सर्विस टैक्स की नोटिस मिलने से व्यापारी हो रहे परेशान, पुराने मामलों में रिकवरी का भार!

tax

सूरत शहर तथा दक्षिण गुजरात के कई व्यापारी इन दिनों सर्विस टैक्स के नोटिस के जाल में फँस गए हैं। जीएसटी लागू होने के बाद से सर्विस टैक्स के लंबित मामलों को नई का निस्तारण करने के लिए मार्च 2023 की समय सीमा तय की गई थी। जिसे लेकर डिपार्टमेंट लंबे समय से कार्रवाई कर रहा था और जिन करदाताओं के मामले सर्विस टैक्स में लंबित थे उन्हें नोटिस दी जा रही थी। जिन करदाताओं ने समय पर नोटिस का जवाब दे दिया वह तो बच गए लेकिन जिन्होने नोटिस का जवाब देना उचित नहीं समझा या किसी कारण से जवाब नहीं दिया। अब उनके ख़िलाफ़ डिपार्टमेंट ने डिमांड तय कर दी है। आगामी दिनों में इसकी वसूली के लिए कार्रवाई शुरू की जाएगी। डिमान्ड नोटिस मिलने के बाद व्यापारी परेशान हो गए है।हालाँकि इसके बीच में व्यापारी 60 दिनों के भीतर अपील में सुनवाई के लिए जा सकते हैं।


मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 मे जीएसटी का क़ानून देश में लागू हो गया। इसके बाद सर्विस टैक्स सहित कई क़ानून नाबूद कर दिए गए थे। सर्विस टैक्स का क़ानून नाबूद नियम होने के बाद जो भी पिछले मामले सर्विस टैक्स मैं किसी कारणवश लंबित रह गए थे। उन्हें जल्द से जल्द पूरा या पाँच साल में पूरा करने के लिए डिपार्टमेंट को सूचना दी गई थी। इस तरह सर्विस टैक्स के तमाम मामलों को निपटाने के लिए 31 मार्च की समय सीमा तय कर दी गई थी। जिसके चलते डिपार्टमेंट द्वारा वर्ष 2022 से हर तीन महीने के अंतराल में व्यापारियों को संबंधित डॉक्यूमेंट और जवाब देने के लिए नोटिस भेजा जा रहा था। कई व्यापारियों ने डिपार्टमेंट के आग्रह के अनुसार वी पेश कर दिए अपने जवाब भी दे दिए थे। जिन मामलों में डिपार्टमेंट को व्यापारी के संतोष कारक जवाब लगे वह मामले सुलझा दिए गए लेकिन जिनमें शंकास्पद मामला लगा ऐसे कई मामले अभी भी पेंडिंग है।जिन करदाताओं ने कोई जवाब नहीं लिखाया या डॉक्यूमेंट भी नहीं दिए ऐसे हज़ारों मामलों मे डिपार्टमेंट ने नोटिस निकाल दिया है।

— 60 दिन में व्यापारी कर सकते हैं अपील
जिनमें मामलों में व्यापारियों को लगता है कि डिपार्टमेंट की ओर से एक तरफ़ा कार्रवाई की गई है या उन्हें डिपार्टमेंट की कार्रवाई से असंतोष है।ऐसे मामलों में व्यापारी डिमांड की रक़म का साढ़े सात प्रतिशत हिस्सा जमा करके अपील में मामला ले जा सकते हैं।हालाँकि उन्हें 60 दिन के भीतर ही अपील करनी होगी।

डीटीसी की साइट मे रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रहने से हीरा उद्योग को मिली राहत!


