डीटीसी की साइट मे रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रहने से हीरा उद्योग को मिली राहत!


सूरत
दुनिया मे रफ़ हीरों का व्यापार करने वाले सबसे बड़ी डायमंड ट्रेडिंग कंपनी ने अप्रैल महीने मे रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रखने से हीरा उद्यमियों में राहत की साँस ली है। बीते कई दिनों से हीरा उद्योग में डिमांड की कमी के कारण रफ हीरो की क़ीमत और तैयार हीरो की क़ीमत में अंतर बढ़ता जा रहा था। ऐसे में डीटीसी कंपनी यदि रफ हीरो की क़ीमत बढ़ा ती या घटाती तो बाज़ार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका थी। इसे देखते हुए डीटीसी कंपनी ने व्यापार हित मे यह फ़ैसला किया है।

हीरा उद्योग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 1 साल से अधिक लंबे समय से हीरा उद्योग में परिस्थिति अच्छी नहीं है।अमेरिका तथा यूरोप जैसे देशों में लोगों की ओर से ख़रीद घटने के कारण कट और पॉलिश्ड हीरो का निर्यात घटते जा रहा है। हीरा उद्योग को इस परिस्थिति से उभारने के लिए हीरा उद्यमी लगातार प्रयास कर रहे हैं।बीते दिनों में कट और पॉलिश्ड हीरो की डिमांड बिलकुल घट जाने के कारण क़ीमत में भी गिरावट आ गई थी। इससे हीरा उद्यमियों को नुक़सान उठाना पड़ा था। कई हीरा उद्यमियों ने ज़्यादा क़ीमत मे रफ हीरे ख़रीदे थे। उन्हें कम क़ीमत मे तैयार हीरे बेचने पड़े। हीरा उद्योग में उतार-चढाव के बीच रफ हीरो की क़ीमत भी बड़े मायने रखती है।हीरा उद्यमियों की परिस्थिति को समझते हुए रफ डायमंड कंपनियो ने भी रफ हीरो की क़ीमत में कोई ज़्यादा उतार चढ़ाव नहीं कर रही है। अप्रैल महीने मे डीटीसी कंपनी ने जारी की साइट में रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रखी है। इससे पहले मार्च महीने में भी रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रखी थी।
जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन विजय मंगुकिया ने बताया कि डीटीसी की साइट में कच्चे हीरो की क़ीमत में बढ़ोतरी या कमी नहीं आयी है। जो कि हीरा उद्यमियों के लिए अच्छी बात है। यदि रफ़ हीरो की क़ीमत घट जाती तो लोग तैयार हीरा भी कम क़ीमत पर माँगने लगते हैं और वह रफ हीरे की क़ीमत बढ़ी तो हीरा उद्यमियों को ऊँची क़ीमत बार रफ़ हीरे ख़रीदना पड़ता है। दूसरी ओर बाज़ार में पॉलिश्ड हीरो की क़ीमत नहीं बढ़ी है।ऐसे में महँगे रफ़ हीरे ख़रीदने से हीरा उद्यमियों को नुक़सान हो सकता है। रफ हीरो की क़ीमत स्थिर रहने से हीरा उद्योग के लिए परिस्थिति संतुलित रहेगी।

शहर मे पीपीपी मॉडल से बनाए जाएँगे और 50 चार्जिंग स्टेशन

सूरत
सूरत महानगर पालिका में ने शहर भर में इलेक्ट्रिक फ़ोर व्हीलर को चार्ज करने के लिए 50 इलेक्ट्रिक चार्ज स्टेशन बनाए हैं लेकिन इनका उपयोग बहुत कम होने के कारण अब मनपा ने आगामी दोनों में पीपीपी मॉडल पर चार्जर स्टेशन बनाने का फैसला किया है।इस चार्जिंग स्टेशन में फोर व्हीलर ही नहीं बल्कि टू व्हीलर और थ्री व्हीलर के लिए भी व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल सभी जोन में पर्याप्त जगह के लिए तलाश जारी है।जगह की व्यवस्था होने के बाद आगे का काम शुरू किया जाएगा।
सूरत महानगर पालिका के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर में 30000 इलेक्ट्रिक मोपेड दौड़ रहे हैं।इसके अलावा इलेक्ट्रिक कर की खरीदी भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देन के लिए 3 साल पहले सूरत महानगर पालिका ने शहर में 50 स्थान पर इलेक्ट्रिक चार्ज स्टेशन बनाए थे, लेकिन कई करणों से इनका उपयोग बहुत कम हो रहा है। इस साल सिर्फ 9000 लोगों ने चार्जर स्टेशन का उपयोग किया। पालिका फिलहाल ग्राहकों से 16 रुपए 52 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से चार्जिंग की सुविधा दे रही है लेकिन इसके बावजूद लोगों में चार्जिंग स्टेशन को लेकर नीरस है।

