कपड़ा उद्योग में श्रमिकों की कमी- दक्षिण गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों पर नजर

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सूरतसिल्क सिटी सूरत की पहचान कहे जाने वाले कपड़ा उद्योग में बढ़ते जा रही श्रमिकों की कमी ने कपड़ा उद्यमियों को नए विकल्प तलाशने के लिए मजबूर कर दिया है। सूरत में हर साल बड़ी संख्या में कपड़ा उद्योग में से लोग बाहर जा रहे हैं जबकि इतनी गति से नए लोग नहीं जुड़ रहे हैं। इसके चलते अब सूरत के कपड़ा उद्यमियों ने प्रशिक्षण केंद्र बनाने तथा दक्षिण गुजरात के आसपास के क्षेत्र में से कुशल श्रमिकों को लाकर ट्रेनिंग देने की शुरुआत की है। कपड़ा उद्योग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सूरत में 6 लाख मशीन है। इनमें डेढ़ लाख के करीब हाईटेक मशीने हैं। 350 प्रोसेसिंग यूनिट है और 2 लाख के करीब एंब्रॉयडरी मशीन है।इसके अलावा कपड़ा बाजार की बात करें तो 200 के करीब कपड़ा मार्केट है। इनमें एक लाख से अधिक दुकानें हैं।

प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष ढंग से सूरत के कपड़ा कारोबार से 20 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। 10 साल पहले की बात करें तो सूरत के कपड़ा उद्योग में नौकरी के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, उड़ीसा आदि राज्यों से बड़े पैमाने पर लोग नौकरी के लिए आते थे लेकिन बीते कुछ वर्षों से नया युवा वर्ग नौकरी में आने के लिए ज्यादा उत्सुक नहीं दिख रहा। कई राज्यों में चल रही नरेगा योजना के कारण लोग वहीं रुक जाते हैं और कुछ लोग अपना ही छोटा-मोटा कारोबार शुरू करके रोजगार के अवसर बना लेते हैं। इसलिए सूरत के कपड़ा उद्योग में श्रमिकों की कमी शुरू हो गई है।-

-25 से 30% श्रमिकों की कमी से जूझ रहा उद्योग

कपड़ा उद्यमियों का कहना है कि वर्तमान समय में कपड़ा उद्योग में 20 लाख लोग जुड़े हैं जबकि अभी भी 20 से 25% तक श्रमिकों की कमी है। दिवाली और होली जैसे त्योहारों के समय पर यह कमी बढ़कर 50% तक हो जाती है। उन दिनों तो कारखाने भी बंद करने की नौबत आ जाती है। इस स्थिति को समझते हुए कपड़ा वह जमीनों ने इसके विकल्प की तलाश शुरू कर दी है। हाल में ही चेंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से एक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया था। जिसमें कि इस पर चर्चा की गई। कई कपड़ा उद्योगों ने इस मामले की गंभीरता को समझने के लिए स्किल्ड केंद्र बनने पर भी जोड़ दिया। ---

----ग्रामीणों को ट्रेनिंग देने की शुरुआत

दक्षिण गुजरात में बड़े पैमाने पर ग्रामीण लोग रहते हैं जो कि छोटा-मोटा काम करके आजीविका चला रहे हैं। उन लोगों को गांव से लाकर ट्रेनिंग देने की भी शुरुआत की गई है। इसके अवेज में उन्हें पर्याप्त स्टाइपेड और भी दिया जाता है। इन्हें ट्रेनिंग देने का मुख्य उद्देश्य कपड़ा उद्योग में बढ़ रही श्रमिकों की कमी को रोकना है। इसके अलावा महिलाओं को भी धीरे-धीरे कपड़ा उद्योग में लाने के लिए भी प्रयास शुरू किए गए हैं। हाल में भी कई बड़े उद्योगों ने उनके यूनिटों में महिलाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था की है लेकिन महिलाएं 24 घंटे तक सुरक्षा के साथ नौकरी कर सके इसलिए भी प्रयास जारी किए गए हैं।

चैंबर ऑफ़ कॉमर्स ने शुरू की कवायतचें

बर ऑफ कॉमर्स तथा जीएफआरआरसी कपड़ा उद्योग में श्रमिकों की घटती संख्या को गंभीरता से लेते हुए इस दिशा पर काम शुरू किया है। चेंबर ऑफ कॉमर्स ने स्किल्स केंद्र के माध्यम से लोगों को प्रशिक्षित कर कपड़ा उद्योग से जोड़ने के लिए भी कवायत शुरू की है। कपड़ा उद्योग में स्कील्ड लेबर आने से एक और जहां उत्पादन बढ़ेगा वहीं नए लोग आने से श्रमिकों की कमी भी नहीं खुलेगी। गिरधर गोपाल मुंदडा,कपड़ा उद्यमी