
जसवंतनगर (इटावा) उत्तर प्रदेश ,फरवरी 20: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लंबे समय से उच्च शिक्षा की गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं का अभाव महसूस किया जाता रहा है। विशेषकर व्यावसायिक और प्रोफेशनल कोर्सों के लिए छात्रों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। ऐसे माहौल में इटावा जिले के जसवंतनगर क्षेत्र में उच्च शिक्षा को लेकर हो रही पहल चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें अनुज मोंटी यादव की भूमिका प्रमुख रूप से देखी जा रही है।
पिछले कुछ वर्षों में जिले में नर्सिंग, पैरामेडिकल, फार्मेसी और अन्य रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों की उपलब्धता बढ़ी है। इससे स्थानीय छात्रों को अपने ही जिले में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।
ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बच्चों को लखनऊ, कानपुर या दिल्ली जैसे शहरों में पढ़ाई के लिए भेजना आसान नहीं होता। ऐसे में इटावा में ही प्रोफेशनल कोर्सों की व्यवस्था होने से अभिभावकों को राहत मिली है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में उच्च शिक्षा के नए विकल्प खुलने से खासकर बेटियों की पढ़ाई को बढ़ावा मिला है। अब अधिक छात्राएं भी स्नातक के बाद प्रोफेशनल कोर्स की ओर कदम बढ़ा रही हैं।
जानकारों के अनुसार, केवल डिग्री तक सीमित रहने के बजाय अब कौशल आधारित शिक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पाठ्यक्रमों में प्रैक्टिकल प्रशिक्षण की व्यवस्था छात्रों के लिए उपयोगी साबित हो रही है।
कॉलेज परिसरों में बुनियादी ढांचे में सुधार, प्रयोगशालाओं की व्यवस्था और नियमित शैक्षणिक गतिविधियों ने शिक्षा के माहौल को बेहतर बनाने में योगदान दिया है।
अनुज मोंटी यादव समय-समय पर छात्रों और युवाओं के बीच उपस्थित रहते हैं। विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों और आयोजनों में उनकी भागीदारी से युवाओं में उत्साह देखा गया है। छात्र इसे प्रेरणा के रूप में देखते हैं और इसे अपने करियर निर्माण की दिशा में सकारात्मक कदम मानते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में वास्तविक विकास तभी संभव है जब जिला स्तर पर उच्च शिक्षा को मजबूत किया जाए। इटावा और जसवंतनगर क्षेत्र में हो रही गतिविधियां इसी दिशा में एक कदम मानी जा रही हैं।
स्थानीय स्तर पर बढ़ते उच्च शिक्षा संस्थान और व्यावसायिक पाठ्यक्रम आने वाले समय में जिले के युवाओं को नए अवसर प्रदान कर सकते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में हो रही यह पहल इटावा के बदलते शैक्षणिक परिदृश्य की ओर संकेत करती है।