सूरत जिला पंचायत की 34 और तहसील पंचायत में 176 बैठकों सहित पुरे गुजरात में तहसील पंचायत और जिला पंचायत के लिए चुनाव शुरू हो चुका है। 9.37 लाख मतदाता अपने मत का प्रयोग करेगे।
जिला पंचायत की 36 बैठकों में से दो बैठक कामरेज और पिंजरत पंचायत में भाजपा के प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए जाने के बाद 34 बैठकों के लिए चुनाव होंगे। इसमें आधी बैठक यानी कि 16 बैठक पर भाजपा कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होगी। जबकि आम आदमी पार्टी तथा अन्य पार्टियों के प्रत्याशियों की उपस्थिति के कारण चुनाव रोमांचक हो सकता है।
कुल 34 बैठकों के लिए 89 प्रत्याशी मैदान में हैं। भाजपा और कांग्रेस के कई नाराज नेताओं ने पार्टी छोड़ देने के बाद चुनाव में और प्रतिस्पर्धा होगी। बारडोली की वांकानेर बैठक पर चुनाव लड़ने वाले भावेश पटेल नानी नरौली बैठक पर से कांग्रेस के दर्शन नायक और सुराली बैठक पर आम आदमी के भी चुनाव में शामिल होने के कारण यह चुनाव और रोमांचक हो गया है।
तहसील पंचायत में भाजप को चौर्यासी तहसील पंचायत की दो, ओलपाड की पांच तथा बारडोली की खोज बैठक निर्विरोध हासिल की है। जबकि बाकी 9 तहसील पंचायत की बैठको में तीन से अधिक प्रत्याशी मैदान में खड़े हैं। इससे बड़े पैमाने पर विभाजन होने की संभावना है।
चौर्यासी तहसील में 31, ओलपाड में 51, कामरेज में 62, पलसाना में 44, बारडोली में 49, महुआ में 52, मांडवी में 70, मांगरोल में 65, और उमरपाड़ा तहसील पंचायत में 42 प्रत्याशी मैदान में है।
सूरत महानगर पालिका के आज घोषित परिणामों ने बीजेपी के खेमे में खुशी, आप के खेमे में उम्मीद की लहर और कांग्रेस के खेमे में सन्नाटा फैला दिया है। बीजेपी को मनपा के चुनाव में 93 सीट मिली हैं जबकि आम आदमी पार्टी को पहले ही चुनाव में 27 सीटों की सफलता मिली है। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी अपना खाता खोलने में भी असफल हो गई है। कांग्रेस के लिए बहुत ही शर्मजनक परिस्थिति बनी है।

पिछले चुनाव में भाजप की 80 सीटें आई थी जबकि कांग्रेस की 36 सीट थी और कांग्रेस ने विपक्ष की भूमिका निभाई थी लेकिन इस बार कांग्रेस को संतोष के लिए एक सीट भी नहीं मिली है। आपको बता दें कि कांग्रेस की हार के लिए तीन-चार बातें जिम्मेदार मानी जा सकती हैं। शहर का नया सीमांकन भी नुकसानदायक साबित हुआ। इससे कांग्रेस के समर्पित मतदाता कई क्षेत्रों में बंट गए। जहां कांग्रेस की जीत थी। वहां भी मुश्किल हो गई। हालांकि भाजप के लिए भी बहुत खुश होने जैसा नहीं है क्योंकि जहां कांग्रेस गई वहां दूसरी और उसके स्थान पर आप पार्टी आ गई।
1995 में भी कांग्रेस को सूरत महानगर पालिका में एक भी बैठक नहीं मिली थी। इसके 26 साल बाद फिर से भाजप का रोड रोलर चला और कांग्रेस शुन्य पर सिमट गई। इसके अलावा कांग्रेस ने टिकट बांटने में पाटीदार फैक्टर की अवगणना की यह भी उसे भारी पड़ा।
पाटीदारों ने कांग्रेस से जितनी सीटें मांगी थी उतनी नहीं मिलने के कारण भी चुनाव के अंतिम दिनों में कांग्रेस की बाजी पलट गई। पाटीदारों ने पहले से ही कांग्रेस को कह दिया था कि इस बार कांग्रेस को चुनाव जीतना मुश्किल होगा जो कि उन्होंने साबित कर बताया। हर बार की तरह आप एक बार फिर से कांग्रेस अपनी हार पर मनो मंथन करेगा और हो सकता है कि इस्तीफे की झड़ी भी लगनी शुरू हो जाए।