—कई कारणों से लोग नहीं आते चार्जर स्टेशन
कई चार्जिंग स्टेशन ऐसे स्थान पर बनाए गए हैं जहां ट्राफिक की समस्या के साथ आने जाने के लिए भी व्यवस्था ठीक से नहीं है। डेढ़ साल में 9000 लोगों ने 26015 बार गाड़ी चार्ज कराई है। जिसके माध्यम से मनपा को 34 लाख की आय हुई है। वेसू के चार्जिंग स्टेशन में बड़ी संख्या में लोग आते हैं जबकि दिल्ली गेट स्थित चार्जिंग स्टेशन को अच्छा रिस्पांस नहीं मिला है।इस स्थिति को समझते हुए पालिका ने आप पीपीपी मॉडल पर शहर में अन्य 50 चार्जिंग स्टेशन बनाने का फैसला किया है जिस्म की टू व्हीलर और थ्री व्हीलर भी चार्ज किया जा सकेंगे।एक ही सॉकेट से सभी कंपनियों के बाइक रिचार्ज किया जा सके इसकी भी व्यवस्था बनाने की कोशिश की जा रही है।फिलहाल इसके लिए शहर के सभी जोन में पर्याप्त जगह के लिए तलाश जारी है आगे की कार्यवाही जमीन मिलने के बाद की जाएगी।

वर्षों बाद मार्च में पेमेंट की लगी झड़ी: सुनील कुमार जैन


-एसजीटीटीए की बोर्ड मीटिंग में व्यापारियों ने की खुशी जाहिर
-एमएसएमई में सुधार की मुहिम जारी रखनी होगी: सचिन अग्रवाल

सूरत। साउथ गुजरात टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन (एसजीटीटीए) की बोर्ड मीटिंग में मार्च माह में कमजोर ग्राहकी के बाद भी पेमेंट की रफ्तार रहने पर खुशी जाहिर की गई। बोर्ड डायरेक्टर्स ने बताया कि मार्च के अंतिम पखवाड़े में व्यापारियों के पुराने-नए सभी तरह के पेमेंट बड़ी मात्रा में मिले, जिससे उनके चेहरे खिल उठे हैं।

एसजीटीटीए के बोर्ड रूम में 1 अप्रैल की शाम छह बजे हुई मासिक बोर्ड मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए संस्था के अध्यक्ष सुनील कुमार जैन ने नए वित्तीय वर्ष पर सभी के अच्छे स्वास्थ्य और व्यापारी की कामना की। उन्होंने कहा कि एमएसएमई की जनवरी से मार्च की यात्रा के दौरान व्यापार में ग्राहकी का थोड़ा नुकसान जरूर हुआ। परन्तु गुड्स रिटर्न का डर भ्रामक साबित हुआ। आशंका के विपरीत गुड्स रिटर्न बहुत अधिक नहीं आया है। पेमेंट की स्थिति पर उन्होंने कहा कि मार्च के तीसरे और चौथे सप्ताह में पेमेंट की बाढ़ सी आ गई। फरवरी और मार्च में रिटेल बाजार में ग्राहकी कमजोर रही है। बावजूद इसके पेमेंट की जो रफ्तार देखने को मिली वह आशा से भी अधिक है। एमएसएमई के प्रभाव के संबंध में उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में व्यापार अनुमानतः 25 पर्सेंट कम होगा। होलसेलर से लेकर रिटेलर तक अब जरूरत के हिसाब से कपड़ा खरीदता नजर आ रहा है। हर स्तर पर संभलकर व्यापार होने लगा है। इस कारण से व्यापार थोड़ा कम होगा। मगर स्वच्छ होगा। चुनाव के बाद नई सरकार के गठन के साथ ही एमएसएमई के सुधार के लिए एसजीटीटीए अपनी पूरी ताकत लगाएगी। जब भी आवश्यक होगा संस्था संबंधित मंत्रालयों के संपर्क में रहेगी। महामंत्री सचिन अग्रवाल ने कहा कि एमएसएमई में सुधार की मुहिम संस्था को जारी रखनी होगी। ट्रेडर्स भाइयों ने एमएसएमई के मद्देनजर अपनी कैटेगरी बदली है उसकी स्थिति डिपार्टमेंट की ओर से अभी क्लियर नहीं है। यह एक बड़ा सवाल है। रिफरेंस एप की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से हमें इसका प्रचार प्रसार करने की आवश्यकता है। सूरत के अच्छे ट्रेडर्स भाई, एजेंट और आढ़तिया साथ ही दिसावर के व्यापारी हमें वीडियो उपलब्थ कराते हैं तो इसके सुखद परिणाम सामने आएंगे। मीटिंग में आशीष मल्होत्रा, संतोष माखरिया, राम खंडेलवाल, छीतरमल जैन, प्रदीप केजरीवाल, सुदर्शन मातलहेलिया ने भी अपने विचार रखे। अंत में मीटिंग का समन्वय कर रहे सुनील मित्तल ने भी अपनी बात रखी और सभी का आभार व्यक्त किया।

