सर्विस टैक्स की नोटिस मिलने से व्यापारी हो रहे परेशान, पुराने मामलों में रिकवरी का भार!

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सूरत शहर तथा दक्षिण गुजरात के कई व्यापारी इन दिनों सर्विस टैक्स के नोटिस के जाल में फँस गए हैं। जीएसटी लागू होने के बाद से सर्विस टैक्स के लंबित मामलों को नई का निस्तारण करने के लिए मार्च 2023 की समय सीमा तय की गई थी। जिसे लेकर डिपार्टमेंट लंबे समय से कार्रवाई कर रहा था और जिन करदाताओं के मामले सर्विस टैक्स में लंबित थे उन्हें नोटिस दी जा रही थी। जिन करदाताओं ने समय पर नोटिस का जवाब दे दिया वह तो बच गए लेकिन जिन्होने नोटिस का जवाब देना उचित नहीं समझा या किसी कारण से जवाब नहीं दिया। अब उनके ख़िलाफ़ डिपार्टमेंट ने डिमांड तय कर दी है। आगामी दिनों में इसकी वसूली के लिए कार्रवाई शुरू की जाएगी। डिमान्ड नोटिस मिलने के बाद व्यापारी परेशान हो गए है।हालाँकि इसके बीच में व्यापारी 60 दिनों के भीतर अपील में सुनवाई के लिए जा सकते हैं।


मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 मे जीएसटी का क़ानून देश में लागू हो गया। इसके बाद सर्विस टैक्स सहित कई क़ानून नाबूद कर दिए गए थे। सर्विस टैक्स का क़ानून नाबूद नियम होने के बाद जो भी पिछले मामले सर्विस टैक्स मैं किसी कारणवश लंबित रह गए थे। उन्हें जल्द से जल्द पूरा या पाँच साल में पूरा करने के लिए डिपार्टमेंट को सूचना दी गई थी। इस तरह सर्विस टैक्स के तमाम मामलों को निपटाने के लिए 31 मार्च की समय सीमा तय कर दी गई थी। जिसके चलते डिपार्टमेंट द्वारा वर्ष 2022 से हर तीन महीने के अंतराल में व्यापारियों को संबंधित डॉक्यूमेंट और जवाब देने के लिए नोटिस भेजा जा रहा था। कई व्यापारियों ने डिपार्टमेंट के आग्रह के अनुसार वी पेश कर दिए अपने जवाब भी दे दिए थे। जिन मामलों में डिपार्टमेंट को व्यापारी के संतोष कारक जवाब लगे वह मामले सुलझा दिए गए लेकिन जिनमें शंकास्पद मामला लगा ऐसे कई मामले अभी भी पेंडिंग है।जिन करदाताओं ने कोई जवाब नहीं लिखाया या डॉक्यूमेंट भी नहीं दिए ऐसे हज़ारों मामलों मे डिपार्टमेंट ने नोटिस निकाल दिया है।

— 60 दिन में व्यापारी कर सकते हैं अपील
जिनमें मामलों में व्यापारियों को लगता है कि डिपार्टमेंट की ओर से एक तरफ़ा कार्रवाई की गई है या उन्हें डिपार्टमेंट की कार्रवाई से असंतोष है।ऐसे मामलों में व्यापारी डिमांड की रक़म का साढ़े सात प्रतिशत हिस्सा जमा करके अपील में मामला ले जा सकते हैं।हालाँकि उन्हें 60 दिन के भीतर ही अपील करनी होगी।

डीटीसी की साइट मे रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रहने से हीरा उद्योग को मिली राहत!


सूरत
दुनिया मे रफ़ हीरों का व्यापार करने वाले सबसे बड़ी डायमंड ट्रेडिंग कंपनी ने अप्रैल महीने मे रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रखने से हीरा उद्यमियों में राहत की साँस ली है। बीते कई दिनों से हीरा उद्योग में डिमांड की कमी के कारण रफ हीरो की क़ीमत और तैयार हीरो की क़ीमत में अंतर बढ़ता जा रहा था। ऐसे में डीटीसी कंपनी यदि रफ हीरो की क़ीमत बढ़ा ती या घटाती तो बाज़ार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका थी। इसे देखते हुए डीटीसी कंपनी ने व्यापार हित मे यह फ़ैसला किया है।