जानकारो का कहना है कि परप्रांतिय क्षेत्रों में भी कांग्रेस के आला कमान प्रत्याशियों के चयन में थाप खा गए। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कई स्थानों पर तो कार्यकर्ताओ की बात की अवगणना की गई। चुनाव अभियान में कोई बड़े नेता नहीं दिखे। और ना ही कई क्षेत्रों में प्रत्याशी ही मतदाताओं तक पहुंच पाए।
गुजरात में छह महानगर पालिका चुनाव के परिणामों में भाजपा ने सत्ता की चाबी ले ली है। कांग्रेस का परिणाम निराशानजनक रहा। वहीं आप ने सूरत में पहले ही चुनाव में शानदार एन्ट्री की है। आप की इस तरह की विजय को सूरत में विधानसभा के चुनाव के साथ भी अलर्ट के तौर पर देखा जा रहा है।
साथ ही अब आगामी चुनावों के लिए भी अन्य पार्टियों को दोहरी तैयारी करनी पडेगी। मनपा चुनाव के टिकिट बंटवारे में कांग्रेस ने अंतिम समय पर पास के कार्यकर्ताओं को टिकिट नहीं देने के कारण नुकसानी का सामना करना पड़ा। जिसका सीधा फायदा आप को हुआ। बीजेपी को इसका लाभ बहुत ही कम मिला। अब फैक्टर उस क्षेत्र के मतदाताओं का मन बताता है कि उन्हें सिर्फ बीजेपी के नाम से नहीं लुभाया जा सकता। अभी भी वह पाटीदार आंदोलन का समर्थन कर रहे है।
पिछली बार मनपा के चुनाव में सूरत में कांग्रेस को वराछा, कतारगाम, अमरोली आदि क्षेत्रों में ही बढत मिली थी। इस बार इन क्षेत्रों में कांग्रेस की चूक का खामियाजा आप पार्टी के लिए लाभदायक हो गया। राजनितिक पंडितो का कहना है कि यदि इन क्षेत्रों में आप अपने काम से मतदाताओं का मन लुभा लेती है तो बीजेपी, कांग्रेस सहित सभी पार्टियों के लिए विधानसभा के चुनाव में नई चुनौती खड़ा कर सकते हैं।
बताया जा रहा है कि मनपा चुनाव के पहले सूरत में आप को 10 सीट में विजयी माना जा रहा था, लेकिन आप ने उससे बेहतर प्रदर्शन किया। इससे अन्य पार्टियों में मंथन चल रहा है। यदि आप पार्टी अगले साल गुजरात में विधानसभा में अपनी चुनावी बिसात सही से बिछाने में सफल रही तो यह चुनाव टक्कर का हो सकता है।
गुजरात में सूरत समेत छह महानगर पालिकाओं के चुनाव परिणाम घोषित हुए। जिसमें कि सभी महानगरपालिकाओ के परिणाम भाजपा के पक्ष में रहे। सूरत में भाजपा सत्ता की ओर आगे बढ चुकी है जबकि आम आदमी पार्टी को अपना खाता खोलने में सफलता मिली।
पिछली बार की अपेक्षा इस साल कांग्रेस के लिए चुनाव परिणाम निराशाजनक रहे। कांग्रेस के लिए ‘पास’ गले की फांस बन गया। टिकिट बांटने में पाटीदारों को कम आंकना कांग्रेस को भारी पड़ा। नतीजा यह रह कि पिछली बार जिन सीटों पर कांग्रेस को अच्छी लीड और जीत मिली थी। वह गईं सीटे आप ने हथिया ली।

अभी तक मिली जानकारी के अनुसार वॉर्ड नंबर1,6,10,14,15,21,23,25,27,29 पर बीजेपी की पेनल जीती, जबकि वॉर्ड नंबर 4 और 16 पर आप को विजय मिली है। जिन स्थानो पर गिनती चल रही है। उन ज्यादातर स्थानो पर अभी बीजेपी आगे हैं। एकाध वॉर्ड में कांग्रेस और आप के प्रत्याशी आगे हैं। वार्ड नंबर पांच में आप के सभी प्रत्याशी आगे चल रहे हैं। आप ने पहली बार मनपा चुनाव में दावेदारी की और सफलता हासिल की है।
आप पार्टी की ओर से 22 साल की प्रत्याशी पायल साकरिया भी विजयी रही। आज सबेरे से ही भाजपा सहित अन्य पार्टियों के प्रत्याशी और समर्थक ढोल नगाडे के साथ मतगणना केन्द्र पर पहुंच गए। सूरत में एसवीएनआईटी तथा मजूरा गेट पर गांधी इंजिनियरिंग कॉलेज में मतदान की गिनती चल रही है।
डायमंड वर्कर यूनियन ने कलक्टर और श्रम मंत्रालय को ज्ञापन देकर मतदान के दिन कारखाने बंद रखने की मांग की है।डायमंड वर्कर यूनियन के प्रमेश रमेश जिलरिया और उपप्रमुख भावेश टांक ने बताया कि कुछ पार्टिया नहीं चाहती कि मतदान के दिन हीरा श्रमिक मतदान करें हमें ऐसी आशंका है। इसलिए वह हीरा श्रमिकों को मतदान से वंचित रखने के लिए कारखाने चालू रखाने का प्रयास कर रही है। ऐसा नहीं हो और हीरा कारखाने वेतन के साथ बंद रखा जाए।