नई चमकः 11 माह में 10582 करोड़ के लैबग्रान हीरो का निर्यात


सूरत
नेचुरल हीरो का विकल्प बना लेब्रग्रॉन डायमंड अब धीरे-धीरे विदेश में अपनी पैंठ जमा रहा है।वर्तमान वित्तीय वर्ष 2023-24 में 11 महीने मे 10582 करोड रुपए से अधिक के लैबग्रान डायमंड का निर्यात विदेश में हो चुका है।आने वाले दिनों में भी लैबग्रान डायमंड का निर्यात बहुत तेजी से बढ़ेगा ऐसी उम्मीद हीरा उद्यमी बता रहे हैं।
हीरा उद्योग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सूरत में नेचुरल हीरो के साथ लैबग्रान डायमंड का काम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।लगभग 1000 से अधिक डायमंड यूनिट में लैबग्रान डायमंड का काम होता है।सूरत के हीरा उद्यमियों के पास 10000 डायमंड रिएक्टर है।जिनमें की लैबग्रान डायमंड बनाए जाते हैं।कोरोना के बाद से लेब्रग्रॉन डायमंड की डिमांड डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है।अमेरिका यूरोप सहित अन्य देशों में लैबग्रान डायमंड की ज्वेलरी लोग पसंद कर रहे हैं।यह डायमंड देखने में बिल्कुल नेचुरल डायमंड जैसा लेकिन कीमत आधे से भी कम होने के कारण लोग नेचुरल डायमंड की जगह लैबग्रान डायमंड को भी पसंद कर रहे हैं।मध्यमवर्गीय परिवार जो कि अब तक नेचुरल डायमंड नहीं खरीद सकते थे उन्हें विकल्प के तौर पर लेबनान डायमंड मिलने के कारण ज्वेलरी आदि की खरीदी कर रहे है।नेचुरल हीरो की बात करें तो रूस और यूक्रेन का युद्ध के बाद से नेचुरल हीरो जमीनों के लिए संघर्ष जनक स्थिति बनी हुई है। वही लैबग्रान डायमंड का निर्यात तथा बढ़ रहा है। 2023 मे फरवरी महीने में 19582 करोड रुपए के नेचुरल हीरो का निर्यात हुआ।इसके मुकाबले फरवरी 2024 में 14162 करोड रुपए के नेचुरल डायमंड का निर्यात हुआ अर्थात की वर्तमान वर्ष में फरवरी मे नेचुरल हीरो की डिमांड में 28 प्रतिशत की कमी आई है।वहीं लेब्रग्रॉन डायमंड की बात करें तो वर्तमान वित्तीय वर्ष में 11537 करोड रुपए के लैबग्रॉन डायमंड का निर्यात हुआ।जो कि बीते वर्ष की अपेक्षा 3.29 प्रतिशत अधिक हैं।
हीराउद्योग के सूत्रों का कहना है कि सूरत में 2 लाख से अधिक लोग लैबग्रॉन डायमंड के कारोबार से जुड़े हैं।मंदी के समय में भी लैबग्रान डायमंड ने ही कई हीरा श्रमिकों को रोजगार देकर बेरोजगार होने से बचाया था।आने वाले दिनों में भी इलेक्ट्रॉन डायमंड का भविष्य उज्जवल है।
— पाँच माह मे लैबग्रॉन हीरो का निर्यात
महीना ————-——-निर्यात
अप्रेल-23—-838 करोड
मई-23—————-1147 करोड
जून-23———-901 करोड
जुलाई—23——-866करोड
अगस्त—23 ——-974 करोड
सितंबर—23———1102करोड
अक्टूबर—23——-1135 करोड
नवंबर—23———861 करोड
दिसंबर—23———695 करोड
जनवरी_24____946 करोड
फरवरी—24——1153 करोड

जीएसटीः ई-वे बिल बिना माल की बिक्री रोकने के लिए पैट्रोलिंग वैन की संख्या बढ़ाई!

सूरत
स्टेट जीएसटी विभाग करचोरी रोकने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहा है।सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ इन डायरेक्ट टैक्स एंड कस्टम की ओर से भी टैक्स चोरों को सबक़ सिखाने के लिए आए दिनों जीएसटी के नियमों में संशोधन किए जाते हैं।जीएसटी रिटर्न से लेकर ई-वे बिल में भी अब तक कई बार नियमों में परिवर्तन आ चुका है।इसके बावजूद जीएसटी चोरी करने वाले व्यापारी अलग अलग ढंग से टैक्सचोरी करने का प्रयास करते रहते हैं।कई बार बिना बिल के ही व्यापारी माल बेच देते हैं।इस तरह कि टैक्सचोरी रोकने के लिए सूरत में सड़कों पर मोबाइल पैट्रोलिंग वैन घूमते रहती है।इस मोबाइल वैन की संख्या अब से बढ़ा दी गई है।सूरत शहर में अब तक दो पेट्रोलिंग वैन हाईवे पर और सड़कों पर से आने वाले गाड़ियों पर वाच रखते थी और यदि तक हो तो गाड़ी रुकवाकर ड्राइवरों से ई- वे बिल मांग लेते। अब से पेट्रोलिंग वैन में अधिकारियों की संख्या और गाड़ी की संख्या बढ़ा दी गई है।सूरत में बड़े पैमाने पर कपड़ा बनता है।इसलिए बिना बिल के कपड़ों की ख़रीदारी भी कई लोग करते हैं। पेट्रोलिंग वैन की जाँच के दौरान बड़े पैमाने पर कपड़े के की टैक्स चोरी सामने आयी है।इसके अलावा इलेक्ट्रिक साधन, कैमिकल भंगार आदि भी पकड़े गए हैं। जीएसटी डिपार्टमेंट बिना बिल के बेचे जाने वाले माल पकड़कर ज़ब्त कर लेता है और माल बेचने वाले से जीएसटी की रक़म तथा पेनाल्टी वसूल करता है।
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जीएसटी विभाग करचोरो के खिलाफ सक्रिय
वर्तमान वित्तीय वर्ष में एक सूरत जीएसटी डिपार्टमेंट में सूरत में 12 करोड़ रुपए से अधिक की टैक्स चोरी पकड़ी है।जीएसटी डिपार्टमेंट ने बीते दिनों बड़े पैमाने पर ट्यूशन क्लासेज, ट्रैवल एजेन्सी,होटल संचालक सहित अन्य कई व्यापारियों पर छापेमारी की थी और र करोड़ रुपए की टैक्स चोरी भी पकड़ी थी। इसके पहले डिपार्टमेंट ने बोगस बिलिंग करने वालों के ख़िलाफ़ भी मुहिम शुरू करके सूरत में डेढ़ सौ से अधिक फ़र्ज़ी व्यापारी पेढ़ियां ढूंढ निकाली थी। इनके ख़िलाफ़ अभी भी डिपार्टमेंट जाँच कर रहा हैऔर जिन लोगों ने फ़र्ज़ी व्यापारियों से बिल ख़रीदा था उनसे रिकवरी की जा रही है।