सूरत
दुनिया मे रफ़ हीरों का व्यापार करने वाले सबसे बड़ी डायमंड ट्रेडिंग कंपनी ने अप्रैल महीने मे रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रखने से हीरा उद्यमियों में राहत की साँस ली है। बीते कई दिनों से हीरा उद्योग में डिमांड की कमी के कारण रफ हीरो की क़ीमत और तैयार हीरो की क़ीमत में अंतर बढ़ता जा रहा था। ऐसे में डीटीसी कंपनी यदि रफ हीरो की क़ीमत बढ़ा ती या घटाती तो बाज़ार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका थी। इसे देखते हुए डीटीसी कंपनी ने व्यापार हित मे यह फ़ैसला किया है।

हीरा उद्योग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 1 साल से अधिक लंबे समय से हीरा उद्योग में परिस्थिति अच्छी नहीं है।अमेरिका तथा यूरोप जैसे देशों में लोगों की ओर से ख़रीद घटने के कारण कट और पॉलिश्ड हीरो का निर्यात घटते जा रहा है। हीरा उद्योग को इस परिस्थिति से उभारने के लिए हीरा उद्यमी लगातार प्रयास कर रहे हैं।बीते दिनों में कट और पॉलिश्ड हीरो की डिमांड बिलकुल घट जाने के कारण क़ीमत में भी गिरावट आ गई थी। इससे हीरा उद्यमियों को नुक़सान उठाना पड़ा था। कई हीरा उद्यमियों ने ज़्यादा क़ीमत मे रफ हीरे ख़रीदे थे। उन्हें कम क़ीमत मे तैयार हीरे बेचने पड़े। हीरा उद्योग में उतार-चढाव के बीच रफ हीरो की क़ीमत भी बड़े मायने रखती है।हीरा उद्यमियों की परिस्थिति को समझते हुए रफ डायमंड कंपनियो ने भी रफ हीरो की क़ीमत में कोई ज़्यादा उतार चढ़ाव नहीं कर रही है। अप्रैल महीने मे डीटीसी कंपनी ने जारी की साइट में रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रखी है। इससे पहले मार्च महीने में भी रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रखी थी।
जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन विजय मंगुकिया ने बताया कि डीटीसी की साइट में कच्चे हीरो की क़ीमत में बढ़ोतरी या कमी नहीं आयी है। जो कि हीरा उद्यमियों के लिए अच्छी बात है। यदि रफ़ हीरो की क़ीमत घट जाती तो लोग तैयार हीरा भी कम क़ीमत पर माँगने लगते हैं और वह रफ हीरे की क़ीमत बढ़ी तो हीरा उद्यमियों को ऊँची क़ीमत बार रफ़ हीरे ख़रीदना पड़ता है। दूसरी ओर बाज़ार में पॉलिश्ड हीरो की क़ीमत नहीं बढ़ी है।ऐसे में महँगे रफ़ हीरे ख़रीदने से हीरा उद्यमियों को नुक़सान हो सकता है। रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रहने से हीरा उद्योग के लिए परिस्थिति संतुलित रहेगी।

शहर मे पीपीपी मॉडल से बनाए जाएँगे और 50 चार्जिंग स्टेशन

सूरत
सूरत महानगर पालिका में ने शहर भर में इलेक्ट्रिक फ़ोर व्हीलर को चार्ज करने के लिए 50 इलेक्ट्रिक चार्ज स्टेशन बनाए हैं लेकिन इनका उपयोग बहुत कम होने के कारण अब मनपा ने आगामी दोनों में पीपीपी मॉडल पर चार्जर स्टेशन बनाने का फैसला किया है।इस चार्जिंग स्टेशन में फोर व्हीलर ही नहीं बल्कि टू व्हीलर और थ्री व्हीलर के लिए भी व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल सभी जोन में पर्याप्त जगह के लिए तलाश जारी है।जगह की व्यवस्था होने के बाद आगे का काम शुरू किया जाएगा।
सूरत महानगर पालिका के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर में 30000 इलेक्ट्रिक मोपेड दौड़ रहे हैं।इसके अलावा इलेक्ट्रिक कर की खरीदी भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देन के लिए 3 साल पहले सूरत महानगर पालिका ने शहर में 50 स्थान पर इलेक्ट्रिक चार्ज स्टेशन बनाए थे, लेकिन कई करणों से इनका उपयोग बहुत कम हो रहा है। इस साल सिर्फ 9000 लोगों ने चार्जर स्टेशन का उपयोग किया। पालिका फिलहाल ग्राहकों से 16 रुपए 52 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से चार्जिंग की सुविधा दे रही है लेकिन इसके बावजूद लोगों में चार्जिंग स्टेशन को लेकर नीरस है।