ज्ञापन में बताया गया है कि बीते कुछ समय से कई राजनीतिक पार्टिया हीरा श्रमिकों को अपनी रैली में आने के लिए भी दबाव ड़ाल रही होने के समाचार सामने आ रहे हैं। यूनियन ने हीरा श्रमिकों से बिना किसी डर के मतदान करने की मांग की है। यदि कोई डराए तो यूनियन को जानकारी देने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले ही डायमंड वर्कर यूनियन ने लॉकडाउन के दिनों में हीरा श्रमिकों को मदद नहीं करने वाली राजनीतिक पार्टियों को मत नहीं देने के लिए भी अपील की थी। यूनियन का आरोपा है कि लॉकडाउन के कारण कई हीरा श्रमिक बेरोजगार हो गए और कइयो ने आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण आत्महत्या जैसे कदम भी उठाए।
सूरत महानगर पालिका चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो गई है। इसी के साथ चुनावी पार्टियों का चुनाव प्रचार का अभियान और अधिक आक्रामक होता जा रहा है। सभी पार्टियों के प्रत्याशी रैली, रोड शो, डोर टो डोर केम्पेनिंग सहित हर प्रकार के प्रयास कर मतदाताओं को रिझाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी तेजी से चल रहा है।
इस बार चुनाव में आम आदमी पार्टी के प्रवेश के साथ चुनाव थोडा और रोमांचक हो गया है। आप पार्टी ने अमरोली, कतारगाम और वराछा क्षेत्र में एडी चोटी का जोर लगा दिया है। संभवत: यहां आम आदमी पार्टी के लिए कछु अच्छी खबर भी रह सकती है। लेकिन इस बीच चुनावी प्रचार के दौरान कई स्थानो पर राजनीतिक पार्टी के प्रत्याशियों को लोगों से कड़वे अनुभव का सामना भी करना पड़ रहा है।
कई स्थानो पर लोग प्रत्याशियों से कोरोना के दौरान कहां थे, जैसे सवाल पूछ रहे हैं। कई स्थान पर लोग चुनाव के बहिष्कार की धमकी दे रहे हैं। सूरत नगर निगम के मोटा वराछा क्षेत्र में खोडियार नगर सोसाइटी के गेट पर, भाजपा को भगाने और कांग्रेस को बाहर करने के लिए बैनर लगाए गए हैं।
इस सोसायटी में में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण, लोग नाराज हैं और अब भाजपा कांग्रेस के बजाय आम आदमी पार्टी का स्वागत करने वाले बैनर लगाए हैं। मोटा वराछा, खोडियार नगर में बैन ने लोगों में उत्सुकता पैदा कर दी है। देखना यह है कि अन्य पार्टियों का विरोध कितनी हद तक आम आदमी पार्टी के लिए लाभदायक हो सकता है।
गुजरात में स्थानिय निकाय के चुनाव घोषित हो चुके हैं। सभी राजनितिक पार्टियां चुनाव जीतने के लिए जोर लगा रही है। भाजपा, कांग्रेस और आप ने एड़ी चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया रविवार को सूरत दौरे पर आए थे। पत्रकार परिषद को संबोंधित करने के बाद उन्होनें रोड शो किया था।
सरथाणा से गजेरा सर्कल तक रोड शो के दौरान उनकी सभा में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। इस रैली में मनीष सिसोदिया आप के कार्यकर्ताओ के साथ गरबा भी किया। इसके पहले सिसोदिया ने अहमदाबाद और राजकोट में रोड शो किया था। उन्हे रोड शो करते देख आप पार्टी के कार्यकर्ता बडे़ जोश में नजर आए।
इस रोड शो के दौरान मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में बीते पांच साल से किसी निजी स्कूल ने फीस में बढोत्तरी नहीं की। दूसरी ओर गुजरात की स्कूलो में हर साल फीस के तौर पर बड़ी रकम बढा दी जाती है। राज्य सरकार क्यों रोक नहीं पा रही। क्या सरकार गरीब और मध्यमवर्ग के लोगों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले यह नही चाहती?