नई टैक्सटाइल पॉलिसी मे 30 प्रतिशत कैपिटल तथा 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी की माँग


अन्य राज्यों से बेहतर टैक्सटाइल पॉलिसी बनाने के लिए कपड़ा उद्यमियों की गुहार

सूरत
गुजरात की टेक्सटाइल पॉलिसी 31 दिसंबर को समाप्त हो गई है।ऐसे में कपड़ा उद्यमियों को नई टेक्सटाइल पॉलिसी से कई उम्मीदें हैं।कपड़ा उद्योगों का मानना है कि अन्य राज्यों में टेक्सटाइल पॉलिसी में कपड़ा उद्यमियों के लिए कई राहत होने के चलते वहां पर कपड़ा उद्योग का विकास तेजी से हो रहा है।यदि गुजरात की टेक्सटाइल पॉलिसी में कुछ नई चीजों को नहीं शामिल किया गया तो यहां से बड़े पैमाने पर कपड़ा उद्योग का पलायन हो सकता है।इसलिए चेंबर ऑफ कॉमर्स तथा कपड़ा उद्योग के कई संगठनों ने राज्य सरकार से टेक्सटाइल पॉलिसी में कई प्रकार की सब्सिडी की मांग की है।

  • चैम्बर तथा कपड़ा संगठन के प्रतिनिधी मिले अधिकारियों से
    गत सोमवार को राज्य सरकार के उद्योग और खनिज विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी एस. जे हैदर वित्त मंत्रालय के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी जेपी गुप्ता ने नई टेक्सटाइल पॉलिसी के बारे में चर्चा करने के लिए तमाम स्टेकहोल्डर को बुलाया था। जिसमे की चेंबर ऑफ कॉमर्स से पूर्व प्रमुख आशिष गुजराती तथा किरण ठुम्मर और फिआस्वी के अध्यक्ष भरत गांधी तथा फोगवा के प्रमुख अशोक जीरावाला फोस्टा के प्रमुख कैलाश हकीम आदि उपस्थित रहे। कपड़ा उद्यमियों का कहना था कि गुजरात की पुरानी टेक्सटाइल पॉलिसी में कपड़ा उद्योग के लिए जो मदद है उसे यथावत रखना चाहिए। लेकिन गुजरात अन्य राज्यों की तुलना में पीछे ना रह जाए इसलिए कपड़ा उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए अन्य नई चीज भी इसमें शामिल करना चाहिए। जैसे की 30% कैपिटल सब्सिडी साथ 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी एवम आईटी और एचटी बिजली कनेक्शन के लिए क्रमशः तो और ₹3 प्रति यूनिट इलेक्ट्रिक सब्सिडी होनी चाहिए।
  • ब्लैकआउट पीरियड नहीं रह सके इस पर भी ज़ोर
    अलावा कपड़ा उद्यमियों ने यह भी कहा कि 31 दिसंबर को समाप्त हो रही टेक्सटाइल पॉलिसी का अमल 1 जनवरी 2024 से किया जाना चाहिए ताकि कोई ब्लैकआउट पीरियड नहीं रह सके। सूरत पॉलिएस्टर कपड़ों का सबसे बड़ा उत्पादक शहर है। सूरत में बने कपड़े देश विदेश में बिकते हैं महाराष्ट्र राज्य सरकार ने भी टेक्सटाइल पॉलिसी के विकास के लिए टेक्सटाइल पॉलिसी बीते दिनों में घोषित की थी। जिसमे की कपड़ा उद्यमियों के लिए कई छूट दी गई है।इसलिए कपड़ा जमीन चाहते हैं कि गुजरात की टेक्सटाइल पॉलिसी में भी कई छूट दी जाए जिससे कि गुजरात के कपड़ा उद्यमी महाराष्ट्र की ओर में पलायन नहीं हो।

