हर माता-पिता का एक सपना होता है कि उनके बुरे दिनों में उनकी संतान उनका ख्याल रखे। सोचिए जो संतान नजर के सामने होने के बाद भी अपने माता-पिता का ख्याल नहीं रखते। शायद अब तो यह फैशन बनते जा रहा है।

कई मामले सामने आ जाते है लेकिन कई मामलों में माता-पिता चुपचाप अन्याय सहते रहते हैं। ऐसी संतानो को सबक सिखाने के लिए महाराष्ट्र के लातूर जिला परिषद ने अनोखा कदम उठाया है।महाराष्ट्र के लातूर जिला परिषद में अपने बूढ़े माता-पिता का ख्याल नहीं रखने पर यहां के कर्मचारियों का वेतन काट लिया गया।

यहां के प्रेसिडेंट राहुल बोंद्रे ने बताया कि उनके 12 कर्मचारियों के खिलाफ अपने माता-पिता का ठीक से ध्यान नहीं रखने की शिकायतें मिलीं थीं। इन 12 में से 6 कर्मचारी टीचर हैं।इन कर्मचारियों की सैलरी में से हर महीने 30 परसेंट वेतन काटकर उनके माता-पिता के अकाउंट में डाल दिया जा रहा है।

लातूर जिला परिषद की महासभा ने अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करने वाले कर्मचारियों की सैलरी में से 30 प्रतिशत कटौती का प्रस्ताव गत वर्ष नवंबर में पारित किया था. राहुल बोंद्रे ने बताया कि ऐसे कर्मचारियों की सैलरी में से कटौती दिसंबर 2020 से शुरू कर दी गई है।

12 में से 7 कर्मचारियों के खातों में से दिसंबर 2020 से वेतन काटना शुरू कर दिया गया है। लगभग 15000 रुपए हर महीने इन कर्मचारियों के खाते से कटेंगे। लातूर जिला परिषद के इस नियम की सराहना की जा रही है। हालाकि कुछ लोगों का मानना है कि इस तरह के घरेलू मामले घरों में ही आपसी सूझबुझ से सुलटा लेने चाहिए।