आप को बता दें कि इस बार सूरत मनपा का चुनाव आप पार्टी के प्रवेश करने के कारण थोडा रोमांचक हो गया है। अब तक भाजपा को सूरत में बडी़ लीड मिलती थी, लेकिन इस बार आप के मनपा चुनाव में प्रवेश करने से थोडा सा रोमांच बन जाएगा।
सूरत महानगर पालिका के चुनाव के लिए शनिवार को नामांकन भरने का अंतिम दिन था। कुल 120 सीटों के लिए1317 प्रत्याशियों ने फॉर्म भरे। शनिवार को अंतिम दिन कुल 1182 फॉर्म भरे गए। वॉर्ड 13 में सबसे अधिक 55 फार्म भरे गए। चुनाव के लिए इस बार टिकिट घोषित होने के पश्चात भाजपा और कोंग्रेस दोनो पार्टियो में आंतरिक कलह शुरू हो गया था।
भाजपा और कोंग्रेस दोनो ही पार्टियों में से कार्यकर्ताओं के इस्तीफे की जानकारी सामने आ रही है। चुनाव के लिए सबसे पहले एनसीपी पार्टी ने अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित किए थे। कांग्रेस के प्रत्याशियों को लेकर अंतिम समय तक असमंजस बना था। भाजपा ने दो दिन नामांकन भरने के दो दिन पहले प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए थे।
जिसके लिए 1 फरवरी से नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई है और आज शनिवार को नामांकन का अंतिन दिन था। शहर के 30 वोर्ड के लिए 15 चुनाव अधिकारी कार्यालय में नामांकन की सुविधा है। इसके पहले शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी के 34 उम्मीदवारों ने विजयमुर्हूत में फॉर्म जमा किया। भाजपा के बाकी उम्मीदवार शनिवार को नामांकन किया। कांग्रेस की दुसरी सूची घोषित करने के बजाय संभावित उम्मीदवारो को कांग्रेस ने डायरेक्ट सूचना देकर चुनावी फोर्म भरकर तैयार रखने की सूचना दी थी।
शनिवार को भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार नामांकन करने के लिए एकसाथ उमड पडने से कार्यालय में काफी भीड जमा हो गई। भीड को काबु में करने के लिए पुलिस बंदोबस्त के तहत मात्र उम्मीदवार और साक्षी को ही कार्यालय परिसर में जाने दिया गया। चुनाव अधिकारी कार्यालय में पर्चा जमा करते समय कोविड गाईडलाईन का पालन करते हुए उम्मीदवार के साथ साक्षी के लिए 5 लोगों को ही प्रवेश दिया गया।
कोरोना की गाइडलाइन के कारण प्रत्याशियों के फ़ॉर्म भरते समय समय बैंड बाजा और रेली का माहोल देखने को नही मिला। उम्मीदवारों ने सादगी और शांतिपुर्ण माहौल में नामांकन किया। शुक्रवार शाम तक भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी,निर्दलिय तथा अन्य पक्ष के सहित कुल 1317 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन किया। जिला चुनाव अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार सूरत महानगरपालिका का चुनाव 21 फरवरी को और मतगणना 23 फरवरी 2021 को है।
कोरोना ने लोगों की जीवन जीने की शैली को बदल कर रख दिया है। कोरोना के कारण जहां सामाजिक आयाम बदले हैं वहीं अब चुनाव में भी कोरोना का प्रभाव दिख रहा है। राज्य सरकार की ओर से इस बार चुनाव को लेकर नई मार्गदर्शिका जारी की है। इसके अनुसार प्रत्याशियों को कई नियमों का पालन करना होगा।