मार्च अंत का असर- जीएसटी वसूली के लिए विभाग ने भेजे नोटिस

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सूरत
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2023-24 समाप्त होने में कुछ ही दिन शेष बचे हैं।ऐसे में आयकर तथा जीएसटी विभाग में वसूली तेज शुरू कर दी है। हाल में ही आयकर विभाग ने कपड़ा कारोबारी, डॉक्टर तथा सिक्योरिटी एजेन्सी पर सर्च की कार्रवाई की थी। इसके बाद अब जीएसटी विभाग ने जिन करदाताओं ने अपनी दुकान या व्यापार बंद करके अन्य स्थानों पर शिफ्ट कर दिया है या बिल्कुल कारोबार बंद कर दिया है लेकिन जीएसटी नहीं चुकाया है। ऐसे व्यापारियों को ट्रेस करके डिपार्मेंट नोटिस भेज रहा है। जीएसटी विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जीएसटी डिपार्टमेंट के पास जो इन्टेलिजन्स सिस्टम मौजूद है। उसे डिपार्टमेंट को करदाता के बारे में लगातार जानकारी मिलते रहती है। जिन करदाता का पेमेंट समय पर नहीं मिल रहा है या जो रिटर्न समय पर नहीं फाइल कर रहे हैं। ऐसे तमाम व्यापारियों को ट्रेस किया जा रहा है और उन्हें नोटिस भेज कर रिटर्न फाइल करने तथा टैक्स चुकाने के लिए कहा जा रहा है।हालांकि डिपार्टमेंट के सामने दिक़्क़त यह भी है कि कई व्यापारियों ने दुकान बंद तो कर दी है अब उन्हें ढूंढ पाना डिपार्टमेंट के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा हो रहा है। हालांकि कई व्यापारी ऐसे भी हैं कि जिन्होंने सिर्फ अपना स्थान बदला है लेकिन व्यापार चालू है। ऐसे व्यापारियों को डिपार्मेंट कई माध्यमों से ढूंढने का प्रयास कर रहा है। उल्लेखनीय है कि नियम के अनुसार यदि किसी व्यापारी को अपना व्यापार बंद करना हो तो उसे जीएसटी विभाग को जानकारी देकर साथ ही अपने जीएसटी संबंधित तमाम जवाबदारी चुकाने के बाद व्यापार बंद करना चाहिए नहीं तो जीएसटी डिपार्टमेंट की ओर से रिटर्न फाइल करने के लिए नोटिस आ सकते हैं।
बडी संख्या में नोटिस वापिस आए
जीएसटी विभाग की ओर से जो नोटिस भेजे जा रहे हैं। इनमें से ज़्यादातर वर्ष 2018-19 या 2019-20 के हैं। इन दिनों कोरोना काल के समय कई व्यापारी रिटर्न नहीं कर पाए थे। बड़ी संख्या में व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर दी थी।विभाग की ओर से जो नोटिस भेजे गए हैं।उसमें से बड़ी संख्या में वापिस आ रहे हैं अब विभाग ऐसे व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन रद करने की कार्रवाई आगे बढ़ा सकता है।

एडवांस टैक्स कम चुकाने वालों पर आयकर की पैनी नज़र
आयकर विभाग ने जो करदाता एडवांस टैक्स कम भर रहे हैं या सेल्फ़ एसेसमेन्ट टैक्स कम भर रहे हैं उन पर पैनी नज़र रखी है।आयकर विभाग ने बीते दिनों इस बारे में कई करदाताओ को पत्र भेजकर इस बारे में जानकारी भी माँगी थी।

કામદારોના પ્રાણ પ્રશ્નો બાબતે રાહુલ ગાંધી સમક્ષ રજૂઆત કરાઈ

ભારત જોડો ન્યાય યાત્રા દરમિયાન બારડોલીમાં ઇન્ટુકનાં આગેવાનો દ્વારા રાહુલ ગાંધીને પત્ર આપી સુરત સહિત દક્ષિણ ગુજરાતના કામદારોના પ્રશ્નો બાબતે લેખિત રજૂઆત કરવામાં આવી હતી.

રવિવારે કોંગ્રેસ નેતા રાહુલ ગાંધીની ભારત જોડો ન્યાય યાત્રા સુરતના બારડોલીથી પસાર થઈ હતી. આ દરમિયાન ઈન્ટુકના ગુજરાત પ્રદેશ પ્રમુખ નૈશાદ દેસાઈ, સુરત ઈન્ટુક પ્રમુખ ઉમાશંકર મિશ્રા, કામદાર નેતા અને ઈન્ટુક અગ્રણી શાન ખાન સહિત ઈન્ટુકના અન્ય હોદ્દેદારોએ રાહુલ ગાંધીનું સ્વાગત કર્યું હતું. ઈન્ટુક દ્વારા કામદારોનાં પ્રાણ પ્રશ્નો બાબતે એક પત્ર રાહુલ ગાંધીને આપવામાં આવ્યો હતો. આ પત્રમાં જણાવવામાં આવ્યું હતું કે સુરત સહિત દક્ષિણ ગુજરાતમાં ટેક્સટાઈલ, ડાયમંડ સહિત અન્ય ઔદ્યોગિક એકમોમાં લાખો કામદાર ભાઈ-બહેનો કાર્યરત છે, જેમના લોહી અને પરસેવાથી ઉદ્યોગો ચાલે છે. આમાં મોટાભાગના કામદારોના ઉત્તર પ્રદેશ, બિહાર, ઝારખંડ, ઓરિસ્સા જેવા રાજ્યોના પરપ્રાંતિય કામદારો છે. ઉપરોક્ત એકમોમાં કામ કરતા કામદારોનું ભારે શોષણ થઈ રહ્યું છે, તેઓને કોઈપણ પ્રકારના કાયદાકીય લાભો અને સુવિધાઓ મળી રહી નથી અને કામદારો પાસે તેમની શારીરિક ક્ષમતા કરતા વધુ કામ કરાવવામાં આવી રહ્યું છે. મોટાભાગના કામદારો લઘુત્તમ વેતન, PF, ESI, ગ્રેજ્યુટી વગેરે જેવા મૂળભૂત અધિકારોથી પણ વંચિત છે અને આ ઉદ્યોગોમાં કામ કરતા કામદારોને ન તો કોઈ નોકરીની સુરક્ષા છે કે ન તો કોઈ સ્વાસ્થ્ય કે સામાજિક સુરક્ષા. માલિકો કોઈપણ કારણ બતાવ્યા વગર મનસ્વી રીતે કામદારોને જ્યારે ઈચ્છે ત્યારે કાઢી મૂકે છે.