हीरा उद्योग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 1 साल से अधिक लंबे समय से हीरा उद्योग में परिस्थिति अच्छी नहीं है।अमेरिका तथा यूरोप जैसे देशों में लोगों की ओर से ख़रीद घटने के कारण कट और पॉलिश्ड हीरो का निर्यात घटते जा रहा है। हीरा उद्योग को इस परिस्थिति से उभारने के लिए हीरा उद्यमी लगातार प्रयास कर रहे हैं।बीते दिनों में कट और पॉलिश्ड हीरो की डिमांड बिलकुल घट जाने के कारण क़ीमत में भी गिरावट आ गई थी। इससे हीरा उद्यमियों को नुक़सान उठाना पड़ा था। कई हीरा उद्यमियों ने ज़्यादा क़ीमत मे रफ हीरे ख़रीदे थे। उन्हें कम क़ीमत मे तैयार हीरे बेचने पड़े। हीरा उद्योग में उतार-चढाव के बीच रफ हीरो की क़ीमत भी बड़े मायने रखती है।हीरा उद्यमियों की परिस्थिति को समझते हुए रफ डायमंड कंपनियो ने भी रफ हीरो की क़ीमत में कोई ज़्यादा उतार चढ़ाव नहीं कर रही है। अप्रैल महीने मे डीटीसी कंपनी ने जारी की साइट में रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रखी है। इससे पहले मार्च महीने में भी रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रखी थी।
जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन विजय मंगुकिया ने बताया कि डीटीसी की साइट में कच्चे हीरो की क़ीमत में बढ़ोतरी या कमी नहीं आयी है। जो कि हीरा उद्यमियों के लिए अच्छी बात है। यदि रफ़ हीरो की क़ीमत घट जाती तो लोग तैयार हीरा भी कम क़ीमत पर माँगने लगते हैं और वह रफ हीरे की क़ीमत बढ़ी तो हीरा उद्यमियों को ऊँची क़ीमत बार रफ़ हीरे ख़रीदना पड़ता है। दूसरी ओर बाज़ार में पॉलिश्ड हीरो की क़ीमत नहीं बढ़ी है।ऐसे में महँगे रफ़ हीरे ख़रीदने से हीरा उद्यमियों को नुक़सान हो सकता है। रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रहने से हीरा उद्योग के लिए परिस्थिति संतुलित रहेगी।

कम क़ीमत पर ग्रे नहीं बेचने का मंथन कर रहे वीवर!

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सूरत
एमएसएमई की भँवर जाल में बीते दिनों बुरी तरह से प्रभावित होने के बाद कपड़ा बाजार में आगामी दिनों में साड़ी और ड्रेस सेगमेंट दोनों में ही अच्छे व्यापार की उम्मीद दिख रही है। इसके चलते यार्न की कीमतों में बीते एक सप्ताह में अलग-अलग क्वालिटी में एक से तीन रुपए दाम बढे हैं।विवर्स का मानना है कि आने वाले दिनों में यार्न की कीमत और बढ़ सकती है।इसलिए वह अब कम कीमत में ग्रे कपड़ा नहीं बेचने के मूड में है। टइस बारे में विवर्स ने आपस में मंथन करना शुरू कर दिया है और मैसेज कर एक दूसरे का मन टटोल रहे है।


कपड़ा बाजार के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीते दिनों एमएसएमई के चक्कर में कपड़ा व्यापारियों को लग्नसरा के बड़े हिस्से का व्यापार करवाना पड़ा था। नया वित्तीय वर्ष 2024-25 शुरू होने के बाद अन्य मंडियों मे फिर से डिमांड शुरू हुई हैं।कम क़ीमत से लेकर महंगी साड़ी और ड्रेस सेगमेंट दोनों में ही अच्छी डिमांड शुरू हुई है।कपड़ा उद्यमियों का कहना है कि एमएसएमई के नियमों मे 45 दिन में पेमेन्ट की शर्त के कारण ऑर्डर नहीं मिलने से बीते दिनों व्यापार ठप्प सा था। अब नया वित्तीय साल आने के बाद दूसरे राज्यों से व्यापारी कम, मध्यम और ज्यादा कीमत के साड़ी और ड्रेस मटेरियल के ऑर्डर बुक करा रहे है। बाज़ार की इस स्थिति को समझते हुए यार्न उत्पादकों ने भी यार्न की कीमत में बढ़ोतरी करना शुरू कर दी है। 1 अप्रेल से अब तक यार्न की कीमत में 1 से 3 रुपए दाम बढे हैं। दूसरी ओर होली के कारण बड़ी संख्या में अन्य राज्यों के श्रमिक अपने गांव की ओर लौट गए हैं।ऐसे में कपड़ों का उत्पादन भी बहुत कम हो रहा है।बीते दिनों एमएसएमई के चक्कर में व्यापारियों ने माल कम खरीदा था।इसलिए बाजार में ग्रे माल का स्टॉक भी उपलब्ध नहीं है।इन तमाम परिस्थितियों के चलते अब वीवर्स ने कम कीमत पर ग्रे नहीं बचने का फैसला किया है।

——मंदी में कम क़ीमत पर बेचने के बाद अब परिस्थिति सुधरने पर वीवर कर रहे मंथन

सचिन इंडस्ट्रियल कोऑपरेटिव सोसाइटी के सेक्रेटरी मयूर गोलवाला ने बताया कि एमएसएमई के कारण वीवर्स को बहुत नुकसान हुआ है। लग्नसरा का व्यापार बहुत बुरे ढंग से प्रभावित होने के कारण वीवर्स को नुकसान उठाना पड़ा।आगामी दिनों में लग्नसराका व्यापार अच्छा रहने की उम्मीद होने के कारण यार्न कारोबारी लगातार कीमत बढ़ाए जा रहे हैं। अब परिस्थिति सुधरने के कारण वीवर्स भी ग्रे की कीमत कम करके नहीं भेजेंगे। इस बारे में भी मंथन किया जा रहा है। इस बारे में सभी विवर्स को भी मैसेज भेज दिए गए हैं।आगामी दिनों में कारोबार अच्छा रहने की उम्मीद है।

वर्षों बाद मार्च में पेमेंट की लगी झड़ी: सुनील कुमार जैन


-एसजीटीटीए की बोर्ड मीटिंग में व्यापारियों ने की खुशी जाहिर
-एमएसएमई में सुधार की मुहिम जारी रखनी होगी: सचिन अग्रवाल

