
सूरत। विश्व के प्रमुख हीरा प्रोसेसिंग केंद्र सूरत के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। “सूरत कट हीरा” को आधिकारिक रूप से भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया गया है, जिससे शहर की करीब 50 वर्षों पुरानी हीरा कटिंग और पॉलिशिंग की विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है। अहमदाबाद में आयोजित कार्यक्रम में सूरत डायमंड एसोसिएशन को यह प्रमाण पत्र सौंपा गया, जिसके साथ लगभग 18 महीने की आवेदन प्रक्रिया पूरी हुई।सूरत पहले से ही दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग के लिए जाना जाता है, और अब जीआई टैग मिलने से इसकी पहचान और मजबूत हो गई है।
“सूरत कट” टैग सूरत की कारीगरी को वैश्विक स्तर पर बेल्जियम जैसे प्रतिष्ठित कट्स के समकक्ष स्थापित करता है। यह मान्यता न केवल गुणवत्ता की गारंटी देती है, बल्कि यह सुनिश्चित भी करती है कि केवल सूरत क्षेत्र में कट और पॉलिश किए गए हीरे ही “सूरत कट हीरा” नाम से बेचे जा सकेंगे। सूरत के हीरा उद्योग को देश-विदेश में अलग पहचान मिलेगी। साथ ही सूरत में तैयार किए गए हीरों की विशिष्टता और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी, जिससे वैश्विक बाजार में उनकी मांग मजबूत होगी।इससे उद्योग को कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है। सबसे पहले, वैश्विक बाजार में सूरत के हीरों की ब्रांड वैल्यू और विश्वसनीयता बढ़ेगी, जिससे निर्यात को नया बल मिलेगा।
साथ ही, नकली या कम गुणवत्ता वाले उत्पादों पर कानूनी रोक लगेगी, जिससे स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों को सुरक्षा मिलेगी। सूरत में लाखों श्रमिक इस उद्योग से जुड़े हैं, ऐसे में यह मान्यता उनके कौशल को सम्मान देने के साथ-साथ रोजगार के अवसरों को भी मजबूत करेगी।सूरत डायमंड एसोसिएशन के प्रमुख जगदीश खूंट ने बताया कि जीआई टैग मिलने से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और उद्योग में आधुनिक तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। कुल मिलाकर, “सूरत कट हीरा” को मिली यह पहचान सूरत के हीरा उद्योग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।