આ ઉદ્યોગોમાં ભારે મશીનો અને ખતરનાક રસાયણોનો ઉપયોગ કરવામાં આવે છે જેના કારણે સુરક્ષા અને સલામતીના સાધનો આપવા જરૂરી છે પરંતુ કામદારોને કોઈપણ પ્રકારના સલામતી અને સુરક્ષા સાધનો આપવામાં આવતા નથી જેના કારણે અવારનવાર અકસ્માતો થતા રહે છે. અને કામદારો જીવ ગુમાવે છે અને ગંભીર રીતે ઘાયલ પણ થાય છે, પરંતુ આવી સ્થિતિમાં પણ કામદારો અને તેમના પરિવારજનોને યોગ્ય વળતર મળતું નથી. ઉદ્યોગોના માલિકોને સત્તાનું સીધું રક્ષણ પ્રાપ્ત છે કોઈપણ સરકારી વિભાગમાં કામદારોની કોઈ સુનાવણી થતી નથી જો કોઈ કામદાર તેની સાથે થઈ રહેલા અન્યાય સામે ફરિયાદ કરે તો તે કામદારને ડરાવી-ધમકાવીને અનેક પ્રકારે ત્રાસ આપવામાં આવે છે. વર્તમાન સમયમાં કામદાર અને શ્રમિક વર્ગ આવા તમામ અન્યાય સામે ઝઝૂમી રહ્યો છે, આવી પરિસ્થિતિમાં સુરત અને દક્ષિણ ગુજરાતના કામદારોને તમારી પાસેથી ઘણી અપેક્ષાઓ છે તેથી અમારી માંગણી છે કે અમારા ઉપરોક્ત તમામ મુદ્દાઓને ધ્યાનમાં રાખીને આપ કામદારો માટે ન્યાયનો અવાજ બુલંદ કરો.

ચેમ્બર ઓફ કોમર્સ દ્વારા સુરતને સસ્ટેનેબલ ટેક્ષ્ટાઇલ હબ બનાવવા માટે મિટીંગ યોજાઇ

સુરતઃ ધી સધર્ન ગુજરાત ચેમ્બર ઓફ કોમર્સ એન્ડ ઈન્ડસ્ટ્રી દ્વારા શુક્રવાર, તા. ૦૧ માર્ચ ર૦ર૪ના રોજ સાંજે ૪:૦૦ કલાકે સંહતિ, સરસાણા, સુરત ખાતે સેન્ટર ફોર એન્વાયરમેન્ટ એજ્યુકેશન (CEE), સાઉથ ગુજરાત ટેક્ષ્ટાઈલ પ્રોસેસર્સ એસોસિએશન (SGTPA), ધી સધર્ન ગુજરાત ચેમ્બર ઓફ કોમર્સ એન્ડ ઈન્ડસ્ટ્રી (SGCCI) અને યુનાઈટેડ નેશન્સ એન્વાયરમેન્ટ પ્રોગ્રામ (UNEP)ની ‘સુરતને સસ્ટેનેબલ ટેક્ષ્ટાઇલ હબ બનાવવા’ના વિષય પર સંયુક્ત મિટીંગ મળી હતી. UNEP દ્વારા સુરત ટેક્ષ્ટાઈલ ક્લસ્ટરના સસ્ટેનેબિલીટી પ્રોજેકટને વધુ ચાર વર્ષ માટે લંબાવવામાં આવ્યો છે ત્યારે આ પ્રોજેકટ અંતર્ગત કયા – કયા લક્ષ્યો પ્રાપ્ત કરી શકાય અને એના માટે કઇ કઇ કામગીરી કરવાની રહેશે તે અંગે આ મિટીંગમાં વિસ્તૃત ચર્ચા વિચારણા કરવામાં આવી હતી.

ચેમ્બર ઓફ કોમર્સના પ્રમુખ રમેશ વઘાસિયાએ મિટીંગમાં સર્વેને આવકાર્યા હતા. તેમણે સ્વાગત પ્રવચન કરતા જણાવ્યું હતું કે, ‘હાલમાં વિશ્વના દરેક ખૂણે પ્રદૂષણ ફેલાયું છે. એક જવાબદાર નાગરિક તરીકે આપણી ફરજ છે કે, પર્યાવરણને બચાવવાની દિશામાં મહત્વના પગલાં લઈએ. નવી પેઢીને પ્રદૂષણ રહિત જીવન આપવાની દિશામાં તમામ ઉદ્યોગકારો અને નાગરિકોએ સાથે મળીને કાર્ય કરવાનું છે’ તેવી તેમણે અપીલ કરી હતી.

તેમણે મિશન ૮૪ અંર્તગત ચેમ્બર અને યુ.એસ. ગ્રીન બિલ્ડીંગ કાઉન્સિલની વચ્ચે ભારતને વર્ષ ર૦૭૦ સુધીમાં નેટ ઝીરો એમિશન બનાવવા માટે એમઓયુ સાઈન કરવામાં આવ્યા છે તેની માહિતી આપતા જણાવ્યું હતું કે, ઝીરો એમિશન–ર૦૭૦ અંર્તગત દક્ષિણ ગુજરાતની વિવિધ ઈન્ડસ્ટ્રીમાં પર્યાવરણને વધુ નુકશાન ન થાય તે દિશામાં કાર્યક્રમો કરવામાં આવશે. સાથે જ વિવિધ ટેકનોલોજી વિશે ઉદ્યોગકારોને માહિતગાર કરાશે.

