हीरा उद्योग के लिए कड़ी चुनौती, बैंकों ने भी मुँह मोड़ा

Spread the love

सूरत
कोरोना के कारण हीरा उद्योग की डगर कांटो भरी नजर आ रही है। सूरत हीरा उद्योग मुख्य तौर पर विदेशों में निर्यात पर निर्भर करता है। दुनिया के सभी देशों से कोरोना के कारण लॉकडाउन का माहौल है।ज्यादातर बाजार बंद है। व्यापार उद्योग भी बंद है।ऐसे में उद्यमियों को नए ऑर्डर नहीं मिल रहे है। बीते दिनों जो आर्डर मिले वह भी कैंसिल हो चुके हैं।

हीरा उद्योग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सूरत में तैयार होने वाले पॉलिश्ड हीरे 40% तक अमरीका में निर्यात होते हैं। इसके बाद हांगकांग और चीन में मिलाकर 43 प्रतिशत हीरा जाते हैं। इन दिनों में अमेरिका की अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर नहीं चल रही। एक और जहां कोरोना ने परेशान कर रखा है वहीं दूसरी ओर चीन के कारण शीत युद्ध से वहां का माहौल बिगड़ा हुआ है। व्यापारियों में चिंता का माहौल है। लोगों ने भी ज्वैलरी ख़रीद पर ब्रेक लगा दी है।

कोरोना के कारण वहाँ के अर्थव्यवस्था लचर हो गई है। बीते दो सप्ताह से अमेरिका में अश्वेत नागरिक की मौत को लेकर वहां का माहौल बिगड़ा था। कई शहरों में कर्फ़्यू था। ऐसे में व्यापार कर पाना तो दूर की बात है। सूरत के हीरा उद्यमियों को जो आर्डर मिले थे वह भी रद्द होने लगे हैं । ऐसा कुछ हांगकांग में भी है। हांगकांग में वहां के नागरिक अपने नागरिकों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं कभी भी बंद हो जाता है इस कारण व्यापारी ज्यादा माल नहीं खरीदना पसंद कर रहे हैं।

हांगकांग में विदेशी टूरिस्ट पर फ़िलहाल प्रतिबंध होने से वहाँ लोग नहीं आ पा रहे। इसलिए ख़रीदी कम हो रही है।बीते तीन महीने से अमेरिका, हांगकांग, दुबई सभी देशों में से जो पेमेंट मिलना था उसका एक चौथाई हिस्सा या उससे भी कम पेमेंट मिला रहा है। क्योंकि व्यापार-उद्योग बंद हो जाने के कारण वहां की व्यापारी भी आ गए हैं। विलंब से पेमेंट कर रहे हैं। दूसरी ओर भारत में भी हीरा उद्यमियों के के लिए डगर कठिन होते जा रही है।

कुछ दिनों पहले ही एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने बताया कि भारत में बैंक बैंकों ने हीरा उद्योग को लोन देना कम कर दिया है। 2018 की अपेक्षा वर्ष 2020 में 18% कम लोन दिया है।

नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की घटना के बाद बैंक हीरा उद्यमियों को को लोन देने से कतरा रहे हैं।पेमेंट समय पर और नहीं मिलने के कारण हीरा उद्योग के लिए भारी समस्या खड़ी हो गई है। बड़े उद्यमी तो जैसे तैसे गुजरात चला लेंगे छोटे और मध्यम उद्यमियों के लिए दिक्कत हो जाएगी।


हीरा उद्यमी निलेश बोडकी ने बताया कि हीरा उद्योग में इन दिनों पचास प्रतिशत लिक्विडटी पर काम चल रहा है। पेमेन्ट लगभग 45 दिन विलंब से मिल रहा है। अमरीका से ऑर्डर नहीं मिल पा रहे। हांगकांग में भी विदेशी प्रवासियों के आने पर प्रतिबंध होने के कारण ख़रीद पर असर पड़ी है। इसके अलावा यदि भारत में कोरोना के मरीज बढ़े तो हीरा उद्योग के लिए समस्या बढ सकती है।