सूरत। साउथ गुजरात टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन (एसजीटीटीए) की बोर्ड मीटिंग में मार्च माह में कमजोर ग्राहकी के बाद भी पेमेंट की रफ्तार रहने पर खुशी जाहिर की गई। बोर्ड डायरेक्टर्स ने बताया कि मार्च के अंतिम पखवाड़े में व्यापारियों के पुराने-नए सभी तरह के पेमेंट बड़ी मात्रा में मिले, जिससे उनके चेहरे खिल उठे हैं।

एसजीटीटीए के बोर्ड रूम में 1 अप्रैल की शाम छह बजे हुई मासिक बोर्ड मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए संस्था के अध्यक्ष सुनील कुमार जैन ने नए वित्तीय वर्ष पर सभी के अच्छे स्वास्थ्य और व्यापारी की कामना की। उन्होंने कहा कि एमएसएमई की जनवरी से मार्च की यात्रा के दौरान व्यापार में ग्राहकी का थोड़ा नुकसान जरूर हुआ। परन्तु गुड्स रिटर्न का डर भ्रामक साबित हुआ। आशंका के विपरीत गुड्स रिटर्न बहुत अधिक नहीं आया है। पेमेंट की स्थिति पर उन्होंने कहा कि मार्च के तीसरे और चौथे सप्ताह में पेमेंट की बाढ़ सी आ गई। फरवरी और मार्च में रिटेल बाजार में ग्राहकी कमजोर रही है। बावजूद इसके पेमेंट की जो रफ्तार देखने को मिली वह आशा से भी अधिक है। एमएसएमई के प्रभाव के संबंध में उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में व्यापार अनुमानतः 25 पर्सेंट कम होगा। होलसेलर से लेकर रिटेलर तक अब जरूरत के हिसाब से कपड़ा खरीदता नजर आ रहा है। हर स्तर पर संभलकर व्यापार होने लगा है। इस कारण से व्यापार थोड़ा कम होगा। मगर स्वच्छ होगा। चुनाव के बाद नई सरकार के गठन के साथ ही एमएसएमई के सुधार के लिए एसजीटीटीए अपनी पूरी ताकत लगाएगी। जब भी आवश्यक होगा संस्था संबंधित मंत्रालयों के संपर्क में रहेगी। महामंत्री सचिन अग्रवाल ने कहा कि एमएसएमई में सुधार की मुहिम संस्था को जारी रखनी होगी। ट्रेडर्स भाइयों ने एमएसएमई के मद्देनजर अपनी कैटेगरी बदली है उसकी स्थिति डिपार्टमेंट की ओर से अभी क्लियर नहीं है। यह एक बड़ा सवाल है। रिफरेंस एप की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से हमें इसका प्रचार प्रसार करने की आवश्यकता है। सूरत के अच्छे ट्रेडर्स भाई, एजेंट और आढ़तिया साथ ही दिसावर के व्यापारी हमें वीडियो उपलब्थ कराते हैं तो इसके सुखद परिणाम सामने आएंगे। मीटिंग में आशीष मल्होत्रा, संतोष माखरिया, राम खंडेलवाल, छीतरमल जैन, प्रदीप केजरीवाल, सुदर्शन मातलहेलिया ने भी अपने विचार रखे। अंत में मीटिंग का समन्वय कर रहे सुनील मित्तल ने भी अपनी बात रखी और सभी का आभार व्यक्त किया।