—कई कारणों से लोग नहीं आते चार्जर स्टेशन
कई चार्जिंग स्टेशन ऐसे स्थान पर बनाए गए हैं जहां ट्राफिक की समस्या के साथ आने जाने के लिए भी व्यवस्था ठीक से नहीं है। डेढ़ साल में 9000 लोगों ने 26015 बार गाड़ी चार्ज कराई है। जिसके माध्यम से मनपा को 34 लाख की आय हुई है। वेसू के चार्जिंग स्टेशन में बड़ी संख्या में लोग आते हैं जबकि दिल्ली गेट स्थित चार्जिंग स्टेशन को अच्छा रिस्पांस नहीं मिला है।इस स्थिति को समझते हुए पालिका ने आप पीपीपी मॉडल पर शहर में अन्य 50 चार्जिंग स्टेशन बनाने का फैसला किया है जिस्म की टू व्हीलर और थ्री व्हीलर भी चार्ज किया जा सकेंगे।एक ही सॉकेट से सभी कंपनियों के बाइक रिचार्ज किया जा सके इसकी भी व्यवस्था बनाने की कोशिश की जा रही है।फिलहाल इसके लिए शहर के सभी जोन में पर्याप्त जगह के लिए तलाश जारी है आगे की कार्यवाही जमीन मिलने के बाद की जाएगी।

કાપડ માર્કેટના ટેમ્પો ચાલક કામદારોના પ્રશ્નોના નિરાકરણ માટે બેઠક યોજાઈ

રવિવારે રીંગરોડ કમેલા દરવાજા ખાતે સુરત શહેર ટેમ્પો ઓનર ડ્રાઈવર વેલ્ફેર એસોસિએશન, સુરત જિલ્લા ટેક્સટાઈલ માર્કેટિંગ ટ્રાન્સપોર્ટ લેબર યુનિયન અને મીલ ટેમ્પો ડિલિવરી કોન્ટ્રાક્ટર એસોસિએશન સુરતના સંયુક્ત નેજા હેઠળ એક બેઠકનું આયોજન કરવામાં આવ્યું હતું. બેઠકમાં માર્કેટમાં પાર્કિંગની સમસ્યા સહિત અન્ય સમસ્યાઓ અંગે વિસ્તૃત ચર્ચા કરવામાં આવી હતી. મિટિંગમાં હાજર ટેમ્પો એસોસિએશનના પ્રમુખ શ્રવણસિંહ ઠાકુરે જણાવ્યું હતું કે, માર્કેટમાં ગ્રે કપડાની ડિલિવરી કરતા કામદારોએ ગ્રે કાપડના સેમ્પલ બતાવા માટે પહેલા દુકાનમાં જવું પડે છે અને બાદમાં પાર્કિંગમાં પાર્ક રહેતા મીલના વાહનોને તથા વેપારીના ગોડાઉનમાં ડિલિવરી આપવાની હોય છે. આવી સ્થિતિમાં ટેમ્પો ચાલકને ગ્રેની ડિલિવરી માટે ડબલ ધક્કો ખાવો પડી રહ્યો છે. યુનિયનના પ્રમુખ ઉમાશંકર મિશ્રાએ જણાવ્યું હતું કે માર્કેટમાં પ્રથમ એક કલાક મફત પાર્કિંગ આપવાના સુપ્રીમ કોર્ટના આદેશનું ખુલ્લેઆમ ઉલ્લંઘન થઈ રહ્યો છે અને માર્કેટ મેનેજમેન્ટ દ્વારા ટેમ્પો ચાલકો પાસેથી મનસ્વી રીતે પાર્કિંગ ફી વસૂલ કરવામાં આવી રહી છે. મીલ ટેમ્પો ડિલિવર કોન્ટ્રાક્ટર એસોસિએશનના પ્રમુખ રાજેન્દ્ર ઉપાધ્યાયે જણાવ્યું હતું કે માર્કેટ વિસ્તારમાં આવેલ મ્યુનિસિપલ કોર્પોરેશનનાં પે એન્ડ પાર્કનાં કોન્ટ્રાક્ટરો મનસ્વી રીતે પાર્કિંગ ફી વસૂલી રહ્યા છે અને એક જ પાર્કિંગમાં અલગ-અલગ લોકોને ગેરકાયદેસર પેટા કોન્ટ્રાક્ટ આપવામાં આવ્યો છે જેના કારણે ટેમ્પો ચાલકો પાસેથી એક જ પાર્કિંગમાં અલગ- અલગ પાર્કિંગ ફી વસૂલવામાં આવી છે. આ સાથે પે એન્ડ પાર્કનાં કોન્ટ્રાક્ટર દ્વારા તેમને ફાળવવામાં આવેલ પાર્કિંગ એરિયાની બહાર રોડ પર વાહનો પાર્ક કરાવીને ગેરકાયદેસર રીતે પાર્કિંગ ફી વસૂલવામાં આવી રહી છે જેના કારણે ટેમ્પો ચાલકોને ટ્રાફિક જામનો સામનો કરવો પડી રહ્યો છે. આગામી સમયમાં ઉપરોક્ત તમામ સમસ્યાઓ અંગે આંદોલન કરવામાં આવશે. મીટીંગમાં ટેમ્પો ચાલક કામદારોને ડ્રાઈવીંગ કરતી વખતે ડ્રાઈવીંગ લાયસન્સ, પીયુસી, ઈન્સ્યોરન્સ સહિતના તમામ જરૂરી દસ્તાવેજો સાથે રાખવા આહવાન કરવામાં આવ્યું હતું. આ પ્રસંગે મોટી સંખ્યામાં કામદારો અને ટેમ્પો ચાલકો ઉપસ્થિત રહ્યા હતા.