યુનાઈટેડ નેશન્સ એન્વાયરમેન્ટ પ્રોગ્રામ (UNEP)ના પ્રોગ્રામ ઓફિસર ક્લાઉડીયા જિઆકોવેલીએ જણાવ્યું હતું કે, ‘UNEP દ્વારા સુરત ટેક્ષ્ટાઈલ ક્લસ્ટર સસ્ટેનેબિલીટી પ્રોજેકટને વધુ ચાર વર્ષ માટે લંબાવવામાં આવ્યો છે, જે ડિસેમ્બર ર૦ર૩થી સપ્ટેમ્બર ર૦ર૭ સુધીનો છે. જેમાં ટેક્ષ્ટાઈલ મંત્રાલય, ભારત સરકાર અને UNEP સાથે મળીને કાર્ય કરે છે અને CEE અમદાવાદને અમલીકરણની જવાબદારી આપવામાં આવી છે. જેમાં SGCCI અને SGTPA સહભાગી થઈ કાર્ય કરી રહ્યા છે.’

સુરતને સસ્ટેનેબલ ટેક્ષ્ટાઇલ હબ બનાવવા માટે તેમણે 8Rનો કોન્સેપ્ટ ઉદ્યોગ સાહસિકોને સમજાવ્યો હતો. 8R એટલે રિફયુઝ, રિડયુસ, રિયુઝ, રિપેર, રિફર્બિશ, રિમેન્યુફેકચર, રિપર્પઝ અને રિસાયકલ. જેનો ઉપયોગ કરી સુરતને સસ્ટેનેબલ ટેક્ષ્ટાઇલ હબ બનાવી શકાશે.

તેમણે ઉદ્યોગકારોને જણાવ્યું હતું કે, યુરોપમાં આગામી દિવસોમાં પ્રોડકટ એન્વાયરમેન્ટ ફૂટપ્રિન્ટના કોમ્પ્લાયન્સ ફરજીયાત થવાના છે, આથી યુરોપમાં કોઈપણ પ્રોડકટ એક્ષ્પોર્ટ કરવામાં આવશે તો તેમાં પ્રોડકટ એન્વાયરમેન્ટ ફૂટપ્રિન્ટની માહિતી ફરજિયાત રહેશે. ભવિષ્યમાં યુરોપમાં એક્ષ્પોર્ટ થતાં પ્રોડકટની સ્પર્ધાત્મકતા તેની એન્વાયરમેન્ટ ફૂટપ્રિન્ટ કેટલી છે? તેના આધારે થશે.

સુરત ટેક્ષ્ટાઈલ ક્લસ્ટર સસ્ટેનેબિલિટી પ્રોજેકટના અંતર્ગત UNEP દ્વારા આના કોમ્પ્લાયન્સ અંગે સુરતના ટેક્ષ્ટાઈલ ઉદ્યોગકારોને માહિતગાર કરી તેઓના પ્રોડકટ યુરોપના એન્વાયરમેન્ટ ફૂટપ્રિન્ટના માપદંડ અનુસાર બને તે અંગેની જરૂરી સમજણ આપવામાં આવશે. આ સંદર્ભમાં જે કાર્યક્રમો અમલી કરવામાં આવશે તેમાં નાણાંકીય જરૂરિયાત હોય તો ઈન્ટરનેશનલ ફાયનાન્સ કોર્પોરેશન પાસેથી પણ ભંડોળ મેળવવામાં આવશે. જેમાં ટેક્ષ્ટાઈલ મંત્રાલય ભારત સરકાર મદદરૂપ થશે તેમ તેમણે જણાવ્યું હતું.

સાઉથ ગુજરાત ટેક્ષ્ટાઈલ પ્રોસેસર્સ એસોસિએશનના પ્રમુખ જિતેન્દ્ર વખારિયાએ જણાવ્યું હતું કે, ‘ભારતમાં ટેક્ષ્ટાઈલ ક્ષેત્રે કાપડ બનાવવામાં સુએજ ટ્રીટેડ વોટરનો ઉપયોગ કરનાર પ્રથમ શહેર સુરત છે. શહેરના કેટલાક વિસ્તારોમાં જર્મન ટેકનોલોજીથી ટેક્ષ્ટાઈલ ક્ષેત્રના સોલીડ વેસ્ટનું નિરાકરણ કરવાની પ્રક્રિયા હાથ ધરાઈ છે.

આ મિટીંગમાં ચર્ચા–વિચારણાના અંતે શહેરમાં આગામી ચાર વર્ષમાં ટેક્ષ્ટાઈલ ઈન્ડસ્ટ્રીમાં ઉપયોગમાં લેવામાં આવતા કુલ પાણીના પ૦ ટકા પાણી ટ્રીટ કરી રીયુઝડ વોટરનો ઉપયોગ કરવામાં આવશે. સુરત એમએમએફ સેન્ટર હોવાના કારણે સકર્યુલારિટીને વેગ આપવા માટે કાપડનો પુનઃ વપરાશ વધારવા માટે સુરત ટેક્ષ્ટાઈલ ક્લસ્ટરમાં વિવિધ જગ્યાએ મોટા ક્લોથ્સ કલેકશન સેન્ટર ઉભા કરવામાં આવશે. જ્યારે ગ્રીન એનર્જી ક્ષેત્રે આગામી ચાર વર્ષ દરમિયાન ટેક્ષ્ટાઈલ ઈન્ડ્‌સ્ટ્રીમાં કુલ વીજળીના ઉપયોગમાંથી પ૦ ટકા વીજળીનો વપરાશ રિન્યુએબલ એનર્જી થકી કરવાનો લક્ષ્યાંક રાખવામાં આવ્યો છે.