કાપડ માર્કેટના ટેમ્પો ચાલક કામદારોના પ્રશ્નોના નિરાકરણ માટે બેઠક યોજાઈ

રવિવારે રીંગરોડ કમેલા દરવાજા ખાતે સુરત શહેર ટેમ્પો ઓનર ડ્રાઈવર વેલ્ફેર એસોસિએશન, સુરત જિલ્લા ટેક્સટાઈલ માર્કેટિંગ ટ્રાન્સપોર્ટ લેબર યુનિયન અને મીલ ટેમ્પો ડિલિવરી કોન્ટ્રાક્ટર એસોસિએશન સુરતના સંયુક્ત નેજા હેઠળ એક બેઠકનું આયોજન કરવામાં આવ્યું હતું. બેઠકમાં માર્કેટમાં પાર્કિંગની સમસ્યા સહિત અન્ય સમસ્યાઓ અંગે વિસ્તૃત ચર્ચા કરવામાં આવી હતી. મિટિંગમાં હાજર ટેમ્પો એસોસિએશનના પ્રમુખ શ્રવણસિંહ ઠાકુરે જણાવ્યું હતું કે, માર્કેટમાં ગ્રે કપડાની ડિલિવરી કરતા કામદારોએ ગ્રે કાપડના સેમ્પલ બતાવા માટે પહેલા દુકાનમાં જવું પડે છે અને બાદમાં પાર્કિંગમાં પાર્ક રહેતા મીલના વાહનોને તથા વેપારીના ગોડાઉનમાં ડિલિવરી આપવાની હોય છે. આવી સ્થિતિમાં ટેમ્પો ચાલકને ગ્રેની ડિલિવરી માટે ડબલ ધક્કો ખાવો પડી રહ્યો છે. યુનિયનના પ્રમુખ ઉમાશંકર મિશ્રાએ જણાવ્યું હતું કે માર્કેટમાં પ્રથમ એક કલાક મફત પાર્કિંગ આપવાના સુપ્રીમ કોર્ટના આદેશનું ખુલ્લેઆમ ઉલ્લંઘન થઈ રહ્યો છે અને માર્કેટ મેનેજમેન્ટ દ્વારા ટેમ્પો ચાલકો પાસેથી મનસ્વી રીતે પાર્કિંગ ફી વસૂલ કરવામાં આવી રહી છે. મીલ ટેમ્પો ડિલિવર કોન્ટ્રાક્ટર એસોસિએશનના પ્રમુખ રાજેન્દ્ર ઉપાધ્યાયે જણાવ્યું હતું કે માર્કેટ વિસ્તારમાં આવેલ મ્યુનિસિપલ કોર્પોરેશનનાં પે એન્ડ પાર્કનાં કોન્ટ્રાક્ટરો મનસ્વી રીતે પાર્કિંગ ફી વસૂલી રહ્યા છે અને એક જ પાર્કિંગમાં અલગ-અલગ લોકોને ગેરકાયદેસર પેટા કોન્ટ્રાક્ટ આપવામાં આવ્યો છે જેના કારણે ટેમ્પો ચાલકો પાસેથી એક જ પાર્કિંગમાં અલગ- અલગ પાર્કિંગ ફી વસૂલવામાં આવી છે. આ સાથે પે એન્ડ પાર્કનાં કોન્ટ્રાક્ટર દ્વારા તેમને ફાળવવામાં આવેલ પાર્કિંગ એરિયાની બહાર રોડ પર વાહનો પાર્ક કરાવીને ગેરકાયદેસર રીતે પાર્કિંગ ફી વસૂલવામાં આવી રહી છે જેના કારણે ટેમ્પો ચાલકોને ટ્રાફિક જામનો સામનો કરવો પડી રહ્યો છે. આગામી સમયમાં ઉપરોક્ત તમામ સમસ્યાઓ અંગે આંદોલન કરવામાં આવશે. મીટીંગમાં ટેમ્પો ચાલક કામદારોને ડ્રાઈવીંગ કરતી વખતે ડ્રાઈવીંગ લાયસન્સ, પીયુસી, ઈન્સ્યોરન્સ સહિતના તમામ જરૂરી દસ્તાવેજો સાથે રાખવા આહવાન કરવામાં આવ્યું હતું. આ પ્રસંગે મોટી સંખ્યામાં કામદારો અને ટેમ્પો ચાલકો ઉપસ્થિત રહ્યા હતા.

नई टैक्सटाइल पॉलिसी मे 30 प्रतिशत कैपिटल तथा 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी की माँग


अन्य राज्यों से बेहतर टैक्सटाइल पॉलिसी बनाने के लिए कपड़ा उद्यमियों की गुहार

सूरत
गुजरात की टेक्सटाइल पॉलिसी 31 दिसंबर को समाप्त हो गई है।ऐसे में कपड़ा उद्यमियों को नई टेक्सटाइल पॉलिसी से कई उम्मीदें हैं।कपड़ा उद्योगों का मानना है कि अन्य राज्यों में टेक्सटाइल पॉलिसी में कपड़ा उद्यमियों के लिए कई राहत होने के चलते वहां पर कपड़ा उद्योग का विकास तेजी से हो रहा है।यदि गुजरात की टेक्सटाइल पॉलिसी में कुछ नई चीजों को नहीं शामिल किया गया तो यहां से बड़े पैमाने पर कपड़ा उद्योग का पलायन हो सकता है।इसलिए चेंबर ऑफ कॉमर्स तथा कपड़ा उद्योग के कई संगठनों ने राज्य सरकार से टेक्सटाइल पॉलिसी में कई प्रकार की सब्सिडी की मांग की है।

  • चैम्बर तथा कपड़ा संगठन के प्रतिनिधी मिले अधिकारियों से
    गत सोमवार को राज्य सरकार के उद्योग और खनिज विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी एस. जे हैदर वित्त मंत्रालय के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी जेपी गुप्ता ने नई टेक्सटाइल पॉलिसी के बारे में चर्चा करने के लिए तमाम स्टेकहोल्डर को बुलाया था। जिसमे की चेंबर ऑफ कॉमर्स से पूर्व प्रमुख आशिष गुजराती तथा किरण ठुम्मर और फिआस्वी के अध्यक्ष भरत गांधी तथा फोगवा के प्रमुख अशोक जीरावाला फोस्टा के प्रमुख कैलाश हकीम आदि उपस्थित रहे। कपड़ा उद्यमियों का कहना था कि गुजरात की पुरानी टेक्सटाइल पॉलिसी में कपड़ा उद्योग के लिए जो मदद है उसे यथावत रखना चाहिए। लेकिन गुजरात अन्य राज्यों की तुलना में पीछे ना रह जाए इसलिए कपड़ा उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए अन्य नई चीज भी इसमें शामिल करना चाहिए। जैसे की 30% कैपिटल सब्सिडी साथ 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी एवम आईटी और एचटी बिजली कनेक्शन के लिए क्रमशः तो और ₹3 प्रति यूनिट इलेक्ट्रिक सब्सिडी होनी चाहिए।
  • ब्लैकआउट पीरियड नहीं रह सके इस पर भी ज़ोर
    अलावा कपड़ा उद्यमियों ने यह भी कहा कि 31 दिसंबर को समाप्त हो रही टेक्सटाइल पॉलिसी का अमल 1 जनवरी 2024 से किया जाना चाहिए ताकि कोई ब्लैकआउट पीरियड नहीं रह सके। सूरत पॉलिएस्टर कपड़ों का सबसे बड़ा उत्पादक शहर है। सूरत में बने कपड़े देश विदेश में बिकते हैं महाराष्ट्र राज्य सरकार ने भी टेक्सटाइल पॉलिसी के विकास के लिए टेक्सटाइल पॉलिसी बीते दिनों में घोषित की थी। जिसमे की कपड़ा उद्यमियों के लिए कई छूट दी गई है।इसलिए कपड़ा जमीन चाहते हैं कि गुजरात की टेक्सटाइल पॉलिसी में भी कई छूट दी जाए जिससे कि गुजरात के कपड़ा उद्यमी महाराष्ट्र की ओर में पलायन नहीं हो।