जीएसटीः ई-वे बिल बिना माल की बिक्री रोकने के लिए पैट्रोलिंग वैन की संख्या बढ़ाई!

सूरत
स्टेट जीएसटी विभाग करचोरी रोकने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहा है।सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ इन डायरेक्ट टैक्स एंड कस्टम की ओर से भी टैक्स चोरों को सबक़ सिखाने के लिए आए दिनों जीएसटी के नियमों में संशोधन किए जाते हैं।जीएसटी रिटर्न से लेकर ई-वे बिल में भी अब तक कई बार नियमों में परिवर्तन आ चुका है।इसके बावजूद जीएसटी चोरी करने वाले व्यापारी अलग अलग ढंग से टैक्सचोरी करने का प्रयास करते रहते हैं।कई बार बिना बिल के ही व्यापारी माल बेच देते हैं।इस तरह कि टैक्सचोरी रोकने के लिए सूरत में सड़कों पर मोबाइल पैट्रोलिंग वैन घूमते रहती है।इस मोबाइल वैन की संख्या अब से बढ़ा दी गई है।सूरत शहर में अब तक दो पेट्रोलिंग वैन हाईवे पर और सड़कों पर से आने वाले गाड़ियों पर वाच रखते थी और यदि तक हो तो गाड़ी रुकवाकर ड्राइवरों से ई- वे बिल मांग लेते। अब से पेट्रोलिंग वैन में अधिकारियों की संख्या और गाड़ी की संख्या बढ़ा दी गई है।सूरत में बड़े पैमाने पर कपड़ा बनता है।इसलिए बिना बिल के कपड़ों की ख़रीदारी भी कई लोग करते हैं। पेट्रोलिंग वैन की जाँच के दौरान बड़े पैमाने पर कपड़े के की टैक्स चोरी सामने आयी है।इसके अलावा इलेक्ट्रिक साधन, कैमिकल भंगार आदि भी पकड़े गए हैं। जीएसटी डिपार्टमेंट बिना बिल के बेचे जाने वाले माल पकड़कर ज़ब्त कर लेता है और माल बेचने वाले से जीएसटी की रक़म तथा पेनाल्टी वसूल करता है।
—-
जीएसटी विभाग करचोरो के खिलाफ सक्रिय
वर्तमान वित्तीय वर्ष में एक सूरत जीएसटी डिपार्टमेंट में सूरत में 12 करोड़ रुपए से अधिक की टैक्स चोरी पकड़ी है।जीएसटी डिपार्टमेंट ने बीते दिनों बड़े पैमाने पर ट्यूशन क्लासेज, ट्रैवल एजेन्सी,होटल संचालक सहित अन्य कई व्यापारियों पर छापेमारी की थी और र करोड़ रुपए की टैक्स चोरी भी पकड़ी थी। इसके पहले डिपार्टमेंट ने बोगस बिलिंग करने वालों के ख़िलाफ़ भी मुहिम शुरू करके सूरत में डेढ़ सौ से अधिक फ़र्ज़ी व्यापारी पेढ़ियां ढूंढ निकाली थी। इनके ख़िलाफ़ अभी भी डिपार्टमेंट जाँच कर रहा हैऔर जिन लोगों ने फ़र्ज़ी व्यापारियों से बिल ख़रीदा था उनसे रिकवरी की जा रही है।