चुनाव प्रचार के दौरान 5 से अधिक व्यक्ति नहीं उपस्थित रहेंगे। साथ ही कार्यालय में भी लोगों का समूह इकट्ठा करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। परिस्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग ने राज्य के 6 महानगर पालिका के चुनाव में प्रत्याशी ऑनलाइन फॉर्म भर सकेंगे यह विकल्प भी रखा है। प्रत्याशियों को ऑनलाइन फॉर्म भर के डॉक्यूमेंट अपलोड करने रहेंगे।
इसके बाद फॉर्म की प्रिंट निकाल कर जरूरी डॉक्यूमेंट और एफिडेविट और डिपोजिट के के साथ वार्ड के चुनाव अधिकारी कार्यालय में जमा करना रहेगा। सूरत महानगर पालिका के चुनाव का परिपत्र घोषित होने के साथ ही फॉर्म लेने के लिए लोग बड़ी संख्या में उपस्थित हो रहे हैं। 2 दिन में 700 से अधिक फॉर्म लिए जा चुके हैं।
कांग्रेस ने प्रत्याशियों की प्रथम तिथि घोषित कर दी है। अब कुछ दिनों में ही भाजप भी प्रत्याशियों की सूची घोषित कर देगा। बुधवार और गुरुवार को फॉर्म भरने के लिए बड़ी संख्या में प्रत्याशी उपस्थित रहेंगे। हालांकि कोरोना की परिस्थिति को देखते हुए चुनाव ने प्रत्याशी ऑनलाइन उम्मीदवार फॉर्म भर सकते हैं यह सुविधा भी दी है।
ऑनलाइन फॉर्म भरने के साथ जरूरी डॉक्यूमेंट भी अपलोड करने होंगे। इसके बाद फॉर्म का प्रिंट निकाल कर एफिडेविट और जरूरी डॉक्यूमेंट भी संबंधित अधिकारी को देना होगा। इसके अलावा आरक्षित कैटेगरी के प्रत्याशी को 1500 और जनरल कैटेगरी को 3000 डिपॉजिट देना होगा। कोरोना की महामारी को ध्यान में रखते हुए चुनाव का फॉर्म भरे जाते समय ज्यादा लोगों के इकट्ठे होने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
सूरत महानगर पालिका के चुनावी तैयारी में सभी पार्टियां एड़ी चोटी का जोर लगा रही है वहीं दूसरी ओर पार्टी के कार्यकर्ताओं में टिकट के बंटवारे को लेकर कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल है। सोमवार को कोंग्रेस की ओर टिकिट घोषित किए जाने के बाद मंगलवार को सूरत के वार्ड नंबर 17 में धीरुभाई लाठिया को टिकट दिया गया है जिसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और अपना विरोध व्यक्त किया।
इस बारे में वीडियो भी वायरल हो रहा है हालांकि प्रत्याशी धीरुभाई ने मीडिया को बताया कि यह पार्टी की आंतरिक बातें हैं और यदि किसी को नाराजगी है तो हम आपस में सहमति बना लेंगे। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जैसे ही नाम घोषित हुआ वैसे ही विरोध करना शुरू कर दिया था। उनका कहना था कि उन्हें यह प्रत्याशी नहीं चाहिए। नहीं तो, पार्टी को गंभीर परिणाम भोगना पड़ सकता है।

दूसरी ओर भाजप में भी नई फार्मूला के कारण कार्यकर्ताओं में और कॉरपोरेटर ओ में असमंजस का माहौल है। 55 वर्ष से अधिक आयु वाले कार्यकर्ता और पूर्व कॉर्पोरेटर यह नहीं समझ पा रहे कि वह टिकट मांगे भी या नहीं? हालांकि उन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष ढंग से यह बात आलाकमान तक पहुंचा दी है कि यदि उन्हें नहीं तो उनकी पत्नी या उनके घर में किसी को टिकट मिल जाए।
अब देखना यह है कि भाजपा अपने नए फार्मूला में कितना सफल रहती है। एक बात तो तय है कि इस बार चुनाव में कई पुराने नेताओं को घर बैठना पड़ सकता है। भाजपा और कांग्रेस दोनो ही पार्टिया इस बार कुछ नए चेहरों को उतार सकती हैं।