मार्च अंत का असर- जीएसटी वसूली के लिए विभाग ने भेजे नोटिस

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सूरत
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2023-24 समाप्त होने में कुछ ही दिन शेष बचे हैं।ऐसे में आयकर तथा जीएसटी विभाग में वसूली तेज शुरू कर दी है। हाल में ही आयकर विभाग ने कपड़ा कारोबारी, डॉक्टर तथा सिक्योरिटी एजेन्सी पर सर्च की कार्रवाई की थी। इसके बाद अब जीएसटी विभाग ने जिन करदाताओं ने अपनी दुकान या व्यापार बंद करके अन्य स्थानों पर शिफ्ट कर दिया है या बिल्कुल कारोबार बंद कर दिया है लेकिन जीएसटी नहीं चुकाया है। ऐसे व्यापारियों को ट्रेस करके डिपार्मेंट नोटिस भेज रहा है। जीएसटी विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जीएसटी डिपार्टमेंट के पास जो इन्टेलिजन्स सिस्टम मौजूद है। उसे डिपार्टमेंट को करदाता के बारे में लगातार जानकारी मिलते रहती है। जिन करदाता का पेमेंट समय पर नहीं मिल रहा है या जो रिटर्न समय पर नहीं फाइल कर रहे हैं। ऐसे तमाम व्यापारियों को ट्रेस किया जा रहा है और उन्हें नोटिस भेज कर रिटर्न फाइल करने तथा टैक्स चुकाने के लिए कहा जा रहा है।हालांकि डिपार्टमेंट के सामने दिक़्क़त यह भी है कि कई व्यापारियों ने दुकान बंद तो कर दी है अब उन्हें ढूंढ पाना डिपार्टमेंट के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा हो रहा है। हालांकि कई व्यापारी ऐसे भी हैं कि जिन्होंने सिर्फ अपना स्थान बदला है लेकिन व्यापार चालू है। ऐसे व्यापारियों को डिपार्मेंट कई माध्यमों से ढूंढने का प्रयास कर रहा है। उल्लेखनीय है कि नियम के अनुसार यदि किसी व्यापारी को अपना व्यापार बंद करना हो तो उसे जीएसटी विभाग को जानकारी देकर साथ ही अपने जीएसटी संबंधित तमाम जवाबदारी चुकाने के बाद व्यापार बंद करना चाहिए नहीं तो जीएसटी डिपार्टमेंट की ओर से रिटर्न फाइल करने के लिए नोटिस आ सकते हैं।
बडी संख्या में नोटिस वापिस आए
जीएसटी विभाग की ओर से जो नोटिस भेजे जा रहे हैं। इनमें से ज़्यादातर वर्ष 2018-19 या 2019-20 के हैं। इन दिनों कोरोना काल के समय कई व्यापारी रिटर्न नहीं कर पाए थे। बड़ी संख्या में व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर दी थी।विभाग की ओर से जो नोटिस भेजे गए हैं।उसमें से बड़ी संख्या में वापिस आ रहे हैं अब विभाग ऐसे व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन रद करने की कार्रवाई आगे बढ़ा सकता है।

एडवांस टैक्स कम चुकाने वालों पर आयकर की पैनी नज़र
आयकर विभाग ने जो करदाता एडवांस टैक्स कम भर रहे हैं या सेल्फ़ एसेसमेन्ट टैक्स कम भर रहे हैं उन पर पैनी नज़र रखी है।आयकर विभाग ने बीते दिनों इस बारे में कई करदाताओ को पत्र भेजकर इस बारे में जानकारी भी माँगी थी।