नई टैक्सटाइल पॉलिसी मे 30 प्रतिशत कैपिटल तथा 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी की माँग


अन्य राज्यों से बेहतर टैक्सटाइल पॉलिसी बनाने के लिए कपड़ा उद्यमियों की गुहार

सूरत
गुजरात की टेक्सटाइल पॉलिसी 31 दिसंबर को समाप्त हो गई है।ऐसे में कपड़ा उद्यमियों को नई टेक्सटाइल पॉलिसी से कई उम्मीदें हैं।कपड़ा उद्योगों का मानना है कि अन्य राज्यों में टेक्सटाइल पॉलिसी में कपड़ा उद्यमियों के लिए कई राहत होने के चलते वहां पर कपड़ा उद्योग का विकास तेजी से हो रहा है।यदि गुजरात की टेक्सटाइल पॉलिसी में कुछ नई चीजों को नहीं शामिल किया गया तो यहां से बड़े पैमाने पर कपड़ा उद्योग का पलायन हो सकता है।इसलिए चेंबर ऑफ कॉमर्स तथा कपड़ा उद्योग के कई संगठनों ने राज्य सरकार से टेक्सटाइल पॉलिसी में कई प्रकार की सब्सिडी की मांग की है।

  • चैम्बर तथा कपड़ा संगठन के प्रतिनिधी मिले अधिकारियों से
    गत सोमवार को राज्य सरकार के उद्योग और खनिज विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी एस. जे हैदर वित्त मंत्रालय के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी जेपी गुप्ता ने नई टेक्सटाइल पॉलिसी के बारे में चर्चा करने के लिए तमाम स्टेकहोल्डर को बुलाया था। जिसमे की चेंबर ऑफ कॉमर्स से पूर्व प्रमुख आशिष गुजराती तथा किरण ठुम्मर और फिआस्वी के अध्यक्ष भरत गांधी तथा फोगवा के प्रमुख अशोक जीरावाला फोस्टा के प्रमुख कैलाश हकीम आदि उपस्थित रहे। कपड़ा उद्यमियों का कहना था कि गुजरात की पुरानी टेक्सटाइल पॉलिसी में कपड़ा उद्योग के लिए जो मदद है उसे यथावत रखना चाहिए। लेकिन गुजरात अन्य राज्यों की तुलना में पीछे ना रह जाए इसलिए कपड़ा उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए अन्य नई चीज भी इसमें शामिल करना चाहिए। जैसे की 30% कैपिटल सब्सिडी साथ 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी एवम आईटी और एचटी बिजली कनेक्शन के लिए क्रमशः तो और ₹3 प्रति यूनिट इलेक्ट्रिक सब्सिडी होनी चाहिए।
  • ब्लैकआउट पीरियड नहीं रह सके इस पर भी ज़ोर
    अलावा कपड़ा उद्यमियों ने यह भी कहा कि 31 दिसंबर को समाप्त हो रही टेक्सटाइल पॉलिसी का अमल 1 जनवरी 2024 से किया जाना चाहिए ताकि कोई ब्लैकआउट पीरियड नहीं रह सके। सूरत पॉलिएस्टर कपड़ों का सबसे बड़ा उत्पादक शहर है। सूरत में बने कपड़े देश विदेश में बिकते हैं महाराष्ट्र राज्य सरकार ने भी टेक्सटाइल पॉलिसी के विकास के लिए टेक्सटाइल पॉलिसी बीते दिनों में घोषित की थी। जिसमे की कपड़ा उद्यमियों के लिए कई छूट दी गई है।इसलिए कपड़ा जमीन चाहते हैं कि गुजरात की टेक्सटाइल पॉलिसी में भी कई छूट दी जाए जिससे कि गुजरात के कपड़ा उद्यमी महाराष्ट्र की ओर में पलायन नहीं हो।

