT स्पेशलिटी इस काम के लिए फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद थी क्योंकि इस उद्योग में अपनी विशेषज्ञता और साबित ट्रैक रिकॉर्ड के बल पर ऐसे फ्यूचरिस्टिक टायर निर्माण हेतु CEAT स्पेशलिटी ही सर्वोत्कृष्ट विकल्प है।

बुज्जी प्रोजेक्ट के दौरान CEAT स्पेशलिटी ने जो सबक सीखे हैं और जो तकनीकें विकसित की हैं वे कंपनी के भावी उत्पादों को आकार देने में बेहद महत्व की सिद्ध होंगी। कंपनी की सोच एकदम स्पष्ट हैः ऐसे टायरों का निर्माण जो न केवल कार्यपरक व भरोसेमंद हों बल्कि स्मार्ट, सस्टेनेबल और भविष्य की मोबिलिटी के लिए तैयार हों।

नवप्रवर्तन और अग्रगामी दृष्टिकोण की विरासत के साथ CEAT ऑटोमोटिव उत्कृष्टता के अगले युग में नेतृत्व के लिए तैयार है। बुज्जी और कल्की 2898 ए.डी. के साथ इस सफर ने CEAT के पथ को रोशन किया है और इसलिए कंपनी का भविष्य और फ्यूचरिस्टिक टायरों का विज़न संभावनाओं से भरपूर है।