ચેમ્બર ઓફ કોમર્સ દ્વારા સુરતને સસ્ટેનેબલ ટેક્ષ્ટાઇલ હબ બનાવવા માટે મિટીંગ યોજાઇ

સુરતઃ ધી સધર્ન ગુજરાત ચેમ્બર ઓફ કોમર્સ એન્ડ ઈન્ડસ્ટ્રી દ્વારા શુક્રવાર, તા. ૦૧ માર્ચ ર૦ર૪ના રોજ સાંજે ૪:૦૦ કલાકે સંહતિ, સરસાણા, સુરત ખાતે સેન્ટર ફોર એન્વાયરમેન્ટ એજ્યુકેશન (CEE), સાઉથ ગુજરાત ટેક્ષ્ટાઈલ પ્રોસેસર્સ એસોસિએશન (SGTPA), ધી સધર્ન ગુજરાત ચેમ્બર ઓફ કોમર્સ એન્ડ ઈન્ડસ્ટ્રી (SGCCI) અને યુનાઈટેડ નેશન્સ એન્વાયરમેન્ટ પ્રોગ્રામ (UNEP)ની ‘સુરતને સસ્ટેનેબલ ટેક્ષ્ટાઇલ હબ બનાવવા’ના વિષય પર સંયુક્ત મિટીંગ મળી હતી. UNEP દ્વારા સુરત ટેક્ષ્ટાઈલ ક્લસ્ટરના સસ્ટેનેબિલીટી પ્રોજેકટને વધુ ચાર વર્ષ માટે લંબાવવામાં આવ્યો છે ત્યારે આ પ્રોજેકટ અંતર્ગત કયા – કયા લક્ષ્યો પ્રાપ્ત કરી શકાય અને એના માટે કઇ કઇ કામગીરી કરવાની રહેશે તે અંગે આ મિટીંગમાં વિસ્તૃત ચર્ચા વિચારણા કરવામાં આવી હતી.

ચેમ્બર ઓફ કોમર્સના પ્રમુખ રમેશ વઘાસિયાએ મિટીંગમાં સર્વેને આવકાર્યા હતા. તેમણે સ્વાગત પ્રવચન કરતા જણાવ્યું હતું કે, ‘હાલમાં વિશ્વના દરેક ખૂણે પ્રદૂષણ ફેલાયું છે. એક જવાબદાર નાગરિક તરીકે આપણી ફરજ છે કે, પર્યાવરણને બચાવવાની દિશામાં મહત્વના પગલાં લઈએ. નવી પેઢીને પ્રદૂષણ રહિત જીવન આપવાની દિશામાં તમામ ઉદ્યોગકારો અને નાગરિકોએ સાથે મળીને કાર્ય કરવાનું છે’ તેવી તેમણે અપીલ કરી હતી.

તેમણે મિશન ૮૪ અંર્તગત ચેમ્બર અને યુ.એસ. ગ્રીન બિલ્ડીંગ કાઉન્સિલની વચ્ચે ભારતને વર્ષ ર૦૭૦ સુધીમાં નેટ ઝીરો એમિશન બનાવવા માટે એમઓયુ સાઈન કરવામાં આવ્યા છે તેની માહિતી આપતા જણાવ્યું હતું કે, ઝીરો એમિશન–ર૦૭૦ અંર્તગત દક્ષિણ ગુજરાતની વિવિધ ઈન્ડસ્ટ્રીમાં પર્યાવરણને વધુ નુકશાન ન થાય તે દિશામાં કાર્યક્રમો કરવામાં આવશે. સાથે જ વિવિધ ટેકનોલોજી વિશે ઉદ્યોગકારોને માહિતગાર કરાશે.

યુનાઈટેડ નેશન્સ એન્વાયરમેન્ટ પ્રોગ્રામ (UNEP)ના પ્રોગ્રામ ઓફિસર ક્લાઉડીયા જિઆકોવેલીએ જણાવ્યું હતું કે, ‘UNEP દ્વારા સુરત ટેક્ષ્ટાઈલ ક્લસ્ટર સસ્ટેનેબિલીટી પ્રોજેકટને વધુ ચાર વર્ષ માટે લંબાવવામાં આવ્યો છે, જે ડિસેમ્બર ર૦ર૩થી સપ્ટેમ્બર ર૦ર૭ સુધીનો છે. જેમાં ટેક્ષ્ટાઈલ મંત્રાલય, ભારત સરકાર અને UNEP સાથે મળીને કાર્ય કરે છે અને CEE અમદાવાદને અમલીકરણની જવાબદારી આપવામાં આવી છે. જેમાં SGCCI અને SGTPA સહભાગી થઈ કાર્ય કરી રહ્યા છે.’

સુરતને સસ્ટેનેબલ ટેક્ષ્ટાઇલ હબ બનાવવા માટે તેમણે 8Rનો કોન્સેપ્ટ ઉદ્યોગ સાહસિકોને સમજાવ્યો હતો. 8R એટલે રિફયુઝ, રિડયુસ, રિયુઝ, રિપેર, રિફર્બિશ, રિમેન્યુફેકચર, રિપર્પઝ અને રિસાયકલ. જેનો ઉપયોગ કરી સુરતને સસ્ટેનેબલ ટેક્ષ્ટાઇલ હબ બનાવી શકાશે.

તેમણે ઉદ્યોગકારોને જણાવ્યું હતું કે, યુરોપમાં આગામી દિવસોમાં પ્રોડકટ એન્વાયરમેન્ટ ફૂટપ્રિન્ટના કોમ્પ્લાયન્સ ફરજીયાત થવાના છે, આથી યુરોપમાં કોઈપણ પ્રોડકટ એક્ષ્પોર્ટ કરવામાં આવશે તો તેમાં પ્રોડકટ એન્વાયરમેન્ટ ફૂટપ્રિન્ટની માહિતી ફરજિયાત રહેશે. ભવિષ્યમાં યુરોપમાં એક્ષ્પોર્ટ થતાં પ્રોડકટની સ્પર્ધાત્મકતા તેની એન્વાયરમેન્ટ ફૂટપ્રિન્ટ કેટલી છે? તેના આધારે થશે.