સમગ્ર મિટીંગનું સંચાલન સેન્ટર ફોર એન્વાયરમેન્ટ એજ્યુકેશનના સિનિયર પ્રોગ્રામ ડાયરેક્‌ટર તુષાર જાનીએ કર્યું હતું. આ પ્રસંગે ચેમ્બરના ઉપ પ્રમુખ વિજય મેવાવાલા, તત્કાલિન પૂર્વ પ્રમુખ હિમાંશુ બોડાવાલા, માનદ્‌ ખજાનચી કિરણ ઠુમ્મર, ચેમ્બરની એન્વાયરમેન્ટ કમિટીના એડવાઈઝર વત્સલ નાયક અને ટેક્ષ્ટાઇલ ઉદ્યોગકારો ઉપસ્થિત રહયા હતા. મિટીંગના અંતે UNEPના પ્રોગ્રામ ઓફિસર ક્લાઉડીયા જિઆકોવેલીએ ઉદ્યોગકારો સાથે વાર્તાલાપ કરી રોડમેપ નક્કી કર્યો, જેનો રિપોર્ટ મંત્રાલયને આપવામાં આવશે. ચેમ્બર ઓફ કોમર્સના પૂર્વ પ્રમુખ આશીષ ગુજરાતીએ ઉપસ્થિત સર્વેનો આભાર માની મિટીંગનું સમાપન કર્યું હતું.

हेडिंग हीरा उद्योग का डाटाबेज बनाने की कवायतः राज्य सरकार करेगी सर्वे


सूरत
दुनिया भर में हीरा उद्योग के तौर पर डंका बजाने वाले सूरत शहर में हीरा उद्योग से जुड़ी तमाम जानकारियो का डाटाबेज बनाने के लिए राज्य सरकार ने सर्वे करने का फ़ैसला किया है।सर्वे के माध्यम से राज्य सरकार हीरा उद्योग पर निर्भर लोग, उनकी आर्थिक परिस्थिति सहित कई जानकारियाँ एकत्रित करेगी और भविष्य में यदि किसी प्रकार की आवश्यकता उत्पन्न हुई को रिपोर्ट के आधार पर फ़ैसला लिए जाएगा। ऐसा माना जा रहा है।
हीरा उद्योग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सूरत में नेचरल डायमंड और लैबग्रान डायमंड उद्योग दोनों ही बड़े पैमाने पर है। दोनों में कुल मिलाकर लगभग 7 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मिलता है। सूरत में तैयार होने वाले हीरे अमेरिका,यूरोप,जापान हांगकांग,चीन देशो मे निर्यात किए जाते हैं। सूरत मे नेचरल हीरो के साथ अब लैबग्रान हीरा उद्योग का भी कारोबार बढ़ा है। मंदी के दिनों में लैबग्रान हीरा उद्योग ने लाखों लोगों को रोज़ी रोटी दी थी। इतने बड़े पैमाने पर उद्योग फ़ैला होने के बाद वे भी राज्य सरकार के पास ठोस जानकारी नही थी।


राज्य सरकार की पॉलिसी बनाने में मिलेगी मदद
हीरा उद्योग से जुड़े श्रमिको के बारे मे जानकारी के अभाव में वर्ष 2008 में आर्थिक मंदी के समय वे यहाँ उद्योग से जुड़े लोगों को आर्थिक मदद करने मे बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था लेकिन अब राज्य सरकार हीरा उद्योग की जानकारी एकत्रित करना चाहती है जिसके चलते बीते दिनों राज्य सरकार के अधिकारी सूरत आए थे और 35 कंपनियों के एचआर डिपार्टमेंट के अधिकारी तथा डायमंड एसोसिएशन के पदाधिकारियों से मीटिंग की। मीटिंग के दौरान उन्होंने प्राथमिक जानकारी एकत्रित करने का प्रयास किया।

आगामी दिनों में सर्वे शुरू होने की उम्मीद
सूरत में 3000 से अधिक छोटे बड़े हीरा के कारख़ाने हैं। राज्य सरकार हीरा उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या तथा उनकी जीवनशैली के बारे में अध्ययन करना चाहती है। इसे ध्यान में रखते हुए बीते दिनों में राज्य सरकार के अधिकारी डायमंड कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट के अधिकारियों से मिले थे आगामी दिनों में सर्वे शुरू होने की संभावना है।
जगदीश खूँट, प्रमुख, सूरत डायमंड एसोसिएशन
हीरा उद्यमियों के लिए शुरू करने चाहिए योजनाएँ
हीरा उद्योग का सर्वे करने के बाद राज्य सरकार को हीरा उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों के विकास के लिए योजना शुरू करने चाहिए।हमने इस बारे में कई बार राज्य सरकार से गुहार लगायी है।जिसके चलते राज्य सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है।इस सर्वे से हीरा उद्योग के सभी लोगों को लाभ होगा।
भावेश टांक, प्रमुख, सूरत डायमंड वर्कर यूनियन