रफ डायमंड खरीदने को लेकर सूरत के हीरा उद्यमियों ने किया यह बड़ा फ़ैसला!

प्रतिकात्मक तस्वीर
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सूरत
कोरोना के कारण दुनियाभर में व्यापार उधोग बंद होने के कारण मंदी का माहौल है। अब धीरे-धीरे व्यापार उधोग खुल रहे हैं तब सभी उधमी अपने हिसाब से तालमेल बिठाने का प्रयास कर रहे हैं। कोरोना के कारण सर्जित परिस्थति में हीरा उधमियों ने जून में रफ हीरों की खरीद नहीं करने का फैसला किया है। 


हीरा उधमियों का कहना है कि कोरोना के कारण दो महीने से हीरा उधोग बंद है ऐेसे में कई हीरा उधमियों के पास पॉलिश्ड की स्टोक प़ड़ा है। कुछ के पास रफ हीरों की स्टॉक पड़ा है।

ऐसे में एक बार हीरा उधोग में सबके पास बैलेंस सही हो जाए और व्यापार सुचारू ढंग से व्यापार शुरू हो जाए तब नए रफ हीरों की खरीद होगी। इसलिए जून की रफ हीरों की खरीद पर रोक लगाई गई है। कई हीरा संगठनों ने मिलकर स्वैच्छिक तौर पर रफ हीरे नहीं लेने का फैसला किया है।


हीरा उधमी निलेश बोडकी ने बताया कि इससे लाभ और नुकसान दोनो की संभावना है। उन्होंने कहा कि रफ हीरों की खरीद रोकने से हीरों का ओवर प्रोडक्शन घटेगा। इससे पॉलिश्ड हीरों की कीमत बनी रहेगी। हीरे पर्याप्त मांत्रा में रहने से हीरा श्रमिकों का उचित काम मिलेगा और सोशल डिस्टेंस का पालन हो सकेगा। 


इसके अलावा इसका नुकसान बताते हुए उन्होंने कहा कि जहां बड़ी संख्या में लोग हीरा नहीं खरीद रहे। ऐसे में कुछ लोगो ने हीरे खरीद लिए तो वह अपने मनमानी दिनों से आने वाले दिनों में हीरों का उत्पादन कर बेंचेगे। जबकि छोटे हीरा उधमियों को रफ हीरे नहीं मिलने से उनके लिए खराब परिस्थिति खड़ हो सकती है।

सूरत डायमंड एसोसिएशन के प्रमुख दिनेश नावडिया ने बताया कि फ़िलहाल हीरा उद्यमियों के पास एक महीने चल सके इतना रफ हीरों का स्टॉक है यदि वह हीरा नहीं ख़रीदे तो रफ़ हीरों की क़ीमत नियंत्रण में रहेगी। साथ ही पॉलिश्ड हीरों की उचित क़ीमत मिलेगी।

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

बिजली कंपनी के ख़िलाफ़ मनमानी बिल भेजने का आरोप


सूरत में लॉकडाउन के कारण पहले से ही परेशान कपड़ा उद्यमियों ने बिजली कंपनी पर बहुत अजीबोगरीब आरोप लगाया है और शहर के कई क्षेत्रों के वीवर बिजली कंपनी के खिलाफ विरोध में उतर गए हैं।कपड़ा उद्यमियों का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान दो महीने तक उनके यूनिट नहीं चालू थे। ऐसे में सरकार को बिल की राशि माफ कर देनी चाहिए। जबकि बिजली कंपनी ऐसा नहीं कर रही है। बिजली कंपनी ने सिर्फ 1 महीने का एक फिक्स्ड बिल माफ किया है।

दूसरी और कुछ वीवर्स तो कहना है कि चालू दिनों की अपेक्षा उनका बिल बंद के दौरान ज्यादा आ रहा है ऐसा क्यों हो गया वह खुद नहीं जान रहे हैं। कई वीवर्स को बंद के दौरान एक लाख से चार लाख रूपए का बिल दिया है।
इस तरह के तमाम आरोपों के साथ वीवर्स ने कई क्षेत्रों में बैनर और बोर्ड लगाकर बिजली कंपनी के बिल का बहिष्कार किया है।


मिली जानकारी के अनुसार अंजनी इंडस्ट्रियल स्टेट के विजय मांगूकिया नाम के विवर्स ने बताया कि सरकार की ओर से हमें 3 महीने का बिजली बिल में फिक्स्ड चार्ज माफ करने को कहा गया था लेकिन हमें सिर्फ 1 महीने का ही फिक्सड चार्ज माफ किया गया है।
दूसरी ओर उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब लॉकडाउन में यूनिट बंद थे तब भी कई लोगों के बिल ज्यादा आ जाए ऐसे कई लोग उनके पास शिकायत करने आए हैं। इस सिलसिले में विरोध करने वाले वीवर्स की संख्या 1000 से अधिक है डायमंड नगर तथा आसपास के कई क्षेत्रों में बिजली कंपनी के विरोध में लग गए हैं।विजय मांगूकिया ने बताया कि बिजली कंपनियां हित में नहीं है।

इसलिए उन्होंने कलेक्टर को आवेदन देकर बिजली कंपनी से माफ करने और यूनिट में जो गड़बड़ी हुई है उसे सुधारने के लिए मांग की है। उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन के बाद व्यापार जैसे – तैसे शुरू हो रहा है। ऐसे में इस तरह की घटनाओं के कारण उद्यमियों का मनोबल टूटता है हालांकि अभी यह जांच का विषय है कि इसमें गड़बड़ी हुई भी या नहीं फिलहाल विवश ने अपना विरोध जारी रखा है।