સુરત ટેક્ષ્ટાઈલ ક્લસ્ટર સસ્ટેનેબિલિટી પ્રોજેકટના અંતર્ગત UNEP દ્વારા આના કોમ્પ્લાયન્સ અંગે સુરતના ટેક્ષ્ટાઈલ ઉદ્યોગકારોને માહિતગાર કરી તેઓના પ્રોડકટ યુરોપના એન્વાયરમેન્ટ ફૂટપ્રિન્ટના માપદંડ અનુસાર બને તે અંગેની જરૂરી સમજણ આપવામાં આવશે. આ સંદર્ભમાં જે કાર્યક્રમો અમલી કરવામાં આવશે તેમાં નાણાંકીય જરૂરિયાત હોય તો ઈન્ટરનેશનલ ફાયનાન્સ કોર્પોરેશન પાસેથી પણ ભંડોળ મેળવવામાં આવશે. જેમાં ટેક્ષ્ટાઈલ મંત્રાલય ભારત સરકાર મદદરૂપ થશે તેમ તેમણે જણાવ્યું હતું.

સાઉથ ગુજરાત ટેક્ષ્ટાઈલ પ્રોસેસર્સ એસોસિએશનના પ્રમુખ જિતેન્દ્ર વખારિયાએ જણાવ્યું હતું કે, ‘ભારતમાં ટેક્ષ્ટાઈલ ક્ષેત્રે કાપડ બનાવવામાં સુએજ ટ્રીટેડ વોટરનો ઉપયોગ કરનાર પ્રથમ શહેર સુરત છે. શહેરના કેટલાક વિસ્તારોમાં જર્મન ટેકનોલોજીથી ટેક્ષ્ટાઈલ ક્ષેત્રના સોલીડ વેસ્ટનું નિરાકરણ કરવાની પ્રક્રિયા હાથ ધરાઈ છે.

આ મિટીંગમાં ચર્ચા–વિચારણાના અંતે શહેરમાં આગામી ચાર વર્ષમાં ટેક્ષ્ટાઈલ ઈન્ડસ્ટ્રીમાં ઉપયોગમાં લેવામાં આવતા કુલ પાણીના પ૦ ટકા પાણી ટ્રીટ કરી રીયુઝડ વોટરનો ઉપયોગ કરવામાં આવશે. સુરત એમએમએફ સેન્ટર હોવાના કારણે સકર્યુલારિટીને વેગ આપવા માટે કાપડનો પુનઃ વપરાશ વધારવા માટે સુરત ટેક્ષ્ટાઈલ ક્લસ્ટરમાં વિવિધ જગ્યાએ મોટા ક્લોથ્સ કલેકશન સેન્ટર ઉભા કરવામાં આવશે. જ્યારે ગ્રીન એનર્જી ક્ષેત્રે આગામી ચાર વર્ષ દરમિયાન ટેક્ષ્ટાઈલ ઈન્ડ્‌સ્ટ્રીમાં કુલ વીજળીના ઉપયોગમાંથી પ૦ ટકા વીજળીનો વપરાશ રિન્યુએબલ એનર્જી થકી કરવાનો લક્ષ્યાંક રાખવામાં આવ્યો છે.

સમગ્ર મિટીંગનું સંચાલન સેન્ટર ફોર એન્વાયરમેન્ટ એજ્યુકેશનના સિનિયર પ્રોગ્રામ ડાયરેક્‌ટર તુષાર જાનીએ કર્યું હતું. આ પ્રસંગે ચેમ્બરના ઉપ પ્રમુખ વિજય મેવાવાલા, તત્કાલિન પૂર્વ પ્રમુખ હિમાંશુ બોડાવાલા, માનદ્‌ ખજાનચી કિરણ ઠુમ્મર, ચેમ્બરની એન્વાયરમેન્ટ કમિટીના એડવાઈઝર વત્સલ નાયક અને ટેક્ષ્ટાઇલ ઉદ્યોગકારો ઉપસ્થિત રહયા હતા. મિટીંગના અંતે UNEPના પ્રોગ્રામ ઓફિસર ક્લાઉડીયા જિઆકોવેલીએ ઉદ્યોગકારો સાથે વાર્તાલાપ કરી રોડમેપ નક્કી કર્યો, જેનો રિપોર્ટ મંત્રાલયને આપવામાં આવશે. ચેમ્બર ઓફ કોમર્સના પૂર્વ પ્રમુખ આશીષ ગુજરાતીએ ઉપસ્થિત સર્વેનો આભાર માની મિટીંગનું સમાપન કર્યું હતું.

बिल लावो इनाम पावो वाली स्कीम से सरकार का निशाना दूर तक!