पेइड एफ़एसआई के तौर पर मनपा की आय पाँच साल में हुई दो गुना


-2019-20 मे 426 करोड के मुक़ाबले वर्तमान वित्तीय वर्ष मे 966 करोड की आय

सूरत
सूरत के रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी का लाभ सूरत महानगरपालिका को भी हुआ है। बीते 5 साल में सूरत महानगर पालिका ने पेइड एफ़एसआई के तौर पर 2611 करोड रुपए से अधिक की कमाई की है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में ही पालिका को अभी तक 966 करोड रुपए की आए पेइड एफ़एसआई के तौर पर हुई है।वर्तमान वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक मनपा को 1000 करोड रुपए तक की आय होने की उम्मीद है।


मनपा के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार औद्योगिक शहर सूरत में लगातार तेजी से बढ़ रही जनसंख्या के चलते नए घर,सोसाइटी और नए फ़्लैट के पर प्रोजेक्ट भी धड़ल्ले से आ रहे हैं।सूरत के चारों ओर तेजी से विकास कार्य हो रहा है। सचिन, जहांगीरपुरा, जहांगीराबाद, मोटा वराछा, रांदेर, वेसू, पिपलोद डिंडोली,गोडादरा सहित तमाम क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कमर्शियल और रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट बन रहे हैं। लोगों की ओर से भी नए प्रोजेक्ट में अच्छी इंक्वारी की जा रही है।जिसके चलते बिल्डर भी प्रोजेक्ट शुरू करने में नहीं हिचक रहे।इसका सीधा फायदा आय के लिए अलग-अलग स्रोत ढूंढ रही मनपा को हुआ है।पेइड एफ़एसआई के तौर पर बिल्डर ने बीते 5 साल में लगभग 2600 करोड रुपए तक मनपा को दिए हैं। मनपा के नियम के अनुसार बिल्डर को निर्माण कार्य के लिए 1.8की एफ़एसआई दी जाती है। यदि बिल्डर अधिक निर्माण कार्य करना चाहते हैं तो मनपा उन्हें नियम के अनुसार कुछ इजाजत देती है।लेकिन इसके लिए मनपा को पेइड एफ़एसआई लेती है। यह क़ीमत कीमत जंत्री की कीमत की 30% के अनुसार मानी जाती है।

  • ⁠- तेज़ी से बढ़ी पेइड एफ़एसआई की आय
    वित्तीय वर्ष 2019-20 में 326 करोड़ 2020-21 में 132 करोड़, 2021-22 में 513 करोड़ और 2022-23 में 625 तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 966 करोड रुपए की आई हुई है।
    उल्लेखनीय है कि सूरत महानगरपालिका निर्माण कार्य के लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन दो तरह से मंजूर करती है मनपा को ज्यादातर आय ऑफ़लाइन मंजूरी से मिलती है। कोरोना के बाद से रियल एस्टेट सेक्टर में अच्छा माहौल है कोरोना के दिनों में कई बिल्डर के प्रोजेक्ट बंद हो गए थे जो कि अभी तक दिक्कत का सामना कर रहे हैं लेकिन आप ज्यादातर बिल्डर के लिए अच्छे दिन हैं।

निःशुल्क अयोध्या दर्शन के लिए उधना स्टेशन से ट्रेन रवाना

सूरत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या में भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद देश भर से असंख्य रामभक्त दर्शन के लिए जा रहे हैं। नवसारी लोकसभा सांसद एव गुजरात प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल के आर्थिक योगदान से महिलाओं के लिए निःशुल्क अयोध्या दर्शन के लिए उधना स्टेशन से ट्रेन रवाना की गई।


सूरत और नवसारी से कुल चार ट्रेनें रवाना की गईं, जिनमें करीब 1344 महिला श्रद्धालु शामिल हैं। रामलला के निःशुल्क दर्शन हेतु “आस्था स्पेशल महिला ट्रेन” भेजी गई।


इस अवसर पर उधना रेलवे स्टेशन पर बीजेपी सूरत महानगर अध्यक्ष निरंजनभाई झांझमेरा, महामंत्री किशोर बिंदल, रेलवे समिति सदस्य छोटूभाई पाटिल, यूथ फॉर गुजरात के अध्यक्ष जिग्नेश पाटिल और चौयासी, उधना, लिंबायत और मजुरा विधानसभा के नगरसेवक और कार्यकर्ता उपस्थित थे। राम भक्त महिला तीर्थयात्रियों को पुष्प अर्पित कर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

हेडिंग हीरा उद्योग का डाटाबेज बनाने की कवायतः राज्य सरकार करेगी सर्वे


सूरत
दुनिया भर में हीरा उद्योग के तौर पर डंका बजाने वाले सूरत शहर में हीरा उद्योग से जुड़ी तमाम जानकारियो का डाटाबेज बनाने के लिए राज्य सरकार ने सर्वे करने का फ़ैसला किया है।सर्वे के माध्यम से राज्य सरकार हीरा उद्योग पर निर्भर लोग, उनकी आर्थिक परिस्थिति सहित कई जानकारियाँ एकत्रित करेगी और भविष्य में यदि किसी प्रकार की आवश्यकता उत्पन्न हुई को रिपोर्ट के आधार पर फ़ैसला लिए जाएगा। ऐसा माना जा रहा है।
हीरा उद्योग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सूरत में नेचरल डायमंड और लैबग्रान डायमंड उद्योग दोनों ही बड़े पैमाने पर है। दोनों में कुल मिलाकर लगभग 7 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मिलता है। सूरत में तैयार होने वाले हीरे अमेरिका,यूरोप,जापान हांगकांग,चीन देशो मे निर्यात किए जाते हैं। सूरत मे नेचरल हीरो के साथ अब लैबग्रान हीरा उद्योग का भी कारोबार बढ़ा है। मंदी के दिनों में लैबग्रान हीरा उद्योग ने लाखों लोगों को रोज़ी रोटी दी थी। इतने बड़े पैमाने पर उद्योग फ़ैला होने के बाद वे भी राज्य सरकार के पास ठोस जानकारी नही थी।


राज्य सरकार की पॉलिसी बनाने में मिलेगी मदद
हीरा उद्योग से जुड़े श्रमिको के बारे मे जानकारी के अभाव में वर्ष 2008 में आर्थिक मंदी के समय वे यहाँ उद्योग से जुड़े लोगों को आर्थिक मदद करने मे बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था लेकिन अब राज्य सरकार हीरा उद्योग की जानकारी एकत्रित करना चाहती है जिसके चलते बीते दिनों राज्य सरकार के अधिकारी सूरत आए थे और 35 कंपनियों के एचआर डिपार्टमेंट के अधिकारी तथा डायमंड एसोसिएशन के पदाधिकारियों से मीटिंग की। मीटिंग के दौरान उन्होंने प्राथमिक जानकारी एकत्रित करने का प्रयास किया।

आगामी दिनों में सर्वे शुरू होने की उम्मीद
सूरत में 3000 से अधिक छोटे बड़े हीरा के कारख़ाने हैं। राज्य सरकार हीरा उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या तथा उनकी जीवनशैली के बारे में अध्ययन करना चाहती है। इसे ध्यान में रखते हुए बीते दिनों में राज्य सरकार के अधिकारी डायमंड कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट के अधिकारियों से मिले थे आगामी दिनों में सर्वे शुरू होने की संभावना है।
जगदीश खूँट, प्रमुख, सूरत डायमंड एसोसिएशन
हीरा उद्यमियों के लिए शुरू करने चाहिए योजनाएँ
हीरा उद्योग का सर्वे करने के बाद राज्य सरकार को हीरा उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों के विकास के लिए योजना शुरू करने चाहिए।हमने इस बारे में कई बार राज्य सरकार से गुहार लगायी है।जिसके चलते राज्य सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है।इस सर्वे से हीरा उद्योग के सभी लोगों को लाभ होगा।
भावेश टांक, प्रमुख, सूरत डायमंड वर्कर यूनियन

पीएम मेगा टेक्सटाइल पार्क से खुलेंगे कपड़ा उद्योग के विकास के रास्ते

सूरत
नवसारी के वांसी-बोरसी में बन रहे पीएम मेगा टेक्सटाइल पार्क का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों गुरुवार को खातमुहूर्त हुआ।पीएम मेगा टेक्सटाइल पार्क से दक्षिण गुजरात के कपड़ा उद्योग को नई दिशा मिलेगी। बताया जा रहा है कि इस पार्क में एक ही क्षेत्र मे वीविंग, प्रोसेसिंग, डाइंग, प्रिंटिंग और स्पिनिंग सहित कपड़ा उद्योग से जुड़े तमाम घटकों के यूनिट लगेंगे।जिसके चलते एक ही स्थान पर टेक्सटाइल उत्पादन की व्यवस्था तैयार होगी। देश के सात राज्यों में पीएम मेगा टेक्सटाइल पार्क तैयार हो रहा है। कपड़ा उद्योग के जानकारों का मानना है कि नवसारी में बन रहे पीएम मित्र पार्क में 15000 से 20000 करोड रुपए का निवेश होगा।सूरत सहित दक्षिण गुजरात के उद्यमी इसमें निवेश कर रहे हैं।टेक्सटाइल पार्क में कपड़ा उत्पादन से जुड़े अलग-अलग सभी यूनिट होने के कारण यातायात खर्च भी बढ़ेगा।
तीन प्रतिशत इन्सेन्टिव से प्रोत्साहन
पीएम मित्र पार्क में पावर, पानी, बॉयलर, स्टीम, सीईटीपी सहित की व्यवस्था उद्यमियों को मिलेगी।यहां पर यूनिट शुरू करने वाले उद्यमियों को सिर्फ निर्माण कार्य करके मशीन लगानी है। कपड़ा उद्यमियों को टर्नओवर पर 3% का इंसेंटिव भी मिलेगा।साथ ही एक ही स्थान पर कपड़ा उत्पादन की तमाम व्यवस्था होने से विदेशी ग्राहक भी बड़ी संख्या में आने की उम्मीद है। फिलहाल सूरत में 80000 करोड रुपए का कपड़ों का कारोबार है। इसमे पांच प्रतिशत एक्सपोर्ट होता है।
कपड़ा उद्यमियों के लिए नई संभावना
मेगा टेक्सटाइल बनने के बाद नई टैक्नोलॉजी वाली मशीने बढेगी। इससे कपड़ों की लागत घटने से एक्सपोर्ट भी बढ़ सकता है। इतना ही नहीं सूरत में तेजी से बढ़ रहे गारमेंट उद्योग को भी टेक्सटाइल पार्क के चलते गति मिलेगी।सूरत में गारमेंट के लगभग 150 से अधिक यूनिट है लेकिन एक्सपोर्ट अभी भी नहीं के बराबर है पीएम मेगा टेक्सटाइल पार्क बनने के बाद यहां पर नई गारमेंट फैक्ट्री भी आएंगे कपड़ों का उत्पादन सस्ता होने के कारण लागत कम होगी इसका लाभ एक्सपोर्ट में मिलने से उद्यमी आगे बढ़ेंगे ऐसा माना जा रहा हैं।
कपडा उद्योग के विकास को मिलेगी गति
वांसी-बोरसी मे बन रहे टैक्सटाइल पार्क से सूरत के कपड़ा उद्योग को विकास को गति मिलेगी। यार्न से लेकर गारमेन्ट इन्डस्ट्री तक कपड़ा उद्योग तक सभी जुड़े उद्योग को लाभ मिलेगा। पार्क से दो लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मिलेगा।
कमल विजय तुलस्यान, अग्रणी कपड़ा उद्यमी