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सरकार द्ववारा एक स्किम चलाई गई थी और चल भी रही हैं बिल लावो इनाम पावो इस स्कीम के जरिये भी जीएसटी डिपार्टमेंट आपके बिल की किस प्रकार से जांच करता है और फिर कारण बतावो नोटिस के जरिये जबाब भी पूछता है।यानी कि ये उन टैक्सपेयर्स के लिए है जो जीएसटी रूल्स के मुताबिक B2C के इनवॉइस नही बनाते हैं।

जीएसटी रूल्स के मुताबिक 50 हजार से नीचे के बिल में इतनी डिटेल्स नही देनी होगी पर अगर आप B2C का कोई भी बिल 50 हजार से ऊपर बनाते हो तो उस बिल पर खरीददार का नाम, एड्र्स,स्टेट लिखना अनिवार्य है पर लापरवाही व छोटी सी गलती टैक्सपेयर्स कर बैठते हैं जिसकी वजह से फस जाते है अब होता ये की कोई भी परचेजर आपसे बिल लिया उसने सरकार द्ववारा चलाई गई।

स्किम के तहत इनाम पाने के लिए उसे अपलोड कर दिया कारण की सरकार लॉटरी सिस्टम के आधार पर इनाम जो दे रही हैं।और उधर आपका डेटा सरकार के पास चला गया।अब जब आप अपना जीएसटी आर 1 फ़ाइल करते है तब सरकार जीएसटी नम्बर के आधार पर पोट्रल के द्ववारा ये चेक हो जाता हैं कि एक जीएसटी नम्बर पर एक महीने में जितने बिल B2C के अपलोड हुई है क्या व आपके द्ववारा भेजे गए जीएसटी आर 1 में उतने बिल आ रहे है या नही।

इन सभी के आधार पर जीएसटी डिपार्टमेंट पहले भी कई तरीकों के आधार पर फेंक इनवॉइस व गलत अपलोड बिलो की जांच करता रहा हैं ठीक उसी तरह यहा भी चोरी कहा हो रही हैं ओर आपसे जबाब भी मांग सकता है।कुलमिलाकर सरकार को भी स्किम निकालती है उसमें भी अपना ही काम निकालती है।

हेडिंग हीरा उद्योग का डाटाबेज बनाने की कवायतः राज्य सरकार करेगी सर्वे


सूरत
दुनिया भर में हीरा उद्योग के तौर पर डंका बजाने वाले सूरत शहर में हीरा उद्योग से जुड़ी तमाम जानकारियो का डाटाबेज बनाने के लिए राज्य सरकार ने सर्वे करने का फ़ैसला किया है।सर्वे के माध्यम से राज्य सरकार हीरा उद्योग पर निर्भर लोग, उनकी आर्थिक परिस्थिति सहित कई जानकारियाँ एकत्रित करेगी और भविष्य में यदि किसी प्रकार की आवश्यकता उत्पन्न हुई को रिपोर्ट के आधार पर फ़ैसला लिए जाएगा। ऐसा माना जा रहा है।
हीरा उद्योग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सूरत में नेचरल डायमंड और लैबग्रान डायमंड उद्योग दोनों ही बड़े पैमाने पर है। दोनों में कुल मिलाकर लगभग 7 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मिलता है। सूरत में तैयार होने वाले हीरे अमेरिका,यूरोप,जापान हांगकांग,चीन देशो मे निर्यात किए जाते हैं। सूरत मे नेचरल हीरो के साथ अब लैबग्रान हीरा उद्योग का भी कारोबार बढ़ा है। मंदी के दिनों में लैबग्रान हीरा उद्योग ने लाखों लोगों को रोज़ी रोटी दी थी। इतने बड़े पैमाने पर उद्योग फ़ैला होने के बाद वे भी राज्य सरकार के पास ठोस जानकारी नही थी।


राज्य सरकार की पॉलिसी बनाने में मिलेगी मदद
हीरा उद्योग से जुड़े श्रमिको के बारे मे जानकारी के अभाव में वर्ष 2008 में आर्थिक मंदी के समय वे यहाँ उद्योग से जुड़े लोगों को आर्थिक मदद करने मे बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था लेकिन अब राज्य सरकार हीरा उद्योग की जानकारी एकत्रित करना चाहती है जिसके चलते बीते दिनों राज्य सरकार के अधिकारी सूरत आए थे और 35 कंपनियों के एचआर डिपार्टमेंट के अधिकारी तथा डायमंड एसोसिएशन के पदाधिकारियों से मीटिंग की। मीटिंग के दौरान उन्होंने प्राथमिक जानकारी एकत्रित करने का प्रयास किया।

आगामी दिनों में सर्वे शुरू होने की उम्मीद
सूरत में 3000 से अधिक छोटे बड़े हीरा के कारख़ाने हैं। राज्य सरकार हीरा उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या तथा उनकी जीवनशैली के बारे में अध्ययन करना चाहती है। इसे ध्यान में रखते हुए बीते दिनों में राज्य सरकार के अधिकारी डायमंड कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट के अधिकारियों से मिले थे आगामी दिनों में सर्वे शुरू होने की संभावना है।
जगदीश खूँट, प्रमुख, सूरत डायमंड एसोसिएशन
हीरा उद्यमियों के लिए शुरू करने चाहिए योजनाएँ
हीरा उद्योग का सर्वे करने के बाद राज्य सरकार को हीरा उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों के विकास के लिए योजना शुरू करने चाहिए।हमने इस बारे में कई बार राज्य सरकार से गुहार लगायी है।जिसके चलते राज्य सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है।इस सर्वे से हीरा उद्योग के सभी लोगों को लाभ होगा।
भावेश टांक, प्रमुख, सूरत डायमंड वर्